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हिमाचल वाहनों पर पंजाब में एंट्री टैक्स लगाने की मांग तेज, संघर्ष मोर्चा ने सरकार को भेजा ड्राफ्ट
हिमाचल के टोल बैरियरों के विरोध में पंजाब सरकार से ‘रिसिप्रोकल टैक्स’ लागू करने की मांग, निजी गाड़ियों से लेकर HRTC बसों तक पर शुल्क प्रस्तावित
हिमाचल प्रदेश द्वारा लगाए गए एंट्री टोल के विरोध में संघर्ष मोर्चा ने पंजाब सरकार को विस्तृत ड्राफ्ट पॉलिसी सौंपी है। प्रस्ताव में हिमाचल नंबर वाहनों पर पंजाब में एंट्री टैक्स लगाने और टोल व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की मांग की गई है।
हिमाचल के एंट्री टोल के खिलाफ पंजाब में नई मांग
हिमाचल प्रदेश द्वारा लगाए गए एंट्री टोल बैरियरों का विरोध कर रहे संघर्ष मोर्चा ने पंजाब सरकार को एक विस्तृत ड्राफ्ट पॉलिसी सौंपकर हिमाचल नंबर वाहनों पर पंजाब में ‘रिसिप्रोकल एंट्री टैक्स’ लगाने की मांग की है।
प्रस्ताव के तहत निजी वाहनों से लेकर सरकारी काफिलों, HRTC बसों और भारी व्यावसायिक वाहनों तक पर अलग-अलग शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है।
निजी कारों पर 700 रुपये तक टैक्स का प्रस्ताव
संघर्ष मोर्चा की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव में हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत वाहनों पर निम्नलिखित एंट्री टैक्स लगाने की सिफारिश की गई है:- निजी कारों पर प्रति एंट्री ₹700 तक
- हिमाचल सरकार के आधिकारिक वाहनों और एस्कॉर्ट काफिलों पर ₹5,000 तक
- HRTC बसों पर ₹3,000 तक
- भारी मालवाहक वाहनों पर ₹2,700 तक
मोर्चा नेताओं का कहना है कि यह प्रस्ताव पंजाब के लोगों को पिछले 23 वर्षों से झेलनी पड़ रही आर्थिक क्षति की भरपाई के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
पंजाब मोटर व्हीकल टोल एक्ट में संशोधन की मांग
ड्राफ्ट में पंजाब मोटर ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स (टोल) एक्ट, 1992 में संशोधन का भी सुझाव दिया गया है।
इसके तहत टोल वसूली का दायरा केवल सीमित व्यावसायिक वाहनों से बढ़ाकर अन्य मैकेनिकल वाहनों तक विस्तारित करने की मांग की गई है।
पंजाब सरकार से हुई बैठक के बाद तैयार हुआ ड्राफ्ट
संघर्ष मोर्चा के कानूनी सलाहकार उत्कर्ष मोंगा ने बताया कि यह ड्राफ्ट विभिन्न संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद तैयार किया गया।
उन्होंने कहा कि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ हुई बैठक के बाद यह पहल आगे बढ़ाई गई।
मोर्चा का दावा है कि मंत्रियों ने हिमाचल वाहनों पर रिसिप्रोकल टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।
“एकतरफा टोल वसूली अब बर्दाश्त नहीं”
मोर्चा नेताओं ने कहा कि पंजाब के निवासी, ट्रांसपोर्टर और यात्री लंबे समय से हिमाचल के एंट्री बैरियरों पर आर्थिक बोझ झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यह स्पष्ट संदेश देना है कि पंजाब अब एकतरफा टोल वसूली को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।
ड्राफ्ट में डिजिटल भुगतान और पेनल्टी का भी प्रावधान
एडवोकेट उत्तांश मोंगा द्वारा तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में:
- डिजिटल भुगतान व्यवस्था
- वार्षिक और त्रैमासिक पास
- टोल बैरियर लीज व्यवस्था
- नियम उल्लंघन पर जुर्माना
- बकाया वसूली
जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
सरकारी काफिले भी आ सकते हैं दायरे में
प्रस्ताव के अनुसार हिमाचल प्रदेश के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों से जुड़े सरकारी वाहनों को भी इस संभावित टोल व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार स्तर पर लिया जाएगा।
Key Highlights:
- संघर्ष मोर्चा ने पंजाब सरकार को सौंपी ड्राफ्ट पॉलिसी
- हिमाचल नंबर वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने की मांग
- निजी कारों पर ₹700 तक टैक्स का प्रस्ताव
- HRTC बसों और सरकारी काफिलों पर भी शुल्क सुझाव
- पंजाब मोटर व्हीकल टोल एक्ट में संशोधन की मांग
- डिजिटल भुगतान और पेनल्टी प्रावधान भी शामिल
FAQ Section:
Q1. संघर्ष मोर्चा ने क्या मांग की है?
हिमाचल प्रदेश के वाहनों पर पंजाब में रिसिप्रोकल एंट्री टैक्स लगाने की मांग की गई है।
Q2. निजी वाहनों पर कितना टैक्स प्रस्तावित है?
हिमाचल में पंजीकृत निजी कारों पर ₹700 तक प्रति एंट्री टैक्स प्रस्तावित है।
Q3. यह प्रस्ताव क्यों लाया गया?
मोर्चा का कहना है कि पंजाब के लोग वर्षों से हिमाचल के एंट्री टोल का आर्थिक बोझ झेल रहे हैं।
Q4. किन वाहनों को प्रस्तावित टैक्स दायरे में रखा गया है?
निजी वाहन, सरकारी काफिले, HRTC बसें और भारी व्यावसायिक वाहन शामिल हैं।
Q5. क्या कानून में बदलाव की भी मांग की गई है?
हाँ, पंजाब मोटर ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स (टोल) एक्ट, 1992 में संशोधन का सुझाव दिया गया है।
Conclusion:
हिमाचल प्रदेश के एंट्री टोल के खिलाफ पंजाब में उठी यह मांग अब राजनीतिक और कानूनी रूप लेती दिखाई दे रही है। संघर्ष मोर्चा द्वारा तैयार ड्राफ्ट पॉलिसी ने दोनों राज्यों के बीच टोल व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब नजर पंजाब सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

