72 KM की खारदुंग ला चैलेंज पूरी कर बनीं मिसाल, 15 साल की रनिंग और योग से कनवलदीप कौर ने रचा इतिहास

अमृतसर की फिजियोथेरेपिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट ने 5,370 मीटर की ऊंचाई तक दौड़कर पूरी की कठिन अल्ट्रा-मैराथन

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अमृतसर की कनवलदीप कौर ने लद्दाख मैराथन के तहत आयोजित 72 किलोमीटर की खारदुंग ला चैलेंज पूरी की। करीब 15 वर्षों की रनिंग और योग की नियमित साधना उनकी तैयारी का आधार रही।

रनिंग का 'Me Time' बना 72 KM की चुनौती

कई सालों तक अमृतसर की कनवलदीप कौर के लिए रनिंग सिर्फ एक्सरसाइज नहीं थी। व्यस्त दिनचर्या के बीच यह उनके लिए खुद के साथ समय बिताने का जरिया थी। दौड़ने से शरीर सक्रिय रहता और दिमाग को भी सुकून मिलता।

लेकिन इसी रोजमर्रा की आदत ने उन्हें एक ऐसी चुनौती तक पहुंचा दिया, जिसे देश की कठिन अल्ट्रा-मैराथन चुनौतियों में गिना जाता है।

कनवलदीप कौर ने लद्दाख मैराथन के तहत आयोजित 72 किलोमीटर की खारदुंग ला चैलेंज पूरी कर ली है।

3,975 मीटर से शुरू हुई दौड़, 5,370 मीटर तक पहुंची

खारदुंग ला चैलेंज की शुरुआत करीब 3,975 मीटर की ऊंचाई से होती है। इसके बाद धावकों को करीब 5,370 मीटर ऊंचे खारदुंग ला तक चढ़ना पड़ता है।

पूरे रूट में लगभग 60 किलोमीटर हिस्सा 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर है। इसके बाद धावक नीचे उतरते हुए लेह की ओर बढ़ते हैं।

ऐसे कठिन भूगोल और ऊंचाई पर 72 किलोमीटर की दूरी पूरी करना शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है।

'कोई जादुई चीज नहीं', 15 साल की मेहनत बनी आधार

कनवलदीप कौर के मुताबिक उनकी सफलता के पीछे कोई शॉर्टकट या जादुई तरीका नहीं था।

उनकी तैयारी की नींव करीब 15 वर्षों की रनिंग और योग पर टिकी रही। उन्होंने Yin Yoga और Power Yoga दोनों का अभ्यास किया।

फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और होलिस्टिक हेल्थ प्रैक्टिशनर के तौर पर मानव शरीर और पोषण की उनकी पेशेवर समझ ने भी उनकी तैयारी में भूमिका निभाई।

रात 3 बजे बेटे के साथ ट्रेनिंग

कौर ने बताया कि रनिंग उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा रही है। समय के साथ उनकी दौड़ की दूरी बढ़ती गई और ट्रेनिंग भी अधिक गंभीर होती गई।

खारदुंग ला अल्ट्रा-मैराथन की तैयारी के दौरान वह सुबह करीब 3 बजे अपने 15 वर्षीय बेटे को साथ लेकर निकलती थीं।

उनका बेटा लोकेशन ट्रैक करता था और उनके पति के साथ मिलकर उनकी प्रगति पर नजर रखता था।

कौर आमतौर पर सप्ताह में करीब 40 से 45 किलोमीटर दौड़ती हैं और घर की जिम्मेदारियों के साथ ट्रेनिंग को संतुलित करती हैं।

मई से अगस्त तक चली कड़ी ट्रेनिंग

खारदुंग ला चैलेंज की तैयारी के लिए मई से अगस्त तक उन्होंने एक कठिन ट्रेनिंग साइकल अपनाया।

इस दौरान उन्होंने कई घंटे प्रशिक्षण में लगाए और प्रतिदिन करीब चार से पांच घंटे तक रनिंग की।

कौर के लिए यह सफर केवल शरीर की क्षमता बढ़ाने का नहीं था। उनका मानना है कि इतने लंबे और ऊंचाई वाले रन के लिए मानसिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी है।

65 साल की महिला धावकों ने दिया नया हौसला

कौर ने बताया कि इतनी कठिन दौड़ शारीरिक और मानसिक रूप से थकाने वाली थी। लेकिन यही कारण है कि ट्रेनिंग जरूरी होती है।

लेह और मैराथन के दौरान उनकी मुलाकात 65 वर्षीय महिला धावकों से हुई, जिन्होंने उन्हें अगले साल इसी आयोजन में 122 किलोमीटर की दौड़ का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

Khardung La Challenge के लिए पहले से जरूरी थी Endurance

इस चुनौती में हिस्सा लेने के लिए केवल लंबी दूरी दौड़ने की इच्छा पर्याप्त नहीं थी। प्रतिभागियों को पहले की endurance उपलब्धियों का रिकॉर्ड भी दिखाना होता है।

