तरनतारन का सखीरा गांव: 4 हजार आबादी के बावजूद आज भी बस सेवा से वंचित, कई नामचीन हस्तियों की है जन्मभूमि

2011 की जनगणना में 2,440 आबादी वाले सखीरा गांव की मौजूदा आबादी करीब 4,000 पहुंच चुकी है। गांव ने पुलिस, न्यायपालिका और पत्रकारिता के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व दिए हैं, लेकिन परिवहन सुविधा अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है।

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तरनतारन से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित सखीरा गांव अपनी सामाजिक पहचान और यहां से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोगों के कारण खास है। आबादी बढ़ने के बावजूद यहां सार्वजनिक बस सेवा उपलब्ध नहीं है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है।

 

पंजाब के तरनतारन जिले का सखीरा गांव अपनी सामाजिक पहचान और यहां से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोगों के कारण खास स्थान रखता है। 2011 की जनगणना के अनुसार गांव की आबादी 2,440 थी, जबकि वर्तमान में यह संख्या करीब 4,000 तक पहुंच गई है। करीब 1,250 एकड़ क्षेत्र में फैला यह गांव तरनतारन से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

तरनतारन ही गांव के लिए निकटतम प्रमुख शहर है और ब्लॉक, तहसील तथा जिला मुख्यालय भी है। आर्थिक गतिविधियों, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए ग्रामीणों को मुख्य रूप से तरनतारन पर निर्भर रहना पड़ता है।

सखीरा गांव की आबादी और साक्षरता

2011 Census के आंकड़ों के मुताबिक सखीरा गांव में 1,320 पुरुष और 1,120 महिलाएं थीं। गांव में करीब 425 परिवार रहते थे। उस समय गांव की कुल साक्षरता दर 58.43 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता

गांव में पुरुष साक्षरता दर 61.91 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 54.33 प्रतिशत थी। Census 2011 में सखीरा का भौगोलिक संदर्भ वाला गांव कोड 143402 दर्ज किया गया था।

वर्तमान समय में बढ़ती आबादी के साथ गांव की सामाजिक और आर्थिक जरूरतें भी बढ़ी हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि बुनियादी परिवहन सुविधा के मामले में गांव को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया है।

चारों तरफ बसे हैं दूसरे गांव

सखीरा गांव के आसपास कई अन्य गांव स्थित हैं। इसके उत्तर में खारा, दक्षिण में लाहुका, पूर्व में जंडोके और पश्चिम में मनोचाहल गांव है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में जौरा और उत्तर-पूर्व में तखुचक गांव स्थित है।

गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसे मुख्य सड़कों से जुड़ने के लिए आसपास के मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही वजह है कि सार्वजनिक परिवहन की सुविधा ग्रामीणों के लिए लंबे समय से अहम मुद्दा बनी हुई है।

सखीरा ने दिए कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व

सखीरा गांव की पहचान केवल उसकी आबादी या भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। गांव ने पुलिस, न्यायपालिका और पत्रकारिता समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले कई लोगों को जन्म दिया है।

IPS अधिकारी हरजीत सिंह पन्नू

गांव के प्रमुख नामों में IPS अधिकारी हरजीत सिंह पन्नू का नाम शामिल है, जो SSP के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमृतसर के खालसा कॉलेज में दाखिला लिया।

हरजीत सिंह पन्नू का विवाह मंदीप कौर (पन्नू) से हुआ था, जो पूर्व राज्य कैबिनेट मंत्री गुरचेत सिंह भुल्लर की भतीजी थीं। वहीं, जस्टिस मंदीप पन्नून वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की न्यायाधीश हैं।

पत्रकारिता और पुलिस सेवा में भी पहचान

सखीरा गांव से वरिष्ठ पत्रकार जतिंदर पन्नू भी संबंधित हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त SP बलविंदर सिंह और बलकार सिंह समेत कई अन्य लोगों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में पहचान बनाई है।

गांव के बुजुर्ग मेहर सिंह सखीरा भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। 80 वर्षीय मेहर सिंह वर्ष 1963 में अमृतसर के खालसा कॉलेज में दाखिल हुए थे।

