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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी: हरियाणा महिला आयोग अध्यक्ष रेणु भाटिया
POSH Act कार्यशाला में बोलीं—झूठे आरोप लगाने वाली महिलाओं पर भी हो कार्रवाई, आयोग ने 10 मामलों में उठाए कदम
हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि झूठे आरोप साबित होने पर संबंधित महिलाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
कुरुक्षेत्र में POSH Act पर आयोजित हुई विशेष कार्यशाला
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH Act) से संबंधित एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं।
निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पर दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेणु भाटिया ने कहा कि प्रत्येक कार्यालय में गठित आंतरिक शिकायत समिति (Internal Committee) को यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी झूठे आरोपों के मामलों में भी उचित कार्रवाई करना है।झूठे आरोपों के 10 मामलों में कार्रवाई
महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया कि जांच के दौरान निराधार पाए गए मामलों में आयोग ने अब तक 10 महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत की गंभीरता से जांच होना जरूरी है ताकि न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे।
कार्यालयों में शिकायत समिति की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश
रेणु भाटिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष और सदस्यों की सूची तथा उनके संपर्क विवरण आसानी से उपलब्ध होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि यह जानकारी कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं होगी तो पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं मिल पाएगी।
POSH Act, POCSO और बाल विवाह पर नियमित बैठकें जरूरी
महिला आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने बैठकें आयोजित कर निम्न विषयों पर चर्चा की जाए:
- POSH Act (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून)
- POCSO Act
- बाल विवाह निषेध
- श्रम कानून
- महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे
उन्होंने चेतावनी दी कि आयोग के निर्देशों का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
NRI विवाह मामलों पर भी जताई चिंता
रेणु भाटिया ने NRI विवाहों से जुड़े बढ़ते विवादों और महिलाओं को छोड़कर विदेश चले जाने वाले मामलों पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में ऐसे 41 मामले आयोग में सुनवाई के लिए लंबित हैं।
13 NRI पतियों को विदेश से वापस लाने में मिली सफलता
महिला आयोग अध्यक्ष के अनुसार, आयोग अब तक 13 ऐसे पुरुषों को विदेश से वापस लाने में सफल रहा है, जिन्होंने शादी के बाद अपनी पत्नियों को छोड़ दिया था और विदेश जाकर उनकी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया था।
उन्होंने कहा कि आयोग ऐसी महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
Key Highlights:
- कुरुक्षेत्र में POSH Act पर विशेष कार्यशाला आयोजित
- रेणु भाटिया ने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पर दिया जोर
- झूठे आरोप साबित होने पर कार्रवाई की वकालत
- 10 महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई का दावा
- कार्यालयों में शिकायत समिति की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश
- POSH, POCSO और बाल विवाह पर मासिक बैठकों की सलाह
- NRI विवाह विवादों के 41 मामले आयोग के समक्ष लंबित
- 13 NRI पतियों को विदेश से वापस लाने का दावा
FAQ Section:
Q1. रेणु भाटिया ने किस मुद्दे पर बयान दिया?
उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों की निष्पक्ष जांच और POSH Act के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
Q2. आयोग ने कितने झूठे मामलों में कार्रवाई की है?
महिला आयोग के अनुसार, 10 मामलों में आरोप निराधार पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।
Q3. अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए?
कार्यालयों में शिकायत समिति की जानकारी उपलब्ध कराने और नियमित जागरूकता बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
Q4. NRI विवाह मामलों की स्थिति क्या है?
वर्तमान में 41 मामले आयोग के समक्ष लंबित हैं और 13 मामलों में विदेश गए पतियों को वापस लाने में सफलता मिली है।
Conclusion:
कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यशाला के दौरान रेणु भाटिया ने स्पष्ट संदेश दिया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी संस्थानों की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिले और झूठे मामलों को भी उचित तरीके से निपटाया जा सके। महिला सुरक्षा, POSH कानून और NRI विवाह विवादों जैसे मुद्दों पर आयोग की सक्रियता आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है।

