पंजाब में नशे के हॉटस्पॉट पर प्रशासन सख्त, 16 अक्टूबर को CM भगवंत मान करेंगे अभियान की समीक्षा

अमृतसर में DC, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा; नशा तस्करों पर कार्रवाई के साथ नशे के आदी लोगों के इलाज और पुनर्वास पर जोर।

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पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए अमृतसर के नशा प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने जांच और बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान 16 अक्टूबर को फिल्लौर में अभियान की समीक्षा करेंगे। इस बीच अधिकारियों ने नशा तस्करी पर कार्रवाई के साथ इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।

पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर प्रशासन ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान 16 अक्टूबर को फिल्लौर में एंटी-ड्रग अभियान की समीक्षा करने वाले हैं। इससे पहले अमृतसर के नशा प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें सक्रिय हो गई हैं।

उपायुक्त से लेकर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) तक के अधिकारी पुलिस अधिकारियों के साथ नशा प्रभावित क्षेत्रों में बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य स्थानीय लोगों से बातचीत करना और नशे की समस्या से निपटने के लिए समन्वित प्रयास करना है।

अब पुलिस के साथ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी मैदान में

पहले नशा प्रभावित इलाकों में लोगों से संपर्क और जागरूकता संबंधी गतिविधियां मुख्य रूप से पुलिस के ऑपरेशन संपर्क के तहत संचालित होती थीं। अब नागरिक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी इसमें शामिल किया गया है।

इस बदलाव को नशे के खिलाफ अभियान को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रखकर इलाज और पुनर्वास पर भी ध्यान देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

अमृतसर के नशा प्रभावित इलाकों में अधिकारियों का दौरा

सोमवार को उपायुक्त दलविंदरजीत सिंह ने अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस और बॉर्डर रेंज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नशा प्रभावित इलाकों का दौरा किया।

इन क्षेत्रों में शहर और अमृतसर ग्रामीण पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाके शामिल थे। सिविल सर्जन डॉ. भारती धवन भी बैठकों में शामिल हुईं।

अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और नशे की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर ध्यान दिया।

नशा तस्करी रोकने के साथ इलाज और पुनर्वास भी जरूरी

वरिष्ठ किसान नेता रतन सिंह रंधावा ने कहा कि जमीनी स्तर पर नशे के आदी लोगों के इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था अब भी चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भागीदारी से उन लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें उपचार की जरूरत है। साथ ही, नशा छोड़ने के बाद उन्हें दोबारा सामान्य जीवन में लौटने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

रंधावा ने यह भी कहा कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने के लिए पुलिस को तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की चुनौती का भी उल्लेख किया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह ने कहा कि केवल बैठकें और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई न दे।

उनके अनुसार, स्थानीय लोग चाहते हैं कि नशा सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएं और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज तथा पुनर्वास की बेहतर सुविधाएं मिलें।

16 अक्टूबर को फिल्लौर में समीक्षा करेंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भगवंत मान 16 अक्टूबर को फिल्लौर में नशा विरोधी अभियान की समीक्षा करेंगे। इससे पहले अमृतसर में प्रशासन की सक्रियता बढ़ने से अभियान के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अधिकारियों की बैठकों के बाद नशा तस्करी पर कार्रवाई, नशे के आदी लोगों के उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

मुख्य बातें

  • मुख्यमंत्री भगवंत मान 16 अक्टूबर को फिल्लौर में नशा विरोधी अभियान की समीक्षा करेंगे।

  • अमृतसर के नशा प्रभावित इलाकों में प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय।

  • उपायुक्त दलविंदरजीत सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्रों का दौरा किया।

  • सिविल सर्जन डॉ. भारती धवन भी बैठकों में शामिल हुईं।

  • किसान नेता ने इलाज और पुनर्वास सुविधाएं मजबूत करने की जरूरत बताई।

  • सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नशा तस्करों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. मुख्यमंत्री भगवंत मान नशा विरोधी अभियान की समीक्षा कब करेंगे?

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री 16 अक्टूबर को फिल्लौर में अभियान की समीक्षा करेंगे।

2. अमृतसर में किन विभागों को अभियान में शामिल किया गया है?

जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से नशा प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं।

3. प्रशासन की बैठकों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

स्थानीय लोगों से संवाद करना, नशे की समस्या की पहचान करना और विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना।

4. नशे की समस्या से निपटने के लिए क्या जरूरी बताया गया है?

नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के साथ इलाज, पुनर्वास और नशा छोड़ने वालों को सहायता उपलब्ध कराना जरूरी बताया गया है।

5. सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुख्य मांग क्या है?

उनका कहना है कि जागरूकता बैठकों के साथ जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई और नशे के आदी लोगों के लिए बेहतर उपचार सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

निष्कर्ष

पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत करने के लिए अमृतसर में प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त प्रयास शुरू किए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि स्थायी परिणाम के लिए नशा तस्करी पर कार्रवाई के साथ इलाज और पुनर्वास पर भी बराबर ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद अभियान की दिशा और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।Screenshot_683

Edited By: Atul Sharma

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