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जींद की बेटी नीरू धांडा ने रचा इतिहास, एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं
एक कमरे के घर से एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक तक का सफर, डेंगू और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद नहीं टूटा नीरू का हौसला
हरियाणा के जींद जिले के सांगतपुरा गांव की 26 वर्षीय नीरू धांडा ने महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। साधारण परिवार से आने वाली नीरू ने बीमारी और आर्थिक चुनौतियों के बीच यह उपलब्धि हासिल की।
हरियाणा के जींद जिले के सांगतपुरा गांव की रहने वाली नीरू धांडा ने अपनी मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे गांव को गौरवान्वित कर दिया। 26 वर्षीय नीरू ने महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया और इस स्पर्धा में ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
नीरू की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका परिवार बेहद साधारण परिस्थितियों में जीवन गुजारता है। परिवार एक कमरे के मकान में रहता है और घर की आजीविका भैंसों के दूध की बिक्री से चलती रही है। इसके बावजूद नीरू ने बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला कभी नहीं छोड़ा।
एक कमरे के घर से एशियन गेम्स के गोल्ड तक
नीरू का घर आज भी बेहद साधारण है। कमरे की दीवारों पर उनके जीते हुए पदक और सम्मान दिखाई देते हैं। उनकी मां सुदेश देवी के अनुसार, भले ही घर की दीवारों पर रंग नहीं चढ़ पाया, लेकिन नीरू ने अपनी उपलब्धियों से परिवार की जिंदगी में खुशियों के रंग जरूर भर दिए हैं।नीरू की मां ने बताया कि उनकी बेटी हमेशा अपने प्रदर्शन को लेकर आत्मविश्वास से भरी रहती थी। वह अक्सर परिवार से कहती थी कि एक दिन उनका अपना बड़ा घर और कार होगी।
अब नीरू का अगला सपना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
मां को राशन की लाइन में मिली बेटी की गोल्ड जीत की खबर
नीरू की ऐतिहासिक जीत की खबर उनकी मां सुदेश देवी को उस समय मिली, जब वह BPL योजना के तहत राशन लेने के लिए लाइन में खड़ी थीं।
फोन पर बेटी के स्वर्ण पदक जीतने की खबर मिलते ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव में भी जश्न का माहौल है और ग्रामीण नीरू की वापसी पर सम्मान समारोह आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं।
गांव की सरपंच सोनिया के पति सुनील कुमार ने कहा कि पूरा गांव नीरू की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है और उनके लौटने पर बड़े स्तर पर सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
डेंगू ने बढ़ाई चिंता, चार दिन देर से पहुंचीं एशियन गेम्स
एशियन गेम्स से पहले नीरू के परिवार के लिए एक समय चिंता का कारण भी बना। प्रतियोगिता से पहले वह डेंगू की चपेट में आ गई थीं और उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
बीमारी के कारण उनकी एशियन गेम्स के लिए रवाना होने में चार दिन की देरी हुई। हालांकि, बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
शुरुआत में पिता शूटिंग के खर्च को लेकर थे चिंतित
नीरू के पिता सुरेश धांडा किसान हैं। शुरुआत में वह बेटी को शूटिंग में भेजने को लेकर इसलिए हिचकिचा रहे थे क्योंकि इस खेल में प्रशिक्षण, यात्रा और अन्य खर्च काफी अधिक होते हैं।
बाद में परिवार के रिश्तेदार सोमबीर पहलवान और उनके बेटे लक्ष्य श्योराण ने नीरू को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। लक्ष्य खुद भी प्रतिस्पर्धी निशानेबाज हैं। परिवार के अनुसार, उन्होंने नीरू के शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान लॉजिस्टिक सहयोग भी दिया।
नीरू ने वर्ष 2019 में शूटिंग का अभ्यास शुरू किया था और लगातार मेहनत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहीं।
सांगतपुरा की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
जींद मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित सांगतपुरा गांव अब नीरू धांडा की ऐतिहासिक उपलब्धि के कारण चर्चा में है।
जिस क्षेत्र में हाल ही में लड़कियों की शादी से जुड़े फैसलों को लेकर खाप पंचायत के आदेश की चर्चा हुई थी, उसी इलाके से नीरू की सफलता बेटियों की उपलब्धियों और उनकी क्षमता को सामने लाती है।
नीरू की मां सुदेश देवी का कहना है कि गांव की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर परिवार को नीरू जैसी बेटी मिले, यही उनकी कामना है।
Key Highlights:
- नीरू धांडा की उम्र: 26 वर्ष
- गांव: सांगतपुरा, जींद, हरियाणा
- खेल: शूटिंग
- स्पर्धा: महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग
- उपलब्धि: स्वर्ण पदक
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड: इस स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला
- शूटिंग की शुरुआत: 2019
- एशियन गेम्स से पहले नीरू को डेंगू हुआ था।
- बीमारी के कारण उनका रवाना होना चार दिन टला।
- परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण रही और आजीविका भैंस के दूध की बिक्री से चलती रही।
- नीरू अब ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखती हैं।
FAQ Section
नीरू धांडा कौन हैं?
नीरू धांडा हरियाणा के जींद जिले के सांगतपुरा गांव की 26 वर्षीय निशानेबाज हैं, जिन्होंने महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता है।
नीरू धांडा ने कौन सा पदक जीता?
नीरू धांडा ने महिला व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
नीरू धांडा ने शूटिंग कब शुरू की?
नीरू ने वर्ष 2019 में शूटिंग का अभ्यास शुरू किया था।
एशियन गेम्स से पहले नीरू को क्या हुआ था?
एशियन गेम्स से पहले नीरू डेंगू से पीड़ित हो गई थीं और उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके कारण उनकी यात्रा चार दिन देर से हुई।
नीरू धांडा का अगला लक्ष्य क्या है?
नीरू की मां के अनुसार, उनकी बेटी अब ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं।
Conclusion:
नीरू धांडा की कहानी केवल एक खेल उपलब्धि तक सीमित नहीं है। एक साधारण परिवार, सीमित संसाधनों, बीमारी और शुरुआत में सामने आई आर्थिक चिंताओं के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। सांगतपुरा की इस बेटी की ऐतिहासिक सफलता ने परिवार और पूरे गांव को गर्व का मौका दिया है और क्षेत्र की बेटियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है।
