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‘जेंटलमैन कॉप’ विजय रमन की कहानी: चंबल के डकैतों से लेकर चार प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा तक, जानिए पुलिस अफसर की अनोखी विरासत
माजा हाउस में आत्मकथा ‘Did I Really Do All This?’ पर संवाद, पत्नी वीणा रमन ने साझा किए बहादुरी, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा से जुड़े किस्से
‘जेंटलमैन कॉप’ के नाम से मशहूर विजय रमन का पुलिस करियर चंबल के कुख्यात डकैतों के खिलाफ अभियानों से लेकर चार प्रधानमंत्रियों की SPG सुरक्षा तक फैला रहा। उनकी आत्मकथा पर आयोजित सत्र में पत्नी वीणा रमन ने कई अनसुने पहलुओं को साझा किया।
चंबल के डकैतों के खिलाफ अभियान से बनाई पहचान
विजय रमन को ‘जेंटलमैन कॉप’ के नाम से जाना जाता था। भारतीय पुलिस सेवा में उनका करियर देश के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर का गवाह रहा। चंबल के कुख्यात डकैत गिरोहों के खिलाफ अभियानों में उनकी भूमिका बेहद अहम रही।
एक कठिन 14 घंटे लंबे मुठभेड़ अभियान में पान सिंह तोमर समेत कुख्यात डकैतों के खिलाफ कार्रवाई ने उन्हें एक साहसी फील्ड अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई। वहीं, मलकान सिंह और फूलन देवी जैसे डकैतों के आत्मसमर्पण में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया जाता है।
हालांकि, विजय रमन की पहचान केवल कठोर पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं थी। वह अपने मानवीय व्यवहार, नेतृत्व क्षमता और लोगों के प्रति सम्मान के लिए भी जाने जाते थे।आत्मकथा में सामने आया पुलिस अफसर का दूसरा पहलू
विजय रमन की आत्मकथा ‘Did I Really Do All This? — Memoirs of a Gentleman Cop Who Dared To Be Different’ पर माजा हाउस में एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया।
इस दौरान उनकी पत्नी वीणा रमन ने उनके करियर और निजी व्यक्तित्व से जुड़े कई पहलुओं को साझा किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विजय रमन को केवल कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिस अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि लोगों के साथ उनके व्यवहार और सोच के जरिए समझना था।
डकैत हो या साथी अधिकारी, सभी के साथ सम्मान से पेश आते थे
वीणा रमन ने बताया कि विजय रमन बेहद कठिन परिस्थितियों में भी लोगों के सम्मान को महत्व देते थे। उनके अनुसार, चाहे सामने सबसे खतरनाक डकैत हों या उनके साथ काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी, रमन सभी के साथ सम्मान से पेश आते थे।
उन्होंने कहा कि विजय रमन के लिए उनके दरवाजे उन लोगों के लिए हमेशा खुले रहते थे, जो उसी सम्मान और भावना के साथ उनके पास आते थे।
आत्मसमर्पण के बाद मलकान सिंह ने छुए थे पैर
सत्र के दौरान वीणा रमन ने मलकान सिंह से जुड़ा एक खास किस्सा भी सुनाया।
उन्होंने बताया कि मलकान सिंह ने कभी विजय रमन को धमकी दी थी और दोनों लंबे समय तक कानून के दो अलग-अलग पक्षों में खड़े रहे। लेकिन मलकान सिंह के आत्मसमर्पण और कई साल बाद जेल से रिहाई के बाद परिस्थितियां बदल गईं।
वीणा के अनुसार, रिहाई के बाद मलकान सिंह उनसे मिलने घर आए। लिफ्ट से डरने के कारण वह आठ मंजिल सीढ़ियों से चढ़कर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने विजय रमन के पैर छुए और 101 रुपये भेंट किए। उन्होंने बताया कि वह रमन का बेहद सम्मान करते थे।
‘मुठभेड़ प्रमोशन का रास्ता नहीं’
वीणा रमन ने कहा कि विजय रमन समझते थे कि मुठभेड़ पुलिस सेवा में पदोन्नति हासिल करने का रास्ता नहीं है। उन्होंने कई बार पुलिसिंग की कठिन कीमत भी चुकाई, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य अपराधियों के प्रति समाज और व्यवस्था के रवैये में बदलाव लाना था।
उन्होंने कहा कि रमन के लिए सिर्फ अपराधियों को पकड़ना या कार्रवाई करना महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि अपराध और अपराधियों को देखने के नजरिए में बदलाव लाना भी जरूरी था।
पुलिस सेवा के कारण परिवार को कम दे पाए समय