पन्नू उपजाति से जुड़े हैं जाट सिख

सखीरा गांव के जाट सिख पन्नू उपजाति से संबंधित बताए जाते हैं। आसपास के क्षेत्र में करीब 12 गांवों का एक साझा सामाजिक समूह है, जहां जाट सिख समुदाय में पन्नू उपजाति के लोग पाए जाते हैं।

यह सामाजिक जुड़ाव क्षेत्र की सामुदायिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

बस सेवा नहीं होने से ग्रामीण परेशान

गांव की सबसे बड़ी समस्याओं में सार्वजनिक परिवहन का अभाव प्रमुख है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से गांव को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिली हैं।

सखीरा की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां बस सेवा शुरू करना भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। गांव से पट्टी रोड और तरनतारन-दियालपुरा रोड काफी दूरी पर हैं। ऐसे में नियमित बस सेवा के लिए पर्याप्त कनेक्टिविटी विकसित करना आसान नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि बस सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें जरूरी कामों के लिए निजी साधनों या अन्य परिवहन माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ता है। बढ़ती आबादी को देखते हुए ग्रामीण लंबे समय से बेहतर परिवहन सुविधा की जरूरत महसूस कर रहे हैं।

Key Highlights:

  • सखीरा गांव तरनतारन से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है।
  • 2011 की जनगणना में गांव की आबादी 2,440 दर्ज हुई थी।
  • वर्तमान में गांव की आबादी करीब 4,000 बताई गई है।
  • गांव करीब 1,250 एकड़ क्षेत्र में फैला है।
  • 2011 में गांव की साक्षरता दर 58.43 प्रतिशत थी।
  • पुरुष साक्षरता दर 61.91 प्रतिशत और महिला साक्षरता 54.33 प्रतिशत थी।
  • गांव में करीब 425 परिवार हैं।
  • सखीरा के आसपास खारा, लाहुका, जंडोके, मनोचाहल, जौरा और तखुचक गांव स्थित हैं।
  • गांव का संबंध सेवानिवृत्त SSP IPS अधिकारी हरजीत सिंह पन्नू समेत कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों से है।
  • ग्रामीणों के अनुसार गांव में सार्वजनिक बस सेवा का अभाव एक बड़ी समस्या है।

FAQ Section:

सखीरा गांव कहां स्थित है?

सखीरा गांव पंजाब के तरनतारन जिले में स्थित है और तरनतारन शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर है।

2011 में सखीरा गांव की आबादी कितनी थी?

2011 की जनगणना के अनुसार सखीरा गांव की आबादी 2,440 थी, जिसमें 1,320 पुरुष और 1,120 महिलाएं शामिल थीं।

सखीरा गांव की वर्तमान आबादी कितनी है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में सखीरा गांव की आबादी करीब 4,000 है।

सखीरा गांव की साक्षरता दर कितनी है?

2011 Census के अनुसार गांव की कुल साक्षरता दर 58.43 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 61.91 प्रतिशत और महिला साक्षरता 54.33 प्रतिशत थी।

सखीरा गांव की प्रमुख समस्या क्या है?

ग्रामीणों के अनुसार सार्वजनिक बस सेवा का अभाव गांव की प्रमुख समस्याओं में से एक है। मुख्य सड़कें गांव से दूर होने के कारण नियमित बस सेवा शुरू करना चुनौतीपूर्ण है।

Conclusion:

तरनतारन जिले का सखीरा गांव अपनी बढ़ती आबादी, सामाजिक पहचान और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले प्रतिष्ठित लोगों के कारण महत्वपूर्ण है। गांव ने पुलिस, न्यायपालिका और पत्रकारिता के क्षेत्र में कई नाम दिए हैं। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार परिवहन सुविधा की कमी अब भी उनके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 4,000 की आबादी वाले इस गांव को बेहतर सार्वजनिक परिवहन और बुनियादी कनेक्टिविटी मिलने से स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही काफी आसान हो सकती है।Screenshot_1194

Edited By: Atul Sharma

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