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चार नई श्रम संहिताओं के खिलाफ CITU का प्रदर्शन, वापसी की मांग
देशव्यापी आह्वान पर डीसी कार्यालय के बाहर धरना, सरकार पर मजदूर-विरोधी नीतियों का आरोप
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशनों के देशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को Centre of Indian Trade Union (CITU) और अन्य संगठनों से जुड़े हजारों लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन सदस्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और उसकी नीतियों को मजदूर-विरोधी और जन-विरोधी करार दिया। राज्य के जिला और ब्लॉक स्तर पर भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।
CITU के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा देंगी। उन्होंने दावा किया कि इन संहिताओं के लागू होने से करीब 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत श्रमिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
मेहरा ने कहा, “हड़ताल करने वाले मजदूरों के लिए कड़े दंड और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। स्थायी रोजगार के बजाय ठेका और फिक्स्ड-टर्म रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 करना बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति पैदा करेगा।”
मुख्य मांगें:
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आंगनवाड़ी, मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
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ग्रेच्युटी की सुविधा दी जाए।
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मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये तय किया जाए।
यूनियन नेताओं ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इन संहिताओं को वापस लेना आवश्यक है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
