हरियाणा में खाली पड़े स्वीकृत पद खत्म करने के फैसले पर शिक्षकों की नाराजगी, KUTA ने जताई उच्च शिक्षा पर असर की चिंता

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने कहा- चार साल से खाली पदों को समाप्त करने के बजाय जल्द भर्ती करे सरकार

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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (KUTA) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े स्वीकृत पद समाप्त करने के सरकारी फैसले पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि इससे शिक्षकों का कार्यभार बढ़ेगा और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

 

हरियाणा के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े स्वीकृत पदों को समाप्त करने के सरकारी फैसले को लेकर शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (KUTA) की कार्यकारिणी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में समिति ने स्वीकृत पदों को समाप्त करने के फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी पद का लंबे समय तक खाली रहना इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि उस पद की अब जरूरत नहीं है।

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है असर

KUTA की कार्यकारिणी समिति ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षकों की उपलब्धता उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

संगठन के अनुसार, पर्याप्त शिक्षकों की कमी से छात्रों के शैक्षणिक हित प्रभावित हो सकते हैं और शोध गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

समिति ने कहा कि यदि स्वीकृत लेकिन खाली पदों को समाप्त किया गया तो मौजूदा शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा। इससे शिक्षण और अनुसंधान गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।

युवाओं के रोजगार अवसर भी हो सकते हैं कम

बैठक में यह भी कहा गया कि खाली स्वीकृत पदों को समाप्त करने से योग्य और शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो जाएंगे।

KUTA ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति केवल मौजूदा जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि संस्थानों की दीर्घकालिक शैक्षणिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की जाती है।

HFUCTO की प्रमुख मांगों पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन (HFUCTO) की प्रमुख मांगों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के सभी स्वीकृत खाली पदों को तुरंत भरना शामिल है।

इसके अलावा चार साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने के प्रावधान को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।

सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग

शिक्षक संगठनों ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी दोहराई।

बैठक में SFS कर्मचारियों को बजट आधारित कर्मचारियों में परिवर्तित करने, वेतन और पेंशन के लिए 100 प्रतिशत सरकारी अनुदान देने तथा PhD और MPhil योग्यता के लिए अग्रिम वेतन वृद्धि देने की मांगों पर भी चर्चा की गई।

KUTA ने HFUCTO के आंदोलन का किया समर्थन

कार्यकारिणी समिति ने कहा कि शिक्षकों की ये मांगें केवल उनके हितों से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि हरियाणा की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

KUTA ने HFUCTO द्वारा इन मांगों को लेकर किए जा रहे संघर्ष को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

KUTA अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकर ने उठाए सवाल

KUTA के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकर ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्वीकृत खाली पदों को समाप्त करना उच्च शिक्षा के हित में नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी संस्थान में स्वीकृत पद उसके दीर्घकालिक शैक्षणिक और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। ऐसे में केवल लंबे समय तक पद खाली रहने के आधार पर उन्हें समाप्त करना शिक्षकों, विद्यार्थियों और पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था के हितों को प्रभावित कर सकता है।

सरकार से जल्द भर्ती की मांग

डॉ. जितेंद्र खटकर ने सरकार से स्वीकृत पदों को समाप्त करने के बजाय जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

उन्होंने सरकार से शिक्षकों की लंबित मांगों पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की भी अपील की।

Key Highlights:

  • KUTA ने स्वीकृत खाली पद समाप्त करने के फैसले पर गंभीर चिंता जताई।
  • संगठन ने कहा कि लंबे समय तक पद खाली रहना उसकी जरूरत खत्म होने का प्रमाण नहीं है।
  • पद समाप्त होने से मौजूदा शिक्षकों का कार्यभार बढ़ने की आशंका।
  • शिक्षण और शोध गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • योग्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम होने की चिंता जताई गई।
  • सभी स्वीकृत खाली पदों को तुरंत भरने की मांग की गई।
  • चार साल से खाली पद समाप्त करने के प्रावधान को वापस लेने की मांग।
  • शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग।
  • KUTA ने HFUCTO के आंदोलन का समर्थन किया।

FAQ Section:

KUTA ने किस सरकारी फैसले का विरोध किया है?

KUTA ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े स्वीकृत पदों को समाप्त करने के सरकारी फैसले पर चिंता जताई है।

शिक्षकों का कहना है कि पद खत्म करने से क्या असर होगा?

शिक्षक संगठन का कहना है कि इससे मौजूदा शिक्षकों का कार्यभार बढ़ सकता है, पढ़ाई और शोध गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं तथा योग्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

सभी स्वीकृत खाली पदों को भरना, चार साल से खाली पद समाप्त करने के प्रावधान को वापस लेना, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करना और अन्य लंबित मांगों को पूरा करना प्रमुख मांगों में शामिल हैं।

HFUCTO क्या मांग कर रहा है?

HFUCTO विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में खाली स्वीकृत पदों को भरने, शिक्षकों की सेवा संबंधी मांगों को पूरा करने और उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग कर रहा है।

KUTA अध्यक्ष ने सरकार से क्या अपील की?

KUTA अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकर ने सरकार से स्वीकृत पदों को समाप्त करने के बजाय जल्द भर्ती करने और शिक्षकों की लंबित मांगों पर सकारात्मक विचार करने की अपील की।

Conclusion:

हरियाणा में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लंबे समय से खाली पड़े स्वीकृत पदों को समाप्त करने का मुद्दा अब शिक्षक संगठनों के विरोध का कारण बन गया है। KUTA का कहना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पदों को समाप्त करने के बजाय योग्य शिक्षकों की भर्ती की जानी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि बड़ी संख्या में पद समाप्त किए गए तो इसका असर शिक्षकों, छात्रों, शोध कार्यों और भविष्य के रोजगार अवसरों पर पड़ सकता है।Screenshot_1020

Edited By: Atul Sharma

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