संभल की शाही जामा मस्जिद की मरम्मत पर नया विवाद, ASI से मांगी गई अनुमति का हिंदू पक्ष ने किया विरोध

शाही जामा मस्जिद की टूटी दीवार और जर्जर मुख्य गेट की मरम्मत की मांग, हिंदू पक्ष बोला- सबूत मिटाने की कोशिश

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उत्तर प्रदेश के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति ने ASI से क्षतिग्रस्त दीवार और मुख्य गेट की मरम्मत की अनुमति मांगी है। हालांकि हिंदू पक्ष ने इसका विरोध करते हुए इसे मंदिर से जुड़े कथित साक्ष्यों को मिटाने की साजिश बताया है।

शाही जामा मस्जिद की मरम्मत को लेकर बढ़ा विवाद

उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित ASI संरक्षित शाही जामा मस्जिद एक बार फिर विवादों में आ गई है। मस्जिद की प्रबंधन समिति ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से मस्जिद की क्षतिग्रस्त सीमा दीवार और जर्जर मुख्य गेट की तत्काल मरम्मत की अनुमति मांगी है।

हालांकि इस मांग का हिंदू पक्ष ने कड़ा विरोध किया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष मौजूद हैं और मरम्मत कार्य के जरिए महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

बंदरों के कारण टूटी दीवार, हादसे का खतरा

मस्जिद समिति के अध्यक्ष जफर अली ने ASI के मेरठ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद को पत्र लिखकर बताया कि 11 फरवरी को बंदरों के कारण मुख्य गेट के पास पुलिस चौकी के समीप दीवार का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।

पत्र में कहा गया कि दीवार का बाकी हिस्सा भी कभी गिर सकता है, जिससे वहां मौजूद नमाजियों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को खतरा है।

समिति ने यह भी बताया कि मुख्य गेट की हालत काफी खराब हो चुकी है और वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए यह रोजाना खतरा बनता जा रहा है।


हिंदू पक्ष ने मरम्मत पर जताई आपत्ति

मामले में हिंदू पक्ष के प्रमुख याचिकाकर्ता और अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने मरम्मत की अनुमति का विरोध करते हुए कहा कि यह मंदिर से जुड़े कथित हिंदू प्रतीकों और पुरातात्विक साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास है।

उन्होंने दावा किया कि मुख्य गेट में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्य मौजूद हैं, जो मरम्मत के दौरान नष्ट हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अनुमति रोकने के लिए संबंधित अदालतों का रुख किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

ASI के वकील विष्णु शर्मा ने कहा कि शाही जामा मस्जिद का कानूनी मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में किसी भी प्रकार की संरचनात्मक मरम्मत या बदलाव अदालत के निर्देशों के अनुसार ही किया जा सकता है।

इससे पहले मस्जिद समिति ने रमजान से पहले सफेदी कराने की अनुमति के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अदालत ने ASI निरीक्षण की शर्त पर अनुमति दी थी।


ASI रिपोर्ट में सामने आई थीं कई बातें

ASI द्वारा हाई कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में मस्जिद को संरचनात्मक रूप से सुरक्षित बताया गया था। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि वर्षों के दौरान मस्जिद की मूल फर्श को टाइल्स से बदल दिया गया और अंदरूनी हिस्सों पर रंगीन पेंट की मोटी परत चढ़ा दी गई, जिससे मूल संरचना ढक गई।

1927 के समझौते का भी है मामला

विवाद को और जटिल बनाता है वर्ष 1927 का वह समझौता, जिसमें मस्जिद प्रशासन और तत्कालीन स्टेट ऑफ इंडिया काउंसिल के सचिव के बीच यह तय हुआ था कि जिला मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति के बिना कोई भी मरम्मत या बदलाव नहीं किया जाएगा।

ASI और उत्तर प्रदेश सरकार इसी समझौते का हवाला देते हुए मस्जिद समिति द्वारा स्वतंत्र रूप से मरम्मत कार्य कराने का विरोध करती रही हैं।


ऐतिहासिक महत्व रखती है शाही जामा मस्जिद

शाही जामा मस्जिद मुगल बादशाह बाबर के शासनकाल में 1526 से 1530 के बीच बनी तीन प्रमुख मस्जिदों में से एक मानी जाती है। इसे 1920 में ASI द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था।

यह स्मारक Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act (AMASR Act) के तहत संरक्षित है। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला मामले में दिए गए फैसले के बाद यह कानून फिर चर्चा में आया था।


Key Highlights:

  • संभल की शाही जामा मस्जिद की मरम्मत को लेकर नया विवाद।
  • मस्जिद समिति ने ASI से दीवार और मुख्य गेट की मरम्मत की अनुमति मांगी।
  • हिंदू पक्ष ने इसे कथित मंदिर साक्ष्य मिटाने की कोशिश बताया।
  • मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित।
  • 1927 के समझौते और ASI नियमों का भी विवाद में अहम रोल।

FAQ Section:

Q1. शाही जामा मस्जिद कहां स्थित है?

शाही जामा मस्जिद उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित है।

Q2. मस्जिद समिति ने ASI से क्या मांग की है?

समिति ने क्षतिग्रस्त दीवार और जर्जर मुख्य गेट की मरम्मत की अनुमति मांगी है।

Q3. हिंदू पक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?

हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष हैं और मरम्मत से कथित साक्ष्य मिट सकते हैं।

Q4. क्या यह मामला कोर्ट में लंबित है?

हाँ, शाही जामा मस्जिद से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।


Conclusion:

संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर मस्जिद समिति सुरक्षा कारणों से मरम्मत की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर हिंदू पक्ष इसे ऐतिहासिक साक्ष्य मिटाने की कोशिश बता रहा है। अब इस पूरे मामले में ASI और अदालतों के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।Screenshot_1537

Edited By: Karan Singh

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