NIT जालंधर की रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय पहचान, UNSCEAR 2024 रिपोर्ट में शामिल हुए 5 शोध पत्र

रेडिएशन मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट लैब की उपलब्धि, पर्यावरण सुरक्षा और रेडिएशन रिसर्च में बढ़ाया भारत का गौरव

On

डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) जालंधर की रेडिएशन मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट लैब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। लैब के पांच शोध पत्र संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित UNSCEAR 2024 रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं।

NIT जालंधर की रिसर्च को मिली वैश्विक पहचान

डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) जालंधर की रेडिएशन मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट लैब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

प्रोफेसर रोहित मेहरा के नेतृत्व में संचालित इस लैब के पांच शोध प्रकाशनों को संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक समिति (UNSCEAR) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट “Sources, Effects and Risks of Ionising Radiation” में उद्धृत किया गया है।

यह उपलब्धि न केवल NIT जालंधर बल्कि भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

रेडिएशन रिसर्च और पर्यावरण सुरक्षा में अग्रणी केंद्र

NIT जालंधर की यह प्रयोगशाला देश के प्रमुख रेडिएशन फिजिक्स और पर्यावरण सुरक्षा अनुसंधान केंद्रों में गिनी जाती है।

लैब में रेडिएशन मॉनिटरिंग, हेवी मेटल एनालिसिस, गामा स्पेक्ट्रोमेट्री और पर्यावरणीय सैंपल परीक्षण के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध हैं।

भूजल में यूरेनियम और भारी धातुओं पर भी रिसर्च

यह प्रयोगशाला रेडिएशन रिसर्च के अलावा भूजल में यूरेनियम और भारी धातु प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है।

रिसर्च टीम ने प्राकृतिक पॉलिमर आधारित पर्यावरण अनुकूल और कम लागत वाली तकनीक विकसित की है, जिसका उद्देश्य दूषित पानी को शुद्ध कर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

विशेष रूप से ग्रामीण और संसाधन सीमित क्षेत्रों के लिए यह तकनीक काफी उपयोगी मानी जा रही है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग

लैब ने कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग भी स्थापित किया है।

इनमें भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB), इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर और नेशनल इंस्टीट्यूट्स फॉर क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी शामिल हैं।

इन साझेदारियों से लैब की वैश्विक शोध उपस्थिति और मजबूत हुई है।

UNSCEAR रिपोर्ट में रिसर्च शामिल होना क्यों महत्वपूर्ण?

UNSCEAR संयुक्त राष्ट्र की एक वैज्ञानिक संस्था है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रेडिएशन के प्रभावों का मूल्यांकन करती है।

इसकी रिपोर्टों का उपयोग दुनियाभर में सरकारें, वैज्ञानिक और नीति निर्माता रेडिएशन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए संदर्भ सामग्री के रूप में करते हैं।

ऐसे में NIT जालंधर के शोध कार्यों का इस रिपोर्ट में शामिल होना एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

थोरॉन रेडिएशन पर शोध को मिली खास पहचान

UNSCEAR रिपोर्ट में शामिल प्रमुख शोध निष्कर्षों में यह भी सामने आया कि सर्दियों के मौसम में कम वेंटिलेशन के कारण घरों के अंदर थोरॉन रेडिएशन का स्तर बढ़ सकता है।

यह अध्ययन इनडोर रेडिएशन एक्सपोजर को समझने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल पर विशेष फोकस

प्रो. रोहित मेहरा और उनकी टीम ने पर्यावरणीय रेडिएशन मॉनिटरिंग, रेडॉन-थोरॉन अध्ययन, सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षित पेयजल से जुड़े विषयों पर व्यापक शोध किया है।

टीम ने भारत के विभिन्न हिस्सों में फील्ड आधारित वैज्ञानिक अध्ययन भी किए हैं, जिनसे रेडिएशन एक्सपोजर और उसके मानव स्वास्थ्य पर प्रभावों को समझने में मदद मिली है।


Key Highlights:

  • NIT जालंधर की 5 रिसर्च UNSCEAR 2024 रिपोर्ट में शामिल
  • प्रो. रोहित मेहरा के नेतृत्व में मिली बड़ी उपलब्धि
  • रेडिएशन और पर्यावरण सुरक्षा रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय पहचान
  • भूजल में यूरेनियम और भारी धातु प्रदूषण पर भी शोध
  • सर्दियों में थोरॉन रेडिएशन बढ़ने पर महत्वपूर्ण अध्ययन
  • BARC और AERB समेत कई संस्थानों के साथ सहयोग

FAQ Section:

Q1. NIT जालंधर की कौन-सी लैब को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है?

रेडिएशन मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट लैब को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

Q2. कितने शोध पत्र UNSCEAR 2024 रिपोर्ट में शामिल हुए हैं?

लैब के पांच शोध पत्र रिपोर्ट में उद्धृत किए गए हैं।

Q3. UNSCEAR क्या है?

UNSCEAR संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक समिति है, जो रेडिएशन के प्रभावों का अध्ययन करती है।

Q4. लैब किन विषयों पर रिसर्च कर रही है?

रेडिएशन मॉनिटरिंग, पर्यावरण सुरक्षा, भूजल प्रदूषण और सुरक्षित पेयजल पर रिसर्च की जा रही है।

Q5. शोध का एक प्रमुख निष्कर्ष क्या रहा?

सर्दियों में कम वेंटिलेशन के कारण घरों के अंदर थोरॉन रेडिएशन स्तर बढ़ने का निष्कर्ष सामने आया।


Conclusion:

NIT जालंधर की रेडिएशन मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट लैब की यह उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। UNSCEAR जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में शोध कार्य शामिल होना न केवल संस्थान की विश्वसनीयता बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति को भी दर्शाता है।Screenshot_1529

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

48 डिग्री की आग में क्यों तप रहा है यूपी का बांदा? जानिए भीषण गर्मी के पीछे की बड़ी वजहें

Advertisement

नवीनतम

Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software