इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: धर्म परिवर्तन कानून के तहत झूठे केसों पर चिंता

थर्ड पार्टी द्वारा FIR दर्ज करने के बढ़ते मामलों पर कोर्ट नाराज़, गृह विभाग से मांगा जवाब

On

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन कानून के तहत तीसरे पक्ष द्वारा दर्ज किए जा रहे कथित झूठे मामलों पर गंभीर चिंता जताई है और सरकार से जवाब मांगा है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत तीसरे पक्ष द्वारा दर्ज किए जा रहे कथित झूठे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल कर यह बताएं कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

अदालत ने कहा, “अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) यह स्पष्ट करें कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जा रही है, जहां 2021 के कानून के तहत लगातार FIR दर्ज की जा रही हैं, लेकिन बाद में वे पूरी तरह निराधार साबित होती हैं, जिससे प्रशासन का कीमती समय व्यर्थ होता है।”

कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि 19 मई तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर रिकॉर्ड के साथ जवाब देना होगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने 13 अप्रैल को एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया।

यह मामला तीन मुस्लिम पुरुषों के खिलाफ 2021 के धर्म परिवर्तन कानून के तहत दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका से जुड़ा था।

मामले में कथित पीड़िता ने अदालत में दिए बयान में आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह आरोपी युवक से प्रेम करती है और उसे अपने परिजनों व अन्य लोगों से परेशान किए जाने का डर है।

अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयान और FIR में लगाए गए आरोपों के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, जो यह दर्शाता है कि ऐसे मामलों में तीसरे पक्ष द्वारा FIR दर्ज कराने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है।

यह मामला बहराइच जिले के कोतवाली नगर थाने में दर्ज FIR से संबंधित है, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी को एक मुस्लिम युवक और उसके साथियों ने बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन और शादी के लिए प्रेरित किया।

हालांकि, अदालत ने पाया कि पीड़िता बालिग है और पिछले तीन वर्षों से उस युवक के साथ प्रेम संबंध में है। उसके बयान ने शिकायतकर्ता के आरोपों को खारिज कर दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया ने एक “अजीब मोड़” ले लिया है और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जांच अधिकारी किसी दबाव में काम कर रहा था या किसी अन्य कारण से प्रभावित था।

अदालत ने ऐसे मामलों में तीसरे पक्ष द्वारा FIR दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी विशेष ध्यान दिया।Screenshot_504

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

UP बोर्ड रिजल्ट 2026 जल्द, अप्रैल अंत तक जारी होने की संभावना

नवीनतम

Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software