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पालमपुर में पशु औषधि सहायकों के लिए तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम संपन्न
पालमपुर में पशु औषधि सहायकों के लिए तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम संपन्न
सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में पशु औषधि सहायकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय जिलों में वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना था।
Dr GC Negi College of Veterinary and Animal Sciences के पशु रोग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित पशु औषधि सहायकों के लिए तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का समापन गुरुवार को CSK Himachal Pradesh Krishi Vishvavidyalaya, पालमपुर में हुआ।
यह प्रशिक्षण ‘चंबा, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों की अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के माध्यम से सुदृढ़ करना, विशेष रूप से अश्व (घोड़ा) आबादी पर ध्यान केंद्रित करते हुए’ शीर्षक परियोजना के तहत आयोजित किया गया। इस परियोजना को National Research Centre on Equines (हिसार, हरियाणा) द्वारा वित्तपोषित किया गया है।
समापन सत्र की अध्यक्षता कुलपति AK Panda ने की। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस सामाजिक रूप से प्रभावशाली और प्रासंगिक कार्यक्रम के लिए पशु रोग विज्ञान विभाग की सराहना की।
उन्होंने प्रशिक्षण अवधि के दौरान पशु औषधि सहायकों के उत्साह, समर्पण और सक्रिय भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। प्रतिभागियों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया की भी उन्होंने प्रशंसा की और उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अर्जित ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल का प्रभावी ढंग से उपयोग करने का आग्रह किया।
कुलपति पांडा ने पशुओं में दवाओं, विशेषकर एंटीबायोटिक के अंधाधुंध उपयोग से उत्पन्न एंटीबायोटिक प्रतिरोध और अवशिष्ट प्रभावों की समस्या पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए हिमालयी मूल की वनस्पति आधारित औषधियों को बढ़ावा देने की वकालत की, ताकि पशुधन और पोल्ट्री में रोग प्रबंधन को टिकाऊ और सुरक्षित बनाया जा सके।
