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LPU हिंसा मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा छात्र, CBI जांच की मांग; याचिका में राजनीतिक कनेक्शन का भी जिक्र
छात्र ने 26 सितंबर की रात से LPU परिसर में हुई कथित हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की स्वतंत्र जांच की मांग की
Lovely Professional University (LPU) में हालिया हिंसा और आगजनी को लेकर एक छात्र ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर CBI जांच की मांग की है। याचिका में विश्वविद्यालय के चांसलर और राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल के राजनीतिक जुड़ाव का भी उल्लेख किया गया है।
LPU हिंसा मामले में हाईकोर्ट पहुंचा छात्र
Lovely Professional University (LPU) में हाल ही में हुई कथित हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ को लेकर एक छात्र ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। छात्र रवि राज ने जनहित याचिका दायर करते हुए पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है।
याचिका में 26 सितंबर की रात से विश्वविद्यालय परिसर में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और कथित लूटपाट की जांच की मांग की गई है।
याचिका में LPU चांसलर के राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल के राजनीतिक जुड़ाव का भी उल्लेख किया है।याचिका के अनुसार, डॉ. मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उन्होंने अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं।
इस राजनीतिक संदर्भ को याचिकाकर्ता ने मामले की जांच की आवश्यकता से जोड़ते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
याचिका के अनुसार, 26 सितंबर की रात विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच एक अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट और WhatsApp संदेश प्रसारित हुए। इसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के साथ एक कर्मचारी ने दुष्कर्म किया और बाद में छात्रा को घर भेज दिया गया।
पोस्ट में यह भी दावा किया गया था कि छात्रा ने बाद में आत्महत्या कर ली।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इन संदेशों के बाद करीब 2,000 छात्र GH-3 हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए। रात करीब 2 बजे छात्रों के एक समूह ने फगवाड़ा और जालंधर के बीच National Highway-44 को भी बाधित किया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में आगजनी, तोड़फोड़ और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं।
बाहरी लोगों की मौजूदगी का भी लगाया आरोप
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में बाहरी लोग भी विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे थे। याचिका में कहा गया है कि इनमें पुरुष और महिलाएं शामिल थीं और कुछ लोग खुले वाहनों में आए थे।
याचिका में कुछ लोगों के पास कथित तौर पर वॉकी-टॉकी, तलवारें, रॉड, बंदूकें और दरांती जैसे हथियार होने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, कुछ लोगों ने चेहरे ढके हुए थे।
हालांकि, ये सभी आरोप याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए दावे हैं, जिनकी सत्यता का निर्धारण न्यायिक जांच या संबंधित जांच एजेंसियों की जांच से होगा।
CCTV, कंप्यूटर और सुरक्षा ढांचे को नुकसान का दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट को जबरन खोला और परिसर में प्रवेश किया।
इसके बाद CCTV कैमरों, कंप्यूटरों, UPS सिस्टम, LED स्क्रीन, टर्नस्टाइल गेट, बूम बैरियर और सुरक्षा कार्यालयों को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाया गया।
याचिकाकर्ता ने सुरक्षा कर्मचारियों पर हमले, आगजनी और परिसर में मौजूद दुकानों, लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक शाखाओं तथा ATM को नुकसान पहुंचाने या लूटने के भी आरोप लगाए हैं।
'हिंसा सुनियोजित थी'—याचिकाकर्ता का दावा
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कुछ LPU हॉस्टल के छात्र और परिसर के बाहर PG में रहने वाले कुछ विद्यार्थी हिंसा में शामिल थे, लेकिन याचिकाकर्ता के अनुसार बड़ी संख्या में लोग बाहरी थे।
याचिकाकर्ता ने इन घटनाओं को कथित तौर पर सुनियोजित हमला बताते हुए कहा है कि इसके पीछे किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाना और राज्य में माहौल बिगाड़ना हो सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि याचिका के पाठ से नहीं होती है।
Chitkara University की घटना का भी किया उल्लेख
याचिका में राजपुरा स्थित Chitkara University में इससे एक रात पहले सामने आए कथित सोशल मीडिया दावों का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, वहां दो छात्राओं के लापता होने या आत्महत्या करने की अफवाहों के बाद हिंसा हुई थी, जबकि विश्वविद्यालय और पुलिस ने ऐसे किसी घटनाक्रम से इनकार किया था।
याचिका में कहा गया है कि इस तरह की अफवाहों और हिंसा से सबसे अधिक नुकसान विश्वविद्यालय के छात्रों को होता है और कैंपस में भय का माहौल बनता है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि पुलिस को करीब रात 1:45 बजे छात्रों के जुटने की जानकारी मिल गई थी। इसके बावजूद उनके अनुसार सड़क अवरोध, आगजनी और कथित लूटपाट कई घंटों तक जारी रही।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि तोड़फोड़ के मामले में तत्काल गिरफ्तारियां नहीं हुईं और पुलिस अधिकारियों की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए दावों को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए।
हाईकोर्ट में अब सुनवाई की उम्मीद
यह जनहित याचिका केंद्र सरकार समेत अन्य पक्षों के खिलाफ दायर की गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की डिवीजन बेंच के समक्ष होने की उम्मीद है।
अब अदालत के समक्ष मुख्य मुद्दों में हिंसा की परिस्थितियां, सोशल मीडिया पर फैले दावों की सत्यता, बाहरी लोगों की कथित भूमिका और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवाल शामिल हो सकते हैं।
Key Highlights:
- LPU हिंसा मामले में छात्र ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में PIL दायर की।
- याचिका में पूरे मामले की CBI जांच की मांग की गई है।
- 26 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर एक अपुष्ट दावा वायरल होने का उल्लेख।
- याचिका में करीब 2,000 छात्रों के जुटने और NH-44 बाधित होने का दावा।
- बाहरी लोगों की कथित मौजूदगी और हिंसा में उनकी भूमिका के आरोप।
- CCTV, कंप्यूटर, सुरक्षा ढांचे और अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दावे।
- LPU चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल के राजनीतिक जुड़ाव का भी याचिका में उल्लेख।
- पुलिस की कार्रवाई और कथित देरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
FAQ
LPU हिंसा मामले में हाईकोर्ट में किसने याचिका दायर की?
छात्र रवि राज ने जनहित याचिका दायर कर मामले की CBI जांच की मांग की है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और कथित लूटपाट की स्वतंत्र जांच CBI से कराने की मांग की है।
LPU में विवाद कैसे शुरू हुआ?
याचिका के अनुसार, 26 सितंबर की रात एक अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट और WhatsApp संदेशों के बाद छात्रों के बीच तनाव बढ़ा।
क्या बाहरी लोगों की भूमिका का आरोप लगाया गया है?
हां। याचिका में बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के परिसर में आने और हिंसा में शामिल होने का दावा किया गया है। यह फिलहाल याचिकाकर्ता का आरोप है।
मामले की सुनवाई कौन करेगा?
याचिका की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की डिवीजन बेंच के समक्ष होने की उम्मीद है।
Conclusion:
LPU में हुई हिंसा और आगजनी को लेकर दायर जनहित याचिका ने मामले की स्वतंत्र जांच और पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई सवाल अदालत के सामने रखे हैं। याचिका में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। अब हाईकोर्ट की सुनवाई और संबंधित जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाओं के पीछे वास्तविक परिस्थितियां और जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या थी।
