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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ‘Building a Self-Reliant India’ पुस्तक का विमोचन, स्वदेशी सोच से आत्मनिर्भर भारत पर मंथन
कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने किया पुस्तक का विमोचन, स्वदेशी दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास जैसे विषयों को किया गया शामिल
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने ‘Building a Self-Reliant India: A Swadeshi Perspective’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में स्वदेशी विचार और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर शोध आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पुस्तक का विमोचन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने मंगलवार को ‘Building a Self-Reliant India: A Swadeshi Perspective’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा को स्वदेशी विचार, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास के दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करती है।
पुस्तक में देश की आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विद्वानों के शोध आधारित विचारों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।
स्वदेशी दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा पर फोकस
प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने कहा कि पुस्तक में भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में स्वदेशी दर्शन की भूमिका और इसके ऐतिहासिक व दार्शनिक आधारों को विस्तार से समझाया गया है।पुस्तक में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें यह देखने का प्रयास किया गया है कि भारत अपनी पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ किस तरह जोड़ सकता है।
स्वास्थ्य से लेकर उद्यमिता तक कई विषय शामिल
पुस्तक में आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें स्वास्थ्य और कल्याण, उद्यमिता तथा सतत आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई है।
इसके अलावा सुशासन, नवाचार और रणनीतिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को भी पुस्तक में शामिल किया गया है।
पुस्तक में शामिल प्रमुख विषय
- स्वदेशी विचारधारा की दार्शनिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- भारतीय ज्ञान प्रणालियों का संरक्षण
- भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं और विरासत
- स्वास्थ्य एवं कल्याण
- उद्यमिता और रोजगार की संभावनाएं
- सतत आर्थिक विकास
- सुशासन
- नवाचार
- रणनीतिक आत्मनिर्भरता
शोध आधारित दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर भारत की पड़ताल
पुस्तक विभिन्न विद्वानों के शोध आधारित दृष्टिकोणों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। इसमें स्वदेशी सोच को भारत की सांस्कृतिक पहचान और विकास की दिशा से जोड़ते हुए आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक पहलुओं पर विचार किया गया है।
इस पुस्तक के माध्यम से आत्मनिर्भरता को भारतीय परंपरा, आधुनिक नवाचार और सतत विकास के बीच संतुलन के रूप में समझने का प्रयास किया गया है।
Key Highlights:
- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नई पुस्तक का विमोचन।
- कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने किया पुस्तक का लोकार्पण।
- पुस्तक का नाम ‘Building a Self-Reliant India: A Swadeshi Perspective’ है।
- स्वदेशी दर्शन और भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर विशेष जोर।
- भारतीय ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण पर चर्चा।
- स्वास्थ्य, उद्यमिता और सतत आर्थिक विकास को भी शामिल किया गया।
- सुशासन, नवाचार और रणनीतिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर शोध आधारित विचार प्रस्तुत किए गए।
FAQ Section:
‘Building a Self-Reliant India’ पुस्तक का विमोचन किसने किया?
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने मंगलवार को पुस्तक का विमोचन किया।
पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
पुस्तक भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा को स्वदेशी विचार, सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास के नजरिए से प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में किन प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है?
इसमें स्वदेशी दर्शन, भारतीय ज्ञान प्रणालियां, सांस्कृतिक परंपराएं, स्वास्थ्य, उद्यमिता, सतत आर्थिक विकास, सुशासन, नवाचार और रणनीतिक आत्मनिर्भरता जैसे विषय शामिल हैं।
क्या पुस्तक में शोध आधारित सामग्री है?
हां, पुस्तक में भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विचार से जुड़े विद्वानों के शोध आधारित दृष्टिकोणों को शामिल किया गया है।
Conclusion:
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विमोचित ‘Building a Self-Reliant India: A Swadeshi Perspective’ पुस्तक भारत की आत्मनिर्भरता को स्वदेशी विचार, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के व्यापक संदर्भ में देखने का प्रयास करती है। पुस्तक में आर्थिक विकास के साथ ज्ञान, स्वास्थ्य, सुशासन, नवाचार और रणनीतिक आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया गया है।
