हरियाणा में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, NCRB रिपोर्ट पर लिया स्वतः संज्ञान

NCRB की ‘क्राइम इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अपराधों में 17.9% वृद्धि, हरियाणा में सबसे अधिक अपराध दर दर्ज

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हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने NCRB की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर आयोग की चिंता

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राज्य में बच्चों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराधों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की “क्राइम इन इंडिया-2024” रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए व्यापक कार्रवाई शुरू की है।

आयोग ने इस मामले में प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

NCRB रिपोर्ट में सामने आए चिंताजनक आंकड़े

आयोग की पूर्ण पीठ, जिसमें चेयरपर्सन न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया शामिल थे, ने अपने आदेश में कहा कि NCRB रिपोर्ट हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराधों की बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करती है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ कुल 7,547 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 की तुलना में लगभग 17.9 प्रतिशत अधिक हैं।

आयोग ने कहा कि हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध दर 82.8 प्रति लाख बाल आबादी तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक बताई जा रही है।

कौन-कौन से अपराध शामिल?

रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ कई गंभीर अपराधों का उल्लेख किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • हत्या
  • दुष्कर्म
  • यौन उत्पीड़न
  • गंभीर यौन हमला
  • अपहरण
  • मानव तस्करी
  • बाल विवाह
  • भ्रूण हत्या
  • बच्चों को छोड़ना
  • यौन उत्पीड़न
  • पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध

आयोग ने कहा कि खासकर बालिकाओं से जुड़े पॉक्सो मामलों ने बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक विकास पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

लापता बच्चों और अपहरण मामलों पर भी चिंता

मानवाधिकार आयोग ने कहा कि लापता बच्चों और अपहरण के बढ़ते मामलों से मानव तस्करी और बच्चों के शोषण की आशंका बढ़ती है।

आयोग ने माना कि यह स्थिति राज्य की बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

“सुरक्षा तंत्र अपेक्षित परिणाम देने में विफल”

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा प्रावधानों के बावजूद बच्चों के खिलाफ हिंसा, शोषण, उपेक्षा और दुर्व्यवहार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

आयोग ने पहले भी स्कूलों में शारीरिक दंड, बाल उत्पीड़न और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया था, लेकिन अपराधों में लगातार वृद्धि यह दर्शाती है कि रोकथाम, निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्थाएं प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं।

पॉक्सो और जेजे एक्ट का किया उल्लेख

आयोग ने कहा कि बच्चों को संविधान और विभिन्न कल्याणकारी कानूनों के तहत विशेष सुरक्षा प्राप्त है।

आयोग ने विशेष रूप से:

  • Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012
  • Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015

का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराध, शोषण और हिंसा से सुरक्षा प्रदान करना है।

स्कूलों और संस्थानों की भूमिका पर उठे सवाल

आयोग ने कहा कि स्कूल, छात्रावास, बाल संरक्षण गृह और अन्य संस्थाएं बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण की जिम्मेदार हैं।

हालांकि NCRB आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि निगरानी व्यवस्था, काउंसलिंग सिस्टम, शिकायत निवारण तंत्र और बाल सुरक्षा ढांचे में गंभीर कमियां मौजूद हैं।

सरकार से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह, जेल, अपराध जांच और प्रशासनिक न्याय विभाग) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

इस रिपोर्ट में निम्न बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है:

  • अपराध रोकने के लिए पुलिस उपाय
  • जांच प्रणाली
  • निगरानी तंत्र
  • स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट की कार्यप्रणाली
  • पॉक्सो एक्ट और जेजे एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन

Key Highlights:

  • हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने NCRB रिपोर्ट पर लिया स्वतः संज्ञान
  • 2024 में बच्चों के खिलाफ 7,547 मामले दर्ज
  • हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध दर देश में सबसे अधिक
  • पॉक्सो, अपहरण और तस्करी मामलों पर जताई चिंता
  • सरकार और पुलिस विभाग से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
  • बाल सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

FAQ Section:

Q1. हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने किस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया?

आयोग ने NCRB की “क्राइम इन इंडिया-2024” रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।

Q2. 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ कितने मामले दर्ज हुए?

रिपोर्ट के अनुसार 2024 में कुल 7,547 मामले दर्ज किए गए।

Q3. आयोग ने किन अपराधों पर चिंता जताई?

हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो अपराध, अपहरण, तस्करी, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न जैसे मामलों पर चिंता जताई गई।

Q4. आयोग ने किससे रिपोर्ट मांगी है?

हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

Q5. आयोग ने किन कानूनों का उल्लेख किया?

POCSO Act 2012 और Juvenile Justice Act 2015 का उल्लेख किया गया है।


Conclusion:

हरियाणा में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मानवाधिकार आयोग की सख्ती यह संकेत देती है कि अब बाल सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता और जवाबदेही पर गंभीर समीक्षा की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और संस्थागत सुधार भी बेहद जरूरी हैं।Screenshot_1514

Edited By: Karan Singh

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