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सुरहा ताल को मिला अंतरराष्ट्रीय दर्जा, उत्तर प्रदेश का 13वां और भारत का 100वां रामसर साइट बना बर्ड सेंचुरी
बलिया स्थित जयप्रकाश नारायण बर्ड सेंचुरी को रामसर साइट का दर्जा मिलने से बढ़ेगी वैश्विक पहचान, इको-टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा नया बल
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले स्थित सुरहा ताल (जयप्रकाश नारायण बर्ड सेंचुरी) को रामसर साइट घोषित किया गया है। यह उत्तर प्रदेश का 13वां और देश का 100वां रामसर स्थल बन गया है, जिससे प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिली है।
सुरहा ताल को मिला वैश्विक सम्मान, भारत का 100वां रामसर साइट बना
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। बलिया जिले में स्थित सुरहा ताल, जिसे आधिकारिक रूप से जयप्रकाश नारायण बर्ड सेंचुरी के नाम से जाना जाता है, को रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का 13वां और भारत का 100वां रामसर स्थल बन गया है।
इस उपलब्धि से न केवल प्रदेश की पर्यावरणीय पहचान मजबूत हुई है, बल्कि इको-टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
क्या है रामसर साइट?
रामसर साइट उन आर्द्रभूमियों (Wetlands) को कहा जाता है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय महत्व के लिए मान्यता दी जाती है। यह मान्यता 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुए रामसर कन्वेंशन के तहत दी जाती है।रामसर साइट का दर्जा मिलने से किसी क्षेत्र के संरक्षण, अनुसंधान और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
सुरहा ताल क्यों है खास?
सुरहा ताल पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां 310 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें लगभग 125 जलपक्षी शामिल हैं।
सर्दियों के मौसम में यहां करीब 2 लाख प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। यह आर्द्रभूमि मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग (Central Asian Flyway) पर स्थित होने के कारण प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव का काम करती है।
प्राकृतिक रूप से विकसित विशाल झील
सुरहा ताल एक प्राकृतिक वर्षा आधारित झील है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 2,549 से 3,432 हेक्टेयर तक फैला हुआ है। मानसून के दौरान इसका विस्तार करीब 42 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है।
यह क्षेत्र बलिया शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है और कई गांवों की भूमि को मिलाकर विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया प्रमाणपत्र
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सुरहा ताल के रामसर साइट घोषित होने का प्रमाणपत्र सौंपा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
1991 में बना था बर्ड सेंचुरी
सुरहा ताल को उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1991 में पक्षी विहार (Bird Sanctuary) घोषित किया था। बलिया जिला मुख्यालय से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र वर्षों से प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का सुरक्षित आवास रहा है।
उत्तर प्रदेश में अब 13 रामसर साइट
सुरहा ताल के शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश में रामसर साइट्स की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
प्रमुख रामसर साइट्स
- अपर गंगा रिवर
- नवाबगंज बर्ड सेंचुरी
- सरसई नावर झील
- समसपुर बर्ड सेंचुरी
- सांडी बर्ड सेंचुरी
- समान बर्ड सेंचुरी
- पार्वती अर्गा बर्ड सेंचुरी
- सूर सरोवर बर्ड सेंचुरी
- हैदरपुर वेटलैंड
- बखीरा बर्ड सेंचुरी
- पटना बर्ड सेंचुरी
- शेखा झील बर्ड सेंचुरी
- जयप्रकाश नारायण (सुरहा ताल) बर्ड सेंचुरी
अधिकारियों ने क्या कहा?
वन विभाग की मुख्य वन संरक्षक अदिति सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश की 13 रामसर साइट्स में से 12 को पिछले सात वर्षों के दौरान यह दर्जा मिला है। यह प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और वेटलैंड प्रबंधन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Key Highlights:
- बलिया का सुरहा ताल बना भारत का 100वां रामसर साइट।
- उत्तर प्रदेश में अब कुल 13 रामसर साइट्स।
- 310 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास।
- सर्दियों में करीब 2 लाख प्रवासी पक्षियों का आगमन।
- इको-टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा।
- विश्व पर्यावरण दिवस पर हुई घोषणा।
FAQ Section:
Q1. सुरहा ताल कहाँ स्थित है?
सुरहा ताल उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित है और इसे जयप्रकाश नारायण बर्ड सेंचुरी के नाम से भी जाना जाता है।
Q2. रामसर साइट क्या होती है?
रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (Wetland) होती है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत मान्यता दी जाती है।
Q3. सुरहा ताल में कितनी पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं?
यहां 310 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें 125 जलपक्षी शामिल हैं।
Q4. उत्तर प्रदेश में अब कितनी रामसर साइट्स हैं?
सुरहा ताल के शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश में कुल 13 रामसर साइट्स हो गई हैं।
Q5. सुरहा ताल का पर्यावरणीय महत्व क्या है?
यह मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव है और लाखों प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराता है।
Conclusion:
सुरहा ताल को रामसर साइट का दर्जा मिलना उत्तर प्रदेश और देश के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल जैव विविधता के संरक्षण को मजबूती देगा, बल्कि इको-टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण जागरूकता को भी नई गति प्रदान करेगा। आने वाले समय में यह स्थल वैश्विक स्तर पर पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

