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हरियाणवी फिल्म ‘बैंगन’ ने फिल्म फेस्टिवल में बिखेरा जादू, ग्रामीण जीवन की संवेदनशील कहानी
हास्य के बीच छिपा गहरा संदेश—शब्दों का असर और आत्मसम्मान की लड़ाई
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित हरियाणा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हरियाणवी फिल्म ‘बैंगन’ का प्रदर्शन हुआ, जिसने अपनी संवेदनशील कहानी और सामाजिक संदेश से दर्शकों को प्रभावित किया।
हरियाणवी फिल्म Baingan का प्रदर्शन Haryana International Film Festival के दौरान Kurukshetra University में किया गया। यह फिल्म युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग और संस्कृति सोसाइटी फॉर आर्ट एंड कल्चरल डेवलपमेंट के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का हिस्सा थी।
अपने हास्यपूर्ण शीर्षक के बावजूद ‘बैंगन’ एक बेहद संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक रूप से गहरी कहानी पेश करती है, जो हरियाणवी लोक जीवन पर आधारित है। लगभग 90 मिनट की इस फिल्म में मुख्य किरदार राधेश्याम है, जिसे अभिनेता Jagbir Rathi ने निभाया है।
फिल्म यह दिखाती है कि लापरवाही में कहे गए शब्द किस तरह गंभीर परिणाम ला सकते हैं और रिश्तों तथा जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें यह भी दर्शाया गया है कि हरियाणवी बोलचाल में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्द भी अनजाने में गहरा भावनात्मक प्रभाव छोड़ सकते हैं।
कहानी राधेश्याम के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक जमींदार है और अपनी आजीविका के लिए किराए पर निर्भर करता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब उसका एक किरायेदार, जो एक पहलवान है, किराया देने से मना कर देता है और मजाक में “बैंगन ले लो” कहकर बात टाल देता है।
जो शुरुआत में एक मामूली घटना लगती है, वह धीरे-धीरे आत्मसम्मान और गरिमा के गहरे संघर्ष में बदल जाती है और अंततः मामला अदालत तक पहुंच जाता है। एक प्रतीकात्मक फैसले में अदालत किराए की वसूली किरायेदार की बैंगन की फसल से करने का आदेश देती है।
फिल्म अपने कथानक के माध्यम से यह संदेश देती है कि शब्दों की शक्ति को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि वे किसी व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर गहरा असर डाल सकते हैं।

