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सरकारी अस्पतालों की सेवाओं का ऑडिट, प्रक्रियागत कमियां दूर करने के निर्देश
राज्य स्तरीय स्वास्थ्य टीम ने करनाल जिले में किया निरीक्षण, सिविल अस्पताल में मध्यरात्रि औचक जांच
राज्य स्वास्थ्य विभाग की टीम इन दिनों करनाल जिले में डेरा डाले हुए है और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का ऑडिट कर रही है। टीम ने कुछ प्रक्रियागत कमियां पाई हैं और संबंधित अधिकारियों को उन्हें तुरंत दूर करने के निर्देश दिए हैं।
टीम का नेतृत्व डॉ. वीरेंद्र यादव कर रहे हैं। उन्होंने करनाल शहर, इंद्री, निसिंग और घरौंडा में निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने मरीजों से सीधे बातचीत कर जमीनी स्तर पर सेवाओं की समीक्षा की।
तीसरे दिन टीम ने जिला सिविल अस्पताल पर विशेष ध्यान दिया। गुरुवार मध्यरात्रि को औचक निरीक्षण के दौरान डॉ. यादव ने इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, ब्लड बैंक और लैब का दौरा किया तथा मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का आकलन किया।
शुक्रवार को सिविल अस्पताल की लैब के निरीक्षण के दौरान उन्होंने डायग्नोस्टिक टेस्ट की उपलब्धता और कार्यक्षमता पर स्टाफ से सवाल किए। उन्होंने मरीज पंजीकरण प्रणाली में सुधार के निर्देश देते हुए दो अलग-अलग काउंटर स्थापित करने को कहा—एक नए पंजीकरण के लिए और दूसरा फॉलो-अप मरीजों के लिए।
उन्होंने कहा, “पुराने मरीजों को केवल पर्ची अपडेट कराने के लिए लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है, जबकि इसमें कुछ सेकंड ही लगते हैं। अलग खिड़कियां होने से प्रतीक्षा समय कम होगा और मरीजों की आवाजाही सुचारु होगी।”
डॉ. पूनम चौधरी ने करनाल जिले में मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी।
डॉ. यादव ने बताया कि राज्य स्तरीय टीम सभी स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा कर रही है। अब तक जिला सिविल अस्पताल, सभी उपमंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)—विशेषकर 24x7 सुविधाएं—और लगभग 20 प्रतिशत सब-सेंटरों का निरीक्षण किया जा चुका है।
शनिवार को डॉ. मनीष बंसल स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें इस निरीक्षण के निष्कर्षों की समीक्षा की जाएगी।
