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अंबाला सेंट्रल जेल में शुरू हुआ साक्षरता अभियान, 236 निरक्षर कैदियों को पढ़ाएंगे 17 बंदी शिक्षक
शिक्षा विभाग की अनूठी पहल के तहत ULLAS योजना से जुड़ेंगे कैदी, सितंबर में होगी साक्षरता परीक्षा।
अंबाला शिक्षा विभाग ने सेंट्रल जेल के 236 निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। ULLAS योजना के तहत 17 शिक्षित कैदियों को स्वयंसेवी शिक्षक बनाया गया है, जो नियमित रूप से अन्य बंदियों को पढ़ाएंगे।
अंबाला सेंट्रल जेल में शुरू हुआ विशेष साक्षरता अभियान
हरियाणा के अंबाला में शिक्षा विभाग ने एक अनूठी पहल करते हुए सेंट्रल जेल के निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
विभाग ने जेल में रहने वाले 236 निरक्षर कैदियों की पहचान कर उन्हें ULLAS (Understanding of Lifelong Learning for All in Society) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया है।
17 शिक्षित कैदी बनेंगे स्वयंसेवी शिक्षक
इस अभियान को सफल बनाने के लिए जेल के ही 17 शिक्षित कैदियों को स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में चुना गया है।ये स्वयंसेवी नियमित रूप से निरक्षर कैदियों को पढ़ाएंगे और उन्हें बुनियादी पढ़ना-लिखना तथा गणित सिखाएंगे।
सितंबर में होगी FLNAT परीक्षा
शिक्षा विभाग के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत निरक्षर लोगों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाता है और उन्हें Foundational Literacy and Numeracy Assessment Test (FLNAT) के लिए तैयार किया जाता है।
यह परीक्षा वर्ष में दो बार मार्च और सितंबर में आयोजित की जाती है।
2026 तक पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुधीर कालरा ने बताया कि 15 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं और वयस्कों को बुनियादी साक्षरता एवं अंकज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से अंबाला जिले में वर्ष 2026 के अंत तक पूर्ण साक्षरता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसी अभियान के दौरान शिक्षा विभाग ने सेंट्रल जेल प्रशासन से संपर्क किया, जहां 236 निरक्षर कैदियों की पहचान की गई।
NGO ने उपलब्ध कराई अध्ययन सामग्री
कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की मदद से कैदियों को स्टेशनरी उपलब्ध कराई गई है।
वहीं, शिक्षा विभाग ने स्वयंसेवी शिक्षकों को ULLAS टीचिंग मैनुअल और अभ्यास सामग्री भी उपलब्ध कराई है। विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों को पढ़ाने की विधि और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी दी।
चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया कार्यक्रम
शिक्षा विभाग ने बताया कि इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
पहले चरण में शिक्षित कैदियों को ULLAS पोर्टल पर स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में पंजीकृत किया गया। इसके बाद सभी 236 निरक्षर कैदियों को इन स्वयंसेवकों से जोड़ा गया और नियमित शिक्षण सत्र शुरू कर दिए गए।
अधिकारियों को उम्मीद है कि अधिकांश कैदी सितंबर में होने वाली FLNAT परीक्षा सफलतापूर्वक पास करेंगे, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और सजा पूरी होने के बाद उन्हें नई शुरुआत करने में मदद मिलेगी।
Key Highlights:
- अंबाला सेंट्रल जेल में 236 निरक्षर कैदियों के लिए साक्षरता अभियान शुरू।
- ULLAS योजना के तहत सभी कैदियों का पंजीकरण।
- 17 शिक्षित कैदी स्वयंसेवी शिक्षक बने।
- सितंबर में FLNAT परीक्षा आयोजित होगी।
- NGO की मदद से स्टेशनरी और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई।
- शिक्षा विभाग का लक्ष्य 2026 तक जिले को पूर्ण साक्षर बनाना।
FAQ Section
प्रश्न 1: इस अभियान के तहत कितने कैदियों को शामिल किया गया है?
कुल 236 निरक्षर कैदियों को इस अभियान में शामिल किया गया है।
प्रश्न 2: कैदियों को कौन पढ़ाएगा?
जेल के ही 17 शिक्षित कैदियों को स्वयंसेवी शिक्षक बनाया गया है।
प्रश्न 3: यह अभियान किस योजना के तहत चलाया जा रहा है?
यह अभियान ULLAS (Understanding of Lifelong Learning for All in Society) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत संचालित किया जा रहा है।
प्रश्न 4: साक्षरता परीक्षा कब होगी?
Foundational Literacy and Numeracy Assessment Test (FLNAT) सितंबर में आयोजित होगी।
Conclusion
अंबाला शिक्षा विभाग की यह पहल सुधारात्मक शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह अभियान सफल रहता है तो इससे निरक्षर कैदियों को शिक्षा के साथ आत्मविश्वास मिलेगा और सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने में उन्हें मदद मिल सकती है।


