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यमुना एक्शन प्लान को तेज करने के निर्देश, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम
HSPCB ने समयबद्ध परियोजनाओं और जमीनी परिणामों पर दिया जोर, गुरुग्राम में उच्चस्तरीय बैठक
यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए हरियाणा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। HSPCB ने अधिकारियों को समयसीमा में काम पूरा करने और ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यमुना एक्शन प्लान के तहत प्रयासों को तेज करने के लिए Haryana State Pollution Control Board के सदस्य सचिव Yogesh Kumar ने शुक्रवार को गुरुग्राम में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और अधिकारियों को परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर स्पष्ट परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विकास सदन में आयोजित इस बैठक में यमुना में गिरने वाले नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करने और शहर में सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
Gurugram Metropolitan Development Authority और HSPCB के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कुमार ने कहा कि सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में पूरी होनी चाहिए और उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया गया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की संयुक्त सैंपलिंग दोबारा की जाए और 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही, बिना उपचारित अपशिष्ट जल को Leg-III से Leg-II में मोड़ने के निर्देश भी दिए गए, ताकि पानी का बेहतर उपचार और पुनः उपयोग, विशेषकर सिंचाई के लिए, सुनिश्चित किया जा सके।
प्रदूषण के स्रोत पर नियंत्रण के लिए GMDA को स्टॉर्म वाटर ड्रेनों और सीवर लाइनों की सफाई के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने को कहा गया। इसमें अवैध सीवर कनेक्शनों की पहचान और उन्हें हटाने पर भी ध्यान दिया जाएगा, जो प्रदूषण का एक बड़ा कारण हैं।
इसके अलावा, अधिकारियों को तीन महीने के भीतर Leg-II क्षेत्र में सभी प्रदूषण हॉटस्पॉट्स की पहचान और मैपिंग पूरी करने के निर्देश दिए गए, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के लिए अधिक लक्षित और डेटा-आधारित रणनीति बनाई जा सके।
ठोस कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर भी जोर देते हुए कुमार ने निर्देश दिया कि नालों से निकाले गए कचरे का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए और उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य की योजना बेहतर बनाई जा सके।
Municipal Corporation of Gurugram को नए पंजीकृत पानी के टैंकरों की रिपोर्ट देने और अवैध टैंकर संचालन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए विशेष प्रवर्तन टीमें गठित करने को भी कहा गया।
इसके अतिरिक्त, GMDA को नालों के किनारे फेंसिंग की स्थिति पर रिपोर्ट देने और अनधिकृत प्रवेश तथा कचरा फेंकने से रोकने के उपाय करने को कहा गया। सभी STPs का नियमित निरीक्षण भी अनिवार्य किया गया, ताकि संचालन मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि ड्रेन टैपिंग, STP और CETP की स्थापना, बेहतर कचरा प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने जैसे प्रयासों से यमुना के पानी की गुणवत्ता में सुधार के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

