हरियाणा में खाली यूनिवर्सिटी पदों को ‘Deemed Abolished’ करने के फैसले का विरोध, शिक्षकों ने जताई चिंता

HFUCTO का दावा- sanctioned posts खत्म होने से रेगुलर फैकल्टी की कमी बढ़ेगी, पढ़ाई और रिसर्च पर पड़ सकता है असर

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हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशन (HFUCTO) ने राज्य विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ मानने के प्रस्ताव का विरोध किया है।


चार साल से खाली पदों को खत्म करने का प्रस्ताव

हरियाणा सरकार के राज्य विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ मानने के प्रस्ताव का शिक्षकों के संगठन HFUCTO ने विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इस फैसले से विश्वविद्यालयों में नियमित शिक्षकों की कमी और बढ़ सकती है, जिसका असर शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ेगा।

HFUCTO के अनुसार, राज्य वित्त विभाग की ओर से जारी एक संचार में प्रस्ताव रखा गया है कि वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने की तारीख से चार साल तक जिन पदों पर नियुक्ति नहीं होती है, उन्हें ‘Deemed Abolished’ माना जाए।

वहीं, चार साल से अधिक समय से खाली पदों को प्रशासनिक विभाग मामले-दर-मामला आधार पर भरने पर विचार कर सकता है।

HFUCTO क्यों कर रहा है विरोध?

HFUCTO का तर्क है कि किसी स्वीकृत पद को केवल लंबे समय तक खाली रहने के आधार पर समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। संगठन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकर ने कहा कि पद खाली रहने के पीछे कई प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कारण हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में प्रशासनिक औपचारिकताओं, वैधानिक आवश्यकताओं, विभिन्न स्तरों की अनुमति और अन्य प्रक्रियात्मक देरी के कारण स्वीकृत पद वर्षों तक खाली रह सकते हैं।

शिक्षक संगठन का मानना है कि ऐसे पदों को खत्म करने के बजाय सरकार को पहले यह पता लगाना चाहिए कि रिक्तियां क्यों बनी हुई हैं और फिर पारदर्शी एवं समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती पूरी करनी चाहिए।

रेगुलर फैकल्टी की कमी बढ़ने का डर

HFUCTO ने कहा कि राज्य के कई विश्वविद्यालय और कॉलेज पहले से ही नियमित शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं। संगठन के मुताबिक, स्वीकृत पदों को स्थायी रूप से खत्म करने से भविष्य में उपलब्ध शिक्षण पदों की संख्या कम हो सकती है।

इसका सीधा असर मौजूदा शिक्षकों के कार्यभार पर पड़ने की आशंका है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों पर बढ़ता काम का दबाव पढ़ाई, रिसर्च और अन्य अकादमिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

विश्वविद्यालयों के कामकाज पर पड़ सकता है असर

शिक्षक संगठन के अनुसार, विश्वविद्यालयों में पर्याप्त संख्या में नियमित फैकल्टी होना जरूरी है। इससे न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चलती है, बल्कि शोध कार्य और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलती है।

HFUCTO का कहना है कि नियमित पदों को बनाए रखना और समय पर भरना विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के अकादमिक एवं प्रशासनिक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है।

सरकार से क्या मांग कर रहा HFUCTO?

HFUCTO का कहना है कि सरकार को लंबे समय से खाली पड़े पदों को खत्म करने के बजाय उनकी स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। संगठन चाहता है कि प्रत्येक रिक्त पद के पीछे मौजूद कारणों की पहचान की जाए और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया जाए।

शिक्षकों के संगठन के अनुसार, स्वीकृत पदों को बनाए रखने और उन्हें भरने से विश्वविद्यालयों में पर्याप्त फैकल्टी सुनिश्चित की जा सकेगी तथा शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार कम होगा।

Key Highlights:

  • HFUCTO ने हरियाणा सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया।
  • चार साल से खाली स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ मानने का प्रस्ताव।
  • चार साल से अधिक पुराने पदों को केस-टू-केस आधार पर भरने पर विचार का प्रावधान।
  • शिक्षकों का दावा, विश्वविद्यालयों में पहले से नियमित फैकल्टी की कमी।
  • पद खत्म होने से मौजूदा शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ने की आशंका।
  • शिक्षण, रिसर्च और अन्य अकादमिक गतिविधियां प्रभावित होने का डर।
  • HFUCTO ने पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया की मांग की।

FAQ Section

हरियाणा सरकार ने खाली पदों को लेकर क्या प्रस्ताव दिया है?

राज्य वित्त विभाग के संचार के अनुसार, वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद चार साल तक खाली रहने वाले स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ मानने का प्रस्ताव है।

HFUCTO इस प्रस्ताव का विरोध क्यों कर रहा है?

HFUCTO का कहना है कि किसी स्वीकृत पद के लंबे समय तक खाली रहने का मतलब यह नहीं है कि वह पद जरूरी नहीं है। भर्ती प्रक्रिया में प्रशासनिक और वैधानिक कारणों से भी देरी हो सकती है।

शिक्षकों को सबसे बड़ी चिंता किस बात की है?

संगठन को डर है कि स्वीकृत पदों के खत्म होने से विश्वविद्यालयों में नियमित फैकल्टी की संख्या कम हो सकती है और मौजूदा शिक्षकों का कार्यभार बढ़ सकता है।

इसका शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?

HFUCTO के अनुसार, शिक्षकों की कमी से पढ़ाई, शोध और अन्य अकादमिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है तथा विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक कामकाज में भी कठिनाई आ सकती है।

HFUCTO क्या चाहता है?

संगठन चाहता है कि खाली पदों को खत्म करने के बजाय उनकी रिक्ति के कारणों की पहचान की जाए और पारदर्शी व समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया के जरिए स्वीकृत पदों को भरा जाए।

Conclusion:

हरियाणा में लंबे समय से खाली स्वीकृत विश्वविद्यालयी पदों को ‘Deemed Abolished’ मानने के प्रस्ताव ने शिक्षकों के संगठन की चिंता बढ़ा दी है। HFUCTO का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण खाली पदों को खत्म करना विश्वविद्यालयों में पहले से मौजूद फैकल्टी संकट को और गंभीर कर सकता है। संगठन ने सरकार से पदों को बनाए रखने और पारदर्शी, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया अपनाने की मांग की है।Screenshot_1188


Edited By: Atul Sharma

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