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गौरैया बचाने के लिए ‘जागो’ संस्था की नई मुहिम, फतेहाबाद में लगाए गए 100 कृत्रिम घोंसले
कंक्रीट के घरों से घटते प्राकृतिक आश्रय के बीच गौरैया संरक्षण अभियान शुरू, जल्द ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगी पहल
पारंपरिक घरों की जगह बढ़ते कंक्रीट निर्माण के कारण गौरैयाओं के प्राकृतिक घोंसले कम होते जा रहे हैं। इसे देखते हुए सामाजिक संस्था ‘जागो’ ने फतेहाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 100 कृत्रिम घोंसले लगाकर गौरैया संरक्षण अभियान शुरू किया है।
कंक्रीट के बढ़ते जंगल और आधुनिक भवनों के कारण गौरैया के लिए सुरक्षित घोंसले ढूंढना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। तेजी से कम होती इस पक्षी की संख्या को लेकर सामाजिक संस्था ‘जागो’ ने संरक्षण अभियान शुरू किया है।
अभियान के पहले चरण में संस्था ने फतेहाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 100 कृत्रिम घोंसले वितरित किए और विभिन्न स्थानों पर स्थापित किए। संस्था ने आने वाले समय में इस अभियान को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने की योजना बनाई है।
कंक्रीट के मकानों से कम हुए प्राकृतिक घोंसले‘जागो’ संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र दहिया ने कहा कि गौरैया की चहचहाहट वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक जीवन का अहसास कराती है। हालांकि, पारंपरिक घरों की जगह आधुनिक कंक्रीट संरचनाओं के बढ़ने से गौरैयाओं के प्राकृतिक घोंसले बनाने के स्थान तेजी से कम हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्थानों की कमी गौरैयाओं के अस्तित्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम घोंसले उपलब्ध कराने की पहल शुरू की गई है।
खेती में भी गौरैया की महत्वपूर्ण भूमिका
देवेंद्र दहिया ने गौरैया के पर्यावरण और कृषि से जुड़े महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गौरैया कई प्रकार के कीड़ों और फसल को नुकसान पहुंचाने वाले छोटे कीटों को खाती है।
इस तरह गौरैया प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण में सहयोग करती है और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में भी उपयोगी भूमिका निभाती है।
हर नए सदस्य को लगाने होंगे चार घोंसले
संस्था ने अभियान के तहत एक विशेष नियम भी बनाया है। इसके अनुसार, ‘जागो’ संस्था से जुड़ने वाले प्रत्येक नए सदस्य को अपने घर में कम से कम चार कृत्रिम घोंसले लगाने होंगे।
संस्था का मानना है कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपने घरों में गौरैयाओं के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराएंगे तो इनके संरक्षण में सामुदायिक स्तर पर बड़ी मदद मिल सकती है।
दाना-पानी की व्यवस्था की भी अपील
अभियान के तहत संस्था के सदस्यों से गौरैयाओं के लिए नियमित रूप से दाना और पानी उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
इसके साथ ही घरों के आंगन और आसपास गौरैया-अनुकूल पौधे लगाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। संस्था ने अनार और बोगनवेलिया जैसे पौधों को लगाने की सलाह दी है, ताकि पक्षियों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सके।
जल्द गांवों तक पहुंचेगा गौरैया संरक्षण अभियान
अभियान के पहले चरण में फतेहाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों को शामिल किया गया है। संस्था ने बताया कि आने वाले समय में इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों तक भी ले जाया जाएगा।
अभियान का उद्देश्य केवल कृत्रिम घोंसले लगाना नहीं, बल्कि लोगों को गौरैया संरक्षण और जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है।
Key Highlights:
- ‘जागो’ संस्था ने गौरैया संरक्षण अभियान शुरू किया।
- पहले चरण में करीब 100 कृत्रिम घोंसले लगाए और वितरित किए गए।
- अभियान फतेहाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में शुरू किया गया।
- जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों तक अभियान का विस्तार किया जाएगा।
- हर नए सदस्य को घर में कम से कम चार कृत्रिम घोंसले लगाने होंगे।
- सदस्यों से गौरैयाओं के लिए नियमित दाना और पानी रखने की अपील।
- अनार और बोगनवेलिया जैसे गौरैया-अनुकूल पौधे लगाने की सलाह।
- संस्था ने गौरैया को प्राकृतिक कीट नियंत्रण और कृषि के लिए उपयोगी बताया।
FAQ Section:
गौरैया संरक्षण अभियान किस संस्था ने शुरू किया है?
सामाजिक संस्था ‘जागो’ ने गौरैयाओं के संरक्षण के लिए यह अभियान शुरू किया है।
पहले चरण में कितने कृत्रिम घोंसले लगाए गए?
अभियान के पहले चरण में फतेहाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 100 कृत्रिम घोंसले वितरित और स्थापित किए गए।
अभियान को आगे कहां बढ़ाया जाएगा?
संस्था ने इस अभियान को जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने की योजना बनाई है।
नए सदस्यों के लिए क्या नियम बनाया गया है?
संस्था से जुड़ने वाले प्रत्येक नए सदस्य को अपने घर में कम से कम चार कृत्रिम घोंसले लगाने होंगे।
गौरैयाओं के लिए लोगों से क्या अपील की गई है?
लोगों से गौरैयाओं के लिए नियमित रूप से दाना और पानी रखने तथा अनार और बोगनवेलिया जैसे पौधे लगाने की अपील की गई है।
Conclusion:
तेजी से बदलते शहरी ढांचे के बीच गौरैयाओं के प्राकृतिक आवास कम होते जा रहे हैं। ऐसे में ‘जागो’ संस्था की कृत्रिम घोंसले लगाने की पहल गौरैया संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास है। फतेहाबाद से शुरू हुआ यह अभियान यदि व्यापक स्तर पर लोगों की भागीदारी हासिल करता है, तो गौरैयाओं के लिए सुरक्षित आश्रय और अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।
