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गुरुग्राम में बारिश से जलभराव का स्थायी समाधान तलाश रहा MCG, 4 बड़े हॉटस्पॉट पर बनेंगे वाटर इंजेक्शन वेल
सुभाष चौक, राजीव चौक, मेदांता अंडरपास और शीतला माता रोड के लिए तैयार होगा तकनीकी प्लान, भूमिगत टैंकों की भी योजना
मानसून की तेज बारिश के बाद गुरुग्राम में जलभराव की समस्या को देखते हुए नगर निगम ने चार प्रमुख संवेदनशील स्थानों की पहचान की है। इन जगहों पर वाटर इंजेक्शन वेल और भूमिगत जल भंडारण टैंक लगाने की योजना बनाई जा रही है।
मानसून की बारिश के बाद गुरुग्राम में जलभराव और ट्रैफिक अव्यवस्था की समस्या ने एक बार फिर शहर के ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने चार प्रमुख जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
MCG ने सुभाष चौक, राजीव चौक, मेदांता अंडरपास और शीतला माता रोड को प्रमुख समस्या वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है। इन स्थानों पर बारिश के पानी को तेजी से जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए वाटर इंजेक्शन वेल लगाने की योजना बनाई जा रही है।
चार प्रमुख स्थानों के लिए तकनीकी प्लान तैयार होगाMCG कमिश्नर प्रदीप दहिया ने MCG और गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के वरिष्ठ अधिकारियों तथा नगर निगम पार्षदों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सोमवार की बारिश के दौरान जलभराव से प्रभावित चार प्रमुख हिस्सों के लिए तकनीकी योजना को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई।
अधिकारियों का लक्ष्य केवल बारिश के दौरान पानी निकालना नहीं, बल्कि भविष्य में तेज बारिश के समय जलभराव की स्थिति को नियंत्रित करना है।
क्या हैं वाटर इंजेक्शन वेल?
वाटर इंजेक्शन वेल गहरे बोर वाली संरचनाएं होती हैं, जिनके जरिए बारिश के पानी को सतह पर जमा रहने देने के बजाय सीधे भूमिगत जलभृतों तक पहुंचाया जाता है।
सामान्य ड्रेनेज सिस्टम बारिश के पानी को नालियों और पाइपों के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है। इसके विपरीत इंजेक्शन वेल पानी को नीचे जमीन में पहुंचाने का काम करते हैं। इससे एक तरफ सड़कों पर पानी जमा होने की समस्या कम हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ भूजल रिचार्ज में भी मदद मिलती है।
48 से 80 लीटर प्रति सेकंड होगी क्षमता
MCG की योजना के मुताबिक, चारों चिन्हित स्थानों पर 48 से 80 लीटर प्रति सेकंड की क्षमता वाले वाटर इंजेक्शन वेल लगाए जा सकते हैं।
इनके साथ भूमिगत जल भंडारण टैंक भी बनाए जाने की योजना है। बारिश के दौरान जब पानी की मात्रा अचानक बढ़ेगी, तो अतिरिक्त पानी को इन टैंकों में जमा किया जा सकेगा। इसके बाद पानी को धीरे-धीरे जमीन में पहुंचाने या अवशोषित करने की व्यवस्था की जाएगी।
तीन गुना बारिश का दबाव संभालने की तैयारी
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित सिस्टम को वास्तविक बारिश की घटना के मुकाबले करीब तीन गुना पानी संभालने की क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश के दौरान शहर के मौजूदा स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज सिस्टम पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। गुरुग्राम में कम अवधि की तेज बारिश के दौरान कई बार जलनिकासी व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ चुका है।
Key Highlights:
- MCG ने गुरुग्राम में जलभराव वाले 4 प्रमुख स्थान चिन्हित किए।
- सुभाष चौक, राजीव चौक, मेदांता अंडरपास और शीतला माता रोड शामिल।
- इन स्थानों पर वाटर इंजेक्शन वेल लगाने की योजना है।
- प्रस्तावित वेल की क्षमता 48 से 80 लीटर प्रति सेकंड होगी।
- अतिरिक्त पानी के लिए भूमिगत स्टोरेज टैंक भी बनाए जा सकते हैं।
- सिस्टम को वास्तविक बारिश की मात्रा से तीन गुना पानी संभालने के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है।
- MCG और GMDA अधिकारियों ने तकनीकी योजना पर समीक्षा बैठक की।
FAQ Section:
गुरुग्राम में किन जगहों पर वाटर इंजेक्शन वेल लगाने की योजना है?
MCG ने सुभाष चौक, राजीव चौक, मेदांता अंडरपास और शीतला माता रोड को प्रमुख जलभराव वाले स्थानों के रूप में चिन्हित किया है।
वाटर इंजेक्शन वेल कैसे काम करते हैं?
ये गहरे बोर वाली संरचनाएं होती हैं, जो बारिश के पानी को सतह से सीधे भूमिगत जलभृतों तक पहुंचाने में मदद करती हैं। इससे सड़क पर जलभराव कम करने और भूजल रिचार्ज में सहायता मिल सकती है।
वाटर इंजेक्शन वेल की प्रस्तावित क्षमता कितनी है?
MCG के प्रस्ताव के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर इनकी क्षमता 48 से 80 लीटर प्रति सेकंड तक हो सकती है।
भूमिगत टैंकों की जरूरत क्यों होगी?
बारिश के दौरान अचानक बढ़ने वाले अतिरिक्त पानी को कुछ समय के लिए भूमिगत टैंकों में जमा किया जा सकेगा। इसके बाद उसे धीरे-धीरे जमीन में पहुंचाने या अवशोषित करने की व्यवस्था की जाएगी।
नई व्यवस्था कितनी बारिश संभालने के लिए तैयार की जा रही है?
अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम को वास्तविक बारिश की घटना के मुकाबले लगभग तीन गुना पानी संभालने की क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।
Conclusion:
गुरुग्राम में मानसून के दौरान बार-बार होने वाले जलभराव से निपटने के लिए MCG अब पारंपरिक ड्रेनेज व्यवस्था के साथ नए समाधान पर जोर दे रहा है। चार प्रमुख जलभराव वाले स्थानों पर वाटर इंजेक्शन वेल और भूमिगत स्टोरेज टैंक की योजना यदि प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो तेज और कम अवधि की बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
