- Hindi News
- राज्य
- हरियाणा
- हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, 10 लाख उपभोक्ता प्रभावित; गुरुग्राम-फरीदाबाद में...
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, 10 लाख उपभोक्ता प्रभावित; गुरुग्राम-फरीदाबाद में पानी का संकट
करीब 40 हजार बिजली कर्मचारी और इंजीनियर तीन दिन की हड़ताल पर, उद्योगों का उत्पादन ठप। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने हड़ताल खत्म कर बिजली लाइसेंस के खिलाफ कानूनी लड़ाई में साथ देने की अपील की।
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल से गुरुवार को कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में करीब 10 लाख उपभोक्ता प्रभावित होने का अनुमान है। बिजली संकट के चलते पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादन और आम जनजीवन पर असर पड़ा।
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से कई जिले प्रभावित
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राज्यव्यापी हड़ताल ने गुरुवार को कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। करीब 40 हजार कर्मचारी और इंजीनियर इस हड़ताल में शामिल बताए गए हैं। इसका सबसे अधिक असर गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह जिलों में देखने को मिला, जहां बिजली कटौती के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ उद्योगों और आवश्यक सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 10 लाख बिजली उपभोक्ता प्रभावित हुए। गुरुग्राम में आंदोलन शुरू होने के शुरुआती 12 घंटों के भीतर बिजली से जुड़ी 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं।
24 अक्टूबर तक जारी रहेगी हड़ताल
हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स जॉइंट स्ट्रगल फ्रंट ने 21 अक्टूबर रात 10 बजे से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का आह्वान किया है।
कर्मचारी हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के 19 अक्टूबर के आदेश का विरोध कर रहे हैं। इस आदेश के तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि हरियाणा में इस तरह का यह पहला मामला है। उन्होंने लाइसेंस तत्काल रद्द करने और समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के संबंध में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।
गुरुग्राम के कई सेक्टरों में बिजली गुल
हड़ताल के कारण गुरुग्राम के सेक्टर-5, सेक्टर-7, सेक्टर-10A और सेक्टर-52 के अलावा पालम विहार और दौलताबाद जैसे क्षेत्रों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आईं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली लाइनों में आई खराबियों को समय पर ठीक नहीं किया गया। कुछ निवासियों ने यह भी शिकायत की कि बिजली शिकायत केंद्रों पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें उचित जवाब नहीं मिला और मरम्मत का काम हड़ताल समाप्त होने के बाद किए जाने की बात कही गई।
बिजली आपूर्ति बाधित होने से कई इलाकों में पेयजल की किल्लत भी पैदा हो गई। इससे घरेलू कामकाज और दैनिक जरूरतें प्रभावित हुईं।
औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप होने की आशंका
गुरुग्राम के सेक्टर-37, कादीपुर और बसई में कई औद्योगिक इकाइयों ने बिजली कटौती के कारण कामकाज प्रभावित होने की सूचना दी। बिजली न मिलने से मशीनें और उत्पादन गतिविधियां रुकने की स्थिति बनी, जिससे उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई।
प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि बिजली कटौती के कारण मशीनरी और उत्पादन ठप हो गया है। उन्होंने चिंता जताई कि आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहने पर कारोबार, औद्योगिक गतिविधियों और समय पर ऑर्डर की डिलीवरी पर असर पड़ सकता है।
फरीदाबाद में सड़क जाम, नूंह के कई इलाकों में भी असर
फरीदाबाद के NIT-2 क्षेत्र में करीब 13 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के बाद स्थानीय निवासियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली कटौती के कारण उनके घरों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई थी।
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया गया।
उधर, नूंह जिले के पुन्हाना, नगीना और फिरोजपुर झिरका सहित कई क्षेत्रों में भी बिजली कटौती की खबरें सामने आईं। बिजली संकट ने इन इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
अनिल विज की कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने की अपील
बिजली संकट के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार निजीकरण के खिलाफ है और उसने HERC के आदेश को अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती दी है। सरकार ने आदेश पर रोक लगाने की मांग भी की है।
अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता छोड़कर कानूनी लड़ाई में सरकार का साथ देने को कहा। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि कर्मचारी सरकार के वकील की सहायता कर सकते हैं या अपना वकील नियुक्त करके मामले में पक्ष रख सकते हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि HERC केंद्रीय कानून के तहत काम करने वाला एक स्वायत्त निकाय है। सरकार की ओर से आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
Key Highlights
-
हरियाणा में करीब 40 हजार बिजली कर्मचारी और इंजीनियर हड़ताल पर हैं।
-
हड़ताल 21 अक्टूबर रात 10 बजे से 24 अक्टूबर तक निर्धारित है।
-
करीब 10 लाख बिजली उपभोक्ताओं के प्रभावित होने का अनुमान है।
-
गुरुग्राम में शुरुआती 12 घंटों में 3,000 से अधिक बिजली शिकायतें दर्ज हुईं।
-
गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में बिजली कटौती से पेयजल आपूर्ति और उद्योग प्रभावित हुए।
-
कर्मचारी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए 25 वर्षीय बिजली वितरण लाइसेंस को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
-
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार ने HERC के आदेश को APTEL में चुनौती दी है।
FAQ Section
1. हरियाणा में बिजली कर्मचारी हड़ताल क्यों कर रहे हैं?
कर्मचारी HERC के उस आदेश का विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है।
2. हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल कब तक है?
हड़ताल 21 अक्टूबर 2026 की रात 10 बजे से 24 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है।
3. बिजली हड़ताल से कौन-से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में बिजली आपूर्ति बाधित होने, पेयजल संकट और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की खबरें सामने आईं।
4. बिजली हड़ताल से कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, करीब 10 लाख बिजली उपभोक्ताओं के प्रभावित होने का अनुमान है। गुरुग्राम में शुरुआती 12 घंटों के दौरान 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
5. सरकार ने बिजली संकट को लेकर क्या कदम उठाया है?
ऊर्जा मंत्री अनिल विज के अनुसार, सरकार ने HERC के आदेश को APTEL में चुनौती देकर उस पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।
Conclusion
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने बिजली आपूर्ति के साथ पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक उत्पादन और आम जनजीवन को प्रभावित किया है। कर्मचारी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार ने मामले को कानूनी तरीके से चुनौती देने की बात कही है। अब उपभोक्ताओं और उद्योगों की नजर इस बात पर है कि बिजली आपूर्ति कब सामान्य होगी और लाइसेंस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

