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हिमाचल गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा, सरकार को कठोर फैसले लेने होंगे: विपिन सिंह परमार
अनुशासन, भ्रष्टाचार पर लगाम और सादगी अपनाने की जरूरत पर विधायक ने जताई चिंता
सुल्लाह के विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस समय गहरे वित्तीय संकट से गुजर रहा है और राज्य सरकार को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए साहसिक व निर्णायक कदम उठाने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ठोस कार्रवाई के बिना वित्तीय असंतुलन शासन और विकास को और कमजोर कर सकता है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय अनुशासन बहाल करना है। प्रशासनिक खर्च आय की तुलना में असमान रूप से बढ़ गया है। जब तक गैर-जरूरी खर्चों पर अंकुश नहीं लगाया जाता और संरचनात्मक सुधार लागू नहीं किए जाते, तब तक राज्य के खजाने पर बोझ बढ़ता रहेगा।
उन्होंने विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी गंभीर समस्या बताया। परमार के अनुसार, सार्वजनिक धन की हेराफेरी, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अक्षमता और जवाबदेही की कमी ने जनता का भरोसा कमजोर किया है। पारदर्शी कार्यप्रणाली, सख्त निगरानी तंत्र और दोषी अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई से ही विश्वसनीयता और वित्तीय स्थिरता लौट सकती है।
सादगी और संयम का आह्वान:
परमार ने कहा कि सरकार को सादगी का उदाहरण पेश करना चाहिए। मंत्रियों और मुख्यमंत्री के काफिलों में अनावश्यक भीड़ को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब राज्य वेतन, पेंशन और विकासात्मक दायित्वों को पूरा करने के लिए जूझ रहा हो, तब शक्ति और विशेषाधिकारों का दिखावा गलत संदेश देता है। सादगी की दिशा में उठाए गए प्रतीकात्मक कदम भी जनता का विश्वास बढ़ा सकते हैं।
शासन को प्राथमिकता देने की जरूरत:
उन्होंने जोर देकर कहा,
“सबसे ऊपर शासन को नीति-निर्माण के केंद्र में लाना होगा। विकास परियोजनाएं धीमी पड़ गई हैं, सार्वजनिक सेवाएं दबाव में हैं और प्रशासनिक दक्षता पटरी से उतरी दिखती है।”
