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CBI ने ₹645 करोड़ बैंक घोटाले में पंचकूला और चंडीगढ़ में की छापेमारी, 5 IAS अफसरों की जांच को मिली मंजूरी
हरियाणा सरकार ने PC Act की धारा 17A के तहत दी अनुमति, ED भी पहले से कर रही जांच
CBI ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े ₹645 करोड़ के कथित घोटाले के मामले में पंचकूला और चंडीगढ़ में छापेमारी की है। हरियाणा सरकार ने इस केस में 5 IAS अधिकारियों की जांच के लिए CBI को मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ₹645 करोड़ के IDFC First Bank और AU Small Finance Bank घोटाले के संबंध में पंचकूला और चंडीगढ़ में छापेमारी की है। CBI के अनुसार, 14 मई को की गई इस कार्रवाई में कुल सात स्थानों पर तलाशी ली गई, जिनमें आवासीय परिसर, ज्वेलर्स के व्यवसायिक प्रतिष्ठान/शोरूम, कथित लाभार्थियों के परिसर और अन्य निजी संस्थान शामिल थे, जो जांच से जुड़े हैं।
इस बीच हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A के तहत CBI को पांच IAS अधिकारियों की भूमिका की जांच की अनुमति दे दी है। इन अधिकारियों में पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, मोहम्मद शायिन, आर.के. सिंह और प्रदीप कुमार शामिल हैं। राज्य सरकार पहले ही इस मामले में सिंह और कुमार को निलंबित कर चुकी है।
धारा 17A के अनुसार, किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।सूत्रों के अनुसार, CBI ने यह अनुमति आरोपियों के बयान के आधार पर मांगी थी और हरियाणा सरकार से संबंधित आदेश हाथ से प्राप्त किए गए।
आरोप है कि इन IAS अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान सरकारी विभागों के बैंक खाते IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में खोले गए थे और इसी अवधि में संदिग्ध लेनदेन हुए।
इसके अलावा CBI ने तीन अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की अनुमति मांगी है।
CBI ने इस मामले में 8 अप्रैल को FIR दर्ज की थी, जबकि इससे पहले राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) ने 23 फरवरी को दर्ज FIR के आधार पर जांच की थी।
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। ED के अनुसार, सरकारी विभागों के धन को फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) में रखा जाना था, लेकिन ये FDR बनाए ही नहीं गए। इसके बजाय फर्जी FDR दिखाकर रकम को विभिन्न शेल कंपनियों और व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
ED के मुताबिक, हरियाणा और चंडीगढ़ के 11 सरकारी विभागों और दो स्कूलों को इस घोटाले में ₹645.59 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसमें हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ₹169.27 करोड़, हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड से ₹50 करोड़, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से ₹10 करोड़, नगर निगम पंचकूला से ₹80 करोड़ और हरियाणा ग्रामीण विकास से ₹48.72 करोड़ की हेराफेरी शामिल है।

