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सीबीआई की एफआईआर में पंजाब विजिलेंस डीजीपी शरद सत्य चौहान का नाम, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
भ्रष्टाचार मामले में दर्ज एफआईआर में डीजीपी के रीडर समेत चार लोगों का जिक्र, शिकायत बंद करवाने के बदले 13 लाख रुपये मांगने का आरोप
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले की एफआईआर में पंजाब के डीजीपी (विजिलेंस) शरद सत्य चौहान का नाम सामने आया है। हालांकि उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन एफआईआर में आरोप है कि शिकायत बंद करवाने के लिए रिश्वत की मांग उनके और उनके रीडर के नाम पर की गई थी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख के रीडर और तीन अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले की एफआईआर में पंजाब के डीजीपी (विजिलेंस) शरद सत्य चौहान का नाम भी शामिल है। इससे आने वाले दिनों में शीर्ष पुलिस अधिकारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
हालांकि चौहान को एफआईआर में आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है, लेकिन सीबीआई के एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज मामले के विवरण में उनका नाम शामिल है।
एजेंसी की 11 मई की सत्यापन रिपोर्ट, जो 8 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद तैयार की गई थी, में कहा गया है कि आरोपी राघव गोयल और विकास गोयल ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपये की मांग की थी। यह रकम पंजाब विजिलेंस के डीजी (विजिलेंस) कार्यालय में लंबित शिकायत को बंद करवाने के बदले मांगी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि यह मांग सार्वजनिक सेवकों — पंजाब डीजी (विजिलेंस) के रीडर ओपी राणा और डीजी (विजिलेंस), पंजाब — की ओर से की गई बताई गई।एफआईआर में आगे कहा गया है:
“8 मई को अबोहर निवासी और राज्य कर अधिकारी अमित कुमार की एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राघव गोयल और उसके पिता विकास गोयल, जो निजी ठेकेदार हैं, पंजाब के डीजी (विजिलेंस) शरद सत्य चौहान और उनके रीडर ओपी राणा की ओर से बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने संबंधित कार्यालय में लंबित शिकायत को बंद/निपटाने के लिए अवैध रिश्वत की मांग की।”
मामले में जिन संभावित अपराधों की जांच की जा रही है, उनमें आपराधिक साजिश, लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ की मांग, तथा भ्रष्ट या अवैध तरीकों या व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए अनुचित लाभ प्राप्त करना शामिल है।

