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पंजाब-हरियाणा में बढ़ते कैंसर मामलों पर केंद्रीय मंत्री की चिंता: रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को बताया बड़ा कारण
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने ‘कैंसर ट्रेन’ का किया उल्लेख, किसानों से प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने की अपील
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने पंजाब और हरियाणा में बढ़ते कैंसर मामलों पर चिंता जताते हुए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती और मिट्टी की नियमित जांच को अपनाने का आह्वान किया।
रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग पर केंद्रीय मंत्री की चेतावनी
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब और हरियाणा में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक और असंतुलित उपयोग एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने और रसायनों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी।
‘कैंसर ट्रेन’ का उल्लेख कर जताई चिंता
करनाल के कच्छवा गांव में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में मंत्री ने पंजाब की चर्चित ‘कैंसर ट्रेन’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कृषि समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि खेती में अत्यधिक रासायनिक इनपुट का असर केवल मिट्टी और जल संसाधनों पर ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान
रामनाथ ठाकुर ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग लगातार बढ़ा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।उन्होंने किसानों से अपील की कि वे:
- रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।
- गोबर आधारित जैविक खाद को बढ़ावा दें।
- प्राकृतिक और टिकाऊ खेती की पद्धतियां अपनाएं।
- मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दें।
मंत्री ने कहा कि किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों को मिलकर रसायनों के उपयोग को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।
मिट्टी की नियमित जांच को बताया जरूरी
रामनाथ ठाकुर ने मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जिस तरह मनुष्य के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी होती है, उसी प्रकार खेतों के लिए मिट्टी की जांच भी आवश्यक है।
उन्होंने किसानों से नियमित रूप से मिट्टी के नमूने जांच के लिए भेजने और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया।
हरियाणा में पहलवानों की घटती संख्या पर भी टिप्पणी
मंत्री ने कहा कि हरियाणा कभी अपने पहलवानों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब उनकी संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती और बढ़ते रसायनों के उपयोग के स्वास्थ्य प्रभावों की गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है।
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया जागरूक
कच्छवा गांव के ग्राम सचिवालय में आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंत्री ने किसानों और कृषि अधिकारियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों और प्राकृतिक खेती के लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने प्रगतिशील किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और उनके उत्पादों की जानकारी ली।
देशभर के 100 जिलों में चल रहा अभियान
मंत्री ने बताया कि 1 जून से 30 जून तक देश के 100 जिलों में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करना है।
Key Highlights:
- केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग पर चिंता जताई
- पंजाब की ‘कैंसर ट्रेन’ का उदाहरण देकर किसानों को चेताया
- प्राकृतिक खेती और जैविक खाद अपनाने की अपील
- मिट्टी की नियमित जांच को बताया आवश्यक
- हरियाणा में पहलवानों की घटती संख्या पर भी टिप्पणी
- ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया जागरूक
- 100 जिलों में 30 जून तक चलेगा अभियान
FAQ Section:
Q1. रामनाथ ठाकुर ने कैंसर मामलों को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक और असंतुलित उपयोग कैंसर के बढ़ते मामलों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।
Q2. कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम करनाल जिले के कच्छवा गांव में आयोजित किया गया था।
Q3. किसानों को क्या सलाह दी गई?
प्राकृतिक खेती अपनाने, जैविक खाद का उपयोग बढ़ाने और मिट्टी की नियमित जांच कराने की सलाह दी गई।
Q4. ‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य क्या है?
किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करना।
Conclusion:
करनाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जुड़े संभावित स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी की नियमित जांच अपनाने का आह्वान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में मदद करेंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