विजय रमन के लंबे और बेहद व्यस्त पुलिस करियर का असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ा। वीणा रमन ने कहा कि पुलिस अधिकारियों द्वारा किए गए अच्छे काम को अक्सर पर्याप्त श्रेय नहीं मिलता और उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि रमन लगभग हर दूसरे दिन किसी न किसी ऑपरेशन या मुठभेड़ के लिए निकल जाते थे। ऐसे में परिवार के लिए उनके पास बहुत कम समय बचता था।
वीणा ने कहा कि उन्होंने भी उन कठिन दिनों को उसी साहस के साथ जिया, जिस साहस के साथ उनके पति अपनी ड्यूटी निभाते थे।
व्यापम घोटाले से भोपाल गैस त्रासदी तक का जिक्र
विजय रमन की आत्मकथा में उनके पुलिस करियर से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्याय शामिल हैं। इसमें जांच अधिकारी के रूप में उनके अनुभवों के साथ व्यापम घोटाले और भोपाल गैस त्रासदी के दौरान उनकी भूमिका और प्रतिक्रिया से जुड़े संदर्भ भी हैं।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Special Protection Group (SPG) में भी रहा, जहां उन्होंने चार अलग-अलग भारतीय प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में सेवा दी।
पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग में भी निभाई भूमिका
सत्र के दौरान विजय रमन के करियर से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रसंग सामने आया। बताया गया कि उन्होंने पाकिस्तान के विरोध के बावजूद भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फेंसिंग कराने में भूमिका निभाई थी।
यह प्रसंग उनके कार्यकाल के उन चुनौतीपूर्ण अभियानों में शामिल था, जिनमें पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों का व्यापक रणनीतिक महत्व था।
Key Highlights:
- विजय रमन को ‘जेंटलमैन कॉप’ के नाम से जाना जाता था।
- चंबल के कुख्यात डकैत गिरोहों के खिलाफ अभियानों में निभाई अहम भूमिका।
- पान सिंह तोमर से जुड़े 14 घंटे लंबे मुठभेड़ अभियान का आत्मकथा में उल्लेख।
- मलकान सिंह और फूलन देवी जैसे डकैतों के आत्मसमर्पण से भी उनका नाम जुड़ा।
- माजा हाउस में उनकी आत्मकथा पर इंटरैक्टिव सत्र आयोजित हुआ।
- पत्नी वीणा रमन ने विजय रमन के व्यक्तित्व और पुलिस सेवा से जुड़े अनुभव साझा किए।
- मलकान सिंह के आत्मसमर्पण के बाद विजय रमन से मिलने आने का किस्सा सुनाया गया।
- व्यापम घोटाले और भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े अनुभवों का आत्मकथा में उल्लेख।
- SPG में रहते हुए चार अलग-अलग प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा की।
- पाकिस्तान के विरोध के बावजूद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फेंसिंग कराने में भूमिका का जिक्र।
FAQ Section:
विजय रमन को ‘जेंटलमैन कॉप’ क्यों कहा जाता था?
विजय रमन को साहसी पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ लोगों के प्रति सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार के लिए ‘जेंटलमैन कॉप’ कहा जाता था।
विजय रमन ने चंबल में क्या भूमिका निभाई?
उन्होंने चंबल के कुख्यात डकैत गिरोहों के खिलाफ कई अभियानों में भूमिका निभाई। पान सिंह तोमर से जुड़े लंबे मुठभेड़ अभियान का भी उनके करियर में उल्लेख मिलता है।
विजय रमन की आत्मकथा का नाम क्या है?
उनकी आत्मकथा का नाम ‘Did I Really Do All This? — Memoirs of a Gentleman Cop Who Dared To Be Different’ है।
मलकान सिंह से जुड़ा कौन सा किस्सा सामने आया?
वीणा रमन के अनुसार, मलकान सिंह आत्मसमर्पण और रिहाई के कई साल बाद विजय रमन से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने उनके पैर छुए और 101 रुपये भेंट किए।
विजय रमन ने किन प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा की?
उन्होंने Special Protection Group (SPG) में सेवा देते हुए चार अलग-अलग भारतीय प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा की थी।
Conclusion:
विजय रमन का पुलिस करियर साहसिक अभियानों, कठिन कानून-व्यवस्था चुनौतियों और मानवीय संवेदनशीलता का मिश्रण रहा। चंबल के डकैतों के खिलाफ कार्रवाई से लेकर SPG में चार प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा और भारत-पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग से जुड़े कार्यों तक उनकी सेवा के कई महत्वपूर्ण अध्याय रहे। उनकी आत्मकथा और पत्नी वीणा रमन द्वारा साझा किए गए संस्मरण यह भी बताते हैं कि कठोर पुलिसिंग के पीछे एक ऐसा अधिकारी था, जो लोगों के सम्मान और मानवीय व्यवहार को उतना ही महत्व देता था।
