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फरीदाबाद में सीवर सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत, मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
HHRC ने नगर निगम, पुलिस और प्रशासन से जवाब तलब किया, बिना सुरक्षा उपकरण काम कराने पर उठे सवाल
ग्रेटर फरीदाबाद में सीवर सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने नगर निगम, पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। शिकायत में बिना सुरक्षा उपकरण काम कराने और मैनुअल स्कैवेंजिंग पर रोक के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
ग्रेटर फरीदाबाद में सीवर की सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत के बाद हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने मामले में संज्ञान लेते हुए नगर निगम फरीदाबाद के आयुक्त, पुलिस आयुक्त फरीदाबाद, फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उपायुक्त से रिपोर्ट मांगी है।
यह शिकायत संगरूर निवासी कमल आनंद द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिन्होंने इस घटना पर आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने अपनी शिकायत में इस घटना पर प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का भी हवाला दिया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह घटना बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के मैनुअल स्कैवेंजिंग कराने के कारण हुई, जो कि “मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013” तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।HHRC सदस्य दीप भाटिया ने 13 मई को इस मामले की सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों से अगली सुनवाई की तारीख 8 जुलाई से पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
मामले के अनुसार, 2 मई को ग्रेटर फरीदाबाद में पुरी प्रणाम सोसाइटी के सामने सीवर की सफाई के लिए राजेंद्र और सुनील नामक दो मजदूर मैनहोल में उतरे थे। दोनों बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे थे। जब वे घर नहीं लौटे तो परिवार ने 4 मई की सुबह तलाश शुरू की। बाद में उनका साइकिल और मोटरसाइकिल मैनहोल के पास मिला।
दोनों मजदूरों की मौत सीवर में फंसी जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से हुई।
पुलिस ने इस मामले में बीपीटीपी (बिल्डर) के एस्टेट मैनेजर के खिलाफ केस दर्ज किया था।
शिकायतकर्ता कमल आनंद ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरण और मशीनरी के “मौत के जाल” में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कानून का सीधा उल्लंघन है और मजदूरों को ऑक्सीजन मास्क जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते।


