96% की शर्त से शुरू हुआ सफर, 98.6% अंक लेकर बनीं शूटर; एशियन गेम्स में आशिमा अहलावत ने रचा इतिहास

मां ने पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के बाद शूटिंग की अनुमति दी, रोहतक की आशिमा ने जापान में भारतीय महिला ट्रैप टीम को दिलाया सिल्वर

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रोहतक की निशानेबाज आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला ट्रैप टीम के साथ रजत पदक जीतकर अपनी मेहनत की कहानी को नई पहचान दी। शूटिंग शुरू करने से पहले मां ने उनके सामने 12वीं में 96% अंक हासिल करने की शर्त रखी थी, लेकिन आशिमा ने 98.6% अंक हासिल कर चुनौती पूरी की।

 

रोहतक की निशानेबाज आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला शूटिंग टीम के साथ रजत पदक जीतकर देश और अपने परिवार का नाम रोशन किया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय शूटिंग तक पहुंचने की उनकी कहानी केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं है।

आशिमा को शूटिंग में करियर बनाने की अनुमति हासिल करने के लिए पहले अपनी पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन करना पड़ा। उनकी मां ने बेटी के सामने 12वीं कक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल करने की चुनौती रखी थी। आशिमा ने इस लक्ष्य को पार करते हुए 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए और इसके बाद अपने शूटिंग के सपने को आगे बढ़ाया।

मां ने रखी थी 96 प्रतिशत अंक की शर्त

आशिमा की मां सुमित्रा अहलावत रोहतक के सीआर कॉलेज ऑफ लॉ में प्रोफेसर हैं। उनके अनुसार आशिमा बचपन से ही पढ़ाई में तेज रही हैं और स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ डिबेट तथा लेखन जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थीं।

11वीं कक्षा में आशिमा ने मेडिकल स्ट्रीम चुनी। इसी दौरान टीवी पर शूटिंग प्रतियोगिताएं देखने के बाद उनके मन में निशानेबाजी को करियर बनाने का विचार आया।

जब उन्होंने मां से शूटिंग सीखने की इच्छा जताई तो सुमित्रा ने शुरुआत में इसका विरोध किया। उन्हें चिंता थी कि बेटी पढ़ाई में इतना अच्छा कर रही है और शूटिंग के कारण उसका अकादमिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

आखिरकार मां ने कहा कि अगर आशिमा 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर लेती हैं, तो उन्हें शूटिंग करने की अनुमति दी जाएगी।

आशिमा ने चुनौती स्वीकार की और उम्मीद से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 98.6 प्रतिशत अंक हासिल कर लिए।

टीवी पर प्रतियोगिताएं देखकर आया शूटिंग का जुनून

आशिमा का शूटिंग की ओर रुझान अचानक शुरू हुआ। प्रतियोगिताओं को टीवी पर देखने के बाद उन्होंने इस खेल के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।

कोविड-19 महामारी के कारण सामान्य जीवन प्रभावित होने के बावजूद उनका लक्ष्य नहीं बदला। 12वीं के बाद उन्होंने शूटिंग प्रशिक्षण के विकल्पों के बारे में खुद जानकारी जुटाई और मानव रचना यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से अपने शूटिंग सफर की शुरुआत की।

रोज रोहतक से फरीदाबाद का सफर, करीब 5 घंटे का सफर

शूटिंग के शुरुआती दौर में आशिमा को प्रशिक्षण के लिए रोजाना रोहतक से फरीदाबाद जाना पड़ता था।

उनकी मां के मुताबिक, करीब तीन महीने तक आशिमा रोजाना लगभग पांच घंटे यात्रा करती रहीं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित करनी सिंह शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।

लगातार अभ्यास का परिणाम जल्द ही प्रतियोगिताओं में नजर आने लगा।

राज्य स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

आशिमा ने शुरुआत में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं और यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने शुरू किए। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई।

लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद उनका सफर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और अब एशियन गेम्स में भारतीय टीम के साथ रजत पदक जीतकर उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

छह साल की उम्र में पिता को खोया

आशिमा की जिंदगी में बचपन से ही बड़ी चुनौती रही है। जब वह केवल छह साल की थीं, तब सड़क हादसे में उनके पिता का निधन हो गया था।

इसके बाद उनकी मां सुमित्रा ने अकेले ही आशिमा और उनकी छोटी बहन की परवरिश की।

परिवार की जिम्मेदारियों के साथ बेटी के खेल करियर को समर्थन देना आसान नहीं था, लेकिन सुमित्रा ने आशिमा के सपने को आगे बढ़ाने में लगातार उनका साथ दिया।

मां के संघर्ष और बेटी की मेहनत ने बदली कहानी

आशिमा की उपलब्धि के पीछे उनकी व्यक्तिगत मेहनत के साथ उनकी मां का सहयोग भी अहम रहा। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने से लेकर प्रशिक्षण के लिए लगातार यात्रा करने तक, उनके सफर में कई चुनौतियां आईं।

12वीं की परीक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद आशिमा ने यह साबित किया कि पढ़ाई और खेल को लेकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

अब एशियन गेम्स में भारतीय महिला ट्रैप टीम के साथ रजत पदक जीतने के बाद उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिल गई है।

Key Highlights:

  • नाम: आशिमा अहलावत
  • संबंध: रोहतक, हरियाणा
  • खेल: शूटिंग
  • स्पर्धा: महिला ट्रैप टीम
  • एशियन गेम्स 2026: भारतीय टीम के साथ रजत पदक
  • 12वीं के अंक: 98.6 प्रतिशत
  • मां की चुनौती: 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल करने पर शूटिंग की अनुमति
  • 12वीं के बाद मानव रचना यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में शूटिंग प्रशिक्षण शुरू किया।
  • शुरुआती दौर में रोजाना रोहतक से फरीदाबाद तक करीब पांच घंटे यात्रा की।
  • बाद में करनी सिंह शूटिंग अकादमी, दिल्ली में प्रशिक्षण लिया।
  • राज्य और यूनिवर्सिटी स्तर से लेकर खेलो इंडिया और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पदक जीते।
  • छह वर्ष की उम्र में सड़क दुर्घटना में पिता का निधन हो गया था।
  • मां ने अकेले आशिमा और उनकी छोटी बहन की परवरिश की।

FAQ Section:

आशिमा अहलावत कौन हैं?

आशिमा अहलावत हरियाणा के रोहतक की निशानेबाज हैं और भारतीय महिला शूटिंग टीम का हिस्सा हैं।

आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता?

उन्होंने भारतीय महिला ट्रैप टीम के साथ रजत पदक जीता।

आशिमा ने 12वीं कक्षा में कितने अंक हासिल किए?

आशिमा ने 12वीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए।

आशिमा की मां ने शूटिंग को लेकर क्या शर्त रखी थी?

उनकी मां ने कहा था कि यदि आशिमा 12वीं कक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल करती हैं, तो वह शूटिंग को आगे करियर के रूप में अपना सकती हैं।

आशिमा ने शूटिंग प्रशिक्षण कहां से शुरू किया?

12वीं के बाद उन्होंने मानव रचना यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में शूटिंग का प्रशिक्षण शुरू किया। बाद में उन्होंने दिल्ली की करनी सिंह शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया।

Conclusion:

आशिमा अहलावत की कहानी मेहनत, अनुशासन और परिवार के समर्थन की मिसाल है। पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के बाद शूटिंग को करियर बनाने का फैसला और शुरुआती दौर में रोजाना लंबी दूरी तय करने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला ट्रैप टीम के साथ रजत पदक उनकी इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।Screenshot_302

Edited By: Atul Sharma

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