कनवलदीप कौर ने मैदानी इलाके में पांच घंटे से कम समय में फुल मैराथन पूरी की थी।

इसके अलावा उन्होंने 50 किलोमीटर की अल्ट्रा छह घंटे के भीतर पूरी की और निर्धारित समय में 42 किलोमीटर की दूरी भी पूरी कर चुकी थीं।

असली चुनौती थी 5,000 मीटर की चढ़ाई

कौर के लिए 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई तक पहुंचना अपने आप में बड़ी चुनौती थी।

उन्होंने कहा कि पहाड़ पर चढ़ना कठिन है, लेकिन इस पूरी चुनौती में केवल पैरों की ताकत ही मायने नहीं रखती।

उनके अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण तैयारी में से एक दिमाग को तैयार करना था।

Menopause के दौरान भी जारी रखा Endurance Challenge

कनवलदीप कौर ने बताया कि एक menopausal woman के तौर पर इस दौड़ ने उनकी endurance की परीक्षा ली।

उनके अनुसार, पहाड़ की चुनौती ने उन्हें गति से ज्यादा धैर्य सिखाया।

ऊंचाई पर लंबी चढ़ाई और कठिन परिस्थितियों के बीच शरीर को लगातार आगे बढ़ाते रहना मानसिक मजबूती की भी मांग करता है।

आखिरी किलोमीटर में सबसे ज्यादा थकान

कौर के लिए चढ़ाई कठिन जरूर थी, लेकिन दौड़ के दौरान सबसे मुश्किल क्षणों में से एक अंतिम किलोमीटर की उतराई थी।

उन्होंने बताया कि उस समय तक थकान काफी हावी हो चुकी थी। इसके बावजूद उन्हें एक अलग तरह की राहत महसूस हो रही थी।

कठिन सफर पूरा होने के बाद जब उन्होंने अपने पैरों पर दोबारा पूरा वजन महसूस किया, तो उनके मुताबिक वह बेहद खुश थीं।

Key Highlights:

  • कनवलदीप कौर ने 72 KM Khardung La Challenge पूरी की।
  • यह आयोजन लद्दाख मैराथन का हिस्सा था।
  • रूट करीब 3,975 मीटर से 5,370 मीटर तक पहुंचता है।
  • करीब 60 KM हिस्सा 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर था।
  • कौर के पास करीब 15 साल का रनिंग और योग का अनुभव है।
  • तैयारी के दौरान वह सुबह करीब 3 बजे ट्रेनिंग करती थीं।
  • उनका 15 वर्षीय बेटा उनकी लोकेशन और प्रगति ट्रैक करता था।
  • वह आमतौर पर सप्ताह में 40-45 KM दौड़ती हैं।
  • उन्होंने 50 KM अल्ट्रा छह घंटे के भीतर पूरी की थी।
  • 65 वर्षीय महिला धावकों से मिली प्रेरणा के बाद वह अगले साल 122 KM रन का लक्ष्य देख रही हैं।

FAQ

कनवलदीप कौर कौन हैं?

कनवलदीप कौर अमृतसर की फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और होलिस्टिक हेल्थ प्रैक्टिशनर हैं। वह करीब 15 वर्षों से रनिंग और योग का अभ्यास कर रही हैं।

उन्होंने कौन सी रेस पूरी की है?

उन्होंने लद्दाख मैराथन के तहत आयोजित 72 किलोमीटर की Khardung La Challenge पूरी की है।

Khardung La Challenge कितनी ऊंचाई तक जाती है?

दौड़ करीब 3,975 मीटर से शुरू होकर लगभग 5,370 मीटर ऊंचे खारदुंग ला तक पहुंचती है।

कनवलदीप कौर ने कितने साल तैयारी की?

उनकी रनिंग और योग की नियमित यात्रा करीब 15 वर्षों से जारी है। Khardung La Challenge के लिए उन्होंने मई से अगस्त तक विशेष ट्रेनिंग साइकल भी किया।

क्या वह अगले साल 122 KM की दौड़ में हिस्सा लेंगी?

कौर ने 65 वर्षीय महिला धावकों से प्रेरित होकर अगले साल इसी आयोजन में 122 किलोमीटर की दौड़ के लिए प्रयास करने की इच्छा जताई है।

Conclusion:

कनवलदीप कौर की 72 किलोमीटर की खारदुंग ला चुनौती केवल एक अल्ट्रा-मैराथन पूरी करने की कहानी नहीं है। करीब 15 वर्षों की रनिंग, योग, अनुशासन और मानसिक तैयारी ने उन्हें दुनिया के कठिन ऊंचाई वाले रूटों में से एक पर अपनी endurance परखने का मौका दिया। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि लंबी दूरी की चुनौतियों में शारीरिक तैयारी के साथ मानसिक धैर्य की भी अहम भूमिका होती है।Screenshot_311

Edited By: Atul Sharma

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