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स्कूल में छात्राओं को शारीरिक दंड का मामला, मानवाधिकार आयोग सख्त
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने DC और DEO से मांगी रिपोर्ट, जांच के आदेश
Haryana Human Rights Commission ने जगन गांव के सरकारी स्कूल में छात्राओं को दंड देने के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
Haryana Human Rights Commission ने जगन गांव के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं को शारीरिक दंड देने की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त (DC) से रिपोर्ट मांगी है और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को जांच करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने कहा कि यह मामला उसके संज्ञान में 3 मार्च को आया। आरोप है कि छात्राओं को सजा के तौर पर “उठक-बैठक” करवाई गई और उन्हें स्कूल परिसर में घुमाया गया।
आयोग ने DC से शारीरिक दंड पर प्रतिबंध से संबंधित रिपोर्ट, निरीक्षण/हस्तक्षेप के विवरण, जागरूकता और रोकथाम के उपायों की जानकारी मांगी है।
इसके अलावा, DEO को निर्देश दिया गया है कि वह जांच कर जिम्मेदारी तय करे, छात्र सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दे और सकारात्मक अनुशासन के उपायों की सिफारिश करे।
आयोग ने पुलिस अधीक्षक (SP) को भी पत्र लिखकर पूछा है कि क्या इस मामले में कोई शिकायत या FIR दर्ज की गई है, जांच की स्थिति क्या है और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं।
साथ ही, स्कूल के हेडमास्टर को घटना की रिपोर्ट, शिक्षकों और छात्रों का पक्ष, तत्काल उठाए गए कदम और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की जानकारी देने को कहा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना से जुड़े तीन वीडियो जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजे गए थे, जिसके बाद जांच समिति का गठन किया गया है।
आयोग के अध्यक्ष Justice Lalit Batra और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अनुशासन के नाम पर किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न अस्वीकार्य है।
