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लिंगानुपात मामले में डॉक्टरों के निलंबन पर भड़का HCMSA, सरकार से आदेश वापस लेने की मांग
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने कहा- सामाजिक समस्या के लिए सिर्फ डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराना गलत
हरियाणा सरकार द्वारा लिंगानुपात सुधार उपायों की निगरानी में कथित कमी को लेकर चार वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के निलंबन के बाद HCMSA उनके समर्थन में उतर आया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर निलंबन आदेश वापस लेने की मांग की है।
डॉक्टरों के निलंबन के खिलाफ HCMSA का विरोध
हरियाणा सरकार द्वारा चार वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित किए जाने के एक दिन बाद हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने इस कार्रवाई का विरोध जताया है।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर निलंबन आदेश रद्द करने और मामले में “सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण” अपनाने की अपील की है।
HCMSA ने सरकार की कार्रवाई को “अतार्किक” बताते हुए कहा कि लिंगानुपात जैसी जटिल सामाजिक समस्या के लिए केवल डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।“सिर्फ डॉक्टरों को दोष देना अन्यायपूर्ण”
HCMSA के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने कहा कि खराब लिंगानुपात के लिए HCMS डॉक्टरों को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना “अनुचित, मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ” है।
उन्होंने कहा,
“हम जवाबदेही के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह निष्पक्ष और न्यायसंगत होनी चाहिए। जब तक डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही साबित न हो, तब तक उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।”
डॉक्टरों का मनोबल गिरने का दावा
डॉ. अनिल यादव ने कहा कि जिन चार डॉक्टरों को निलंबित किया गया है, उनमें एक ऐसा अधिकारी भी शामिल है जिसे हाल ही में लिंगानुपात सुधारने के लिए सराहना मिली थी।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से चिकित्सा समुदाय का मनोबल बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
“लिंगानुपात सामाजिक और सांस्कृतिक समस्या”
HCMSA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. नितिन फाल्सवाल ने कहा कि गिरता लिंगानुपात केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह समस्या समाज और संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है और इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
PC & PNDT Act लागू करने में राजनीतिक दबाव का आरोप
डॉ. नितिन फाल्सवाल ने कहा कि जब डॉक्टर PC & PNDT Act के तहत कार्रवाई करने के लिए छापेमारी करते हैं, तब उन्हें राजनीतिक दबाव का भी सामना करना पड़ता है।
उन्होंने संकेत दिया कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों को कई तरह की चुनौतियों से गुजरना पड़ता है।
Key Highlights:
- चार वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के निलंबन पर HCMSA का विरोध
- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने की मांग
- डॉक्टरों को अकेले जिम्मेदार ठहराने पर सवाल
- HCMSA ने कार्रवाई को “अनुचित और मनमाना” बताया
- PC & PNDT Act लागू करने में राजनीतिक दबाव का आरोप
- लिंगानुपात को सामाजिक और सांस्कृतिक समस्या बताया
FAQ Section:
Q1. हरियाणा सरकार ने किन्हें निलंबित किया है?
सरकार ने लिंगानुपात सुधार उपायों की निगरानी में कथित कमी को लेकर चार वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित किया है।
Q2. HCMSA ने क्या मांग की है?
HCMSA ने मुख्यमंत्री से निलंबन आदेश वापस लेने और मामले में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है।
Q3. डॉक्टरों का विरोध किस बात को लेकर है?
डॉक्टरों का कहना है कि लिंगानुपात जैसी सामाजिक समस्या के लिए केवल चिकित्सा अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
Q4. PC & PNDT Act क्या है?
यह कानून भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए बनाया गया है।
Q5. HCMSA ने किस प्रकार की चुनौतियों का जिक्र किया?
एसोसिएशन ने PC & PNDT Act लागू करते समय राजनीतिक दबाव और सामाजिक चुनौतियों का उल्लेख किया।
Conclusion:
हरियाणा में लिंगानुपात सुधार को लेकर सरकार की सख्ती और डॉक्टरों के विरोध के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां सरकार जवाबदेही तय करने की बात कर रही है, वहीं चिकित्सा समुदाय इसे एकतरफा कार्रवाई बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और HCMSA के बीच संवाद अहम भूमिका निभा सकता है।

