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पंजाब की मंडियों में धान की नमी जांच पर विवाद, किसानों का आरोप- एक ही फसल की रिपोर्ट में बड़ा अंतर
कहीं 22% तो कहीं 16% बताई जा रही धान की नमी! किसानों ने गलत रीडिंग से खरीद में रुकावट और आर्थिक नुकसान का आरोप लगाया, नमी की जांच के लिए एक ही एजेंसी को अधिकार देने की मांग।
पंजाब की अनाज मंडियों में धान की नमी जांच को लेकर किसानों ने सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि अलग-अलग एजेंसियों की मशीनों से एक ही धान की नमी की अलग-अलग रीडिंग मिल रही है। इससे खरीद प्रभावित हो रही है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पंजाब की मंडियों में धान की खरीद के दौरान नमी की जांच को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। किसानों ने आरोप लगाया है कि खरीद एजेंसियों, मंडी बोर्ड के अधिकारियों, आढ़तियों और राइस मिल मालिकों द्वारा अलग-अलग मशीनों से धान की नमी जांचने के कारण एक ही फसल की रिपोर्ट में अंतर आ रहा है।
किसानों के मुताबिक, इस स्थिति से धान की खरीद में देरी, फसल रिजेक्ट होने और भुगतान में कटौती जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की है कि मंडियों में धान की नमी जांचने के लिए एक समान व्यवस्था लागू की जाए।
एक ही धान की नमी 22% और 16% कैसे?
किसानों ने ऐसे मामलों का हवाला दिया है, जिनमें एक मशीन से धान में नमी 22 प्रतिशत बताई गई, जबकि दूसरी मशीन ने उसी धान की नमी 16 प्रतिशत दर्ज की।
केंद्रीय खरीद मानकों के अनुसार, धान को फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) यानी उचित औसत गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरना होता है। सामान्य खरीद के लिए निर्धारित अधिकतम नमी सीमा 17 प्रतिशत है।
ऐसे में यदि एक मशीन निर्धारित सीमा से अधिक नमी दिखाती है और दूसरी सीमा के भीतर, तो किसानों के सामने अपनी फसल बेचने को लेकर असमंजस पैदा हो सकता है।
हालांकि, अलग-अलग मशीनों की रीडिंग में अंतर के कारणों की स्वतंत्र तकनीकी जांच की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
किसानों ने मंडी बोर्ड को ही अधिकार देने की मांग की
भवानीगढ़ के किसान गुरबख्शिश सिंह ने कहा कि नमी की अलग-अलग रीडिंग के कारण किसानों की फसल रिजेक्ट हो जाती है या भुगतान में कटौती की जाती है।
उनकी मांग है कि नमी की जांच करने का अधिकार केवल पंजाब मंडी बोर्ड को दिया जाए, ताकि सभी मंडियों में एक समान प्रक्रिया अपनाई जा सके।
किसानों का कहना है कि यदि अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी मशीनों से जांच करेंगे, तो विवाद की स्थिति बनी रह सकती है।
₹250 प्रति क्विंटल तक कटौती का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया है कि अधिक नमी बताकर कुछ खरीदार धान खरीदने से इनकार कर देते हैं या लगभग ₹250 प्रति क्विंटल तक की कटौती करते हैं।
यदि ऐसा होता है, तो किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, यह कटौती कितने मामलों में की गई है और इसके समर्थन में कितने आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी खबर में नहीं दी गई है।
नमी की सीमा 17% से बढ़ाकर 20% करने की मांग
लुधियाना के किसान तेजवंत सिंह बेनीपाल ने धान में नमी की निर्धारित सीमा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की है।
उनका कहना है कि बेमौसम बारिश, कोहरा और कटाई में देरी जैसी परिस्थितियों में किसानों को ज्यादा नमी वाली फसल मंडियों में लानी पड़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर से काटे गए ताजे धान में नमी का स्तर अधिक हो सकता है। कई किसानों के पास फसल को मंडी में लाने से पहले पर्याप्त रूप से सुखाने की व्यवस्था भी नहीं होती।
किसानों की मांग है कि मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नमी सीमा पर दोबारा विचार किया जाए।
धान खरीद में पारदर्शिता क्यों जरूरी?
धान की खरीद में नमी की जांच एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, क्योंकि इससे फसल की गुणवत्ता और खरीद के मानकों का निर्धारण होता है। यदि अलग-अलग मशीनों से अलग परिणाम मिलते हैं, तो किसानों और खरीद एजेंसियों के बीच विवाद बढ़ सकता है।
किसानों की प्रमुख मांगें हैं:
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नमी जांचने के लिए एक समान प्रक्रिया लागू हो।
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मशीनों की सटीकता और कैलिब्रेशन सुनिश्चित किया जाए।
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विवाद की स्थिति में दोबारा जांच की व्यवस्था हो।
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नमी के आधार पर की जाने वाली कटौती पारदर्शी हो।
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खराब मौसम और कटाई में देरी जैसी परिस्थितियों पर विचार किया जाए।
Key Highlights
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पंजाब की मंडियों में धान की नमी जांच को लेकर किसानों ने सवाल उठाए।
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किसानों का दावा है कि एक ही धान की नमी 22% और 16% तक दर्ज की गई।
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सामान्य खरीद मानकों के अनुसार अधिकतम नमी सीमा 17% है।
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किसानों ने लगभग ₹250 प्रति क्विंटल तक कटौती किए जाने का आरोप लगाया।
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पंजाब मंडी बोर्ड को नमी जांच का एकमात्र अधिकार देने की मांग।
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नमी की सीमा 17% से बढ़ाकर 20% करने की मांग भी उठी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. पंजाब में धान की नमी को लेकर विवाद क्यों है?
किसानों का आरोप है कि अलग-अलग एजेंसियों की मशीनें एक ही धान की अलग-अलग नमी रीडिंग दे रही हैं, जिससे खरीद में परेशानी हो रही है।
2. धान में नमी की निर्धारित सीमा कितनी है?
सामान्य केंद्रीय खरीद मानकों के अनुसार, FAQ गुणवत्ता वाले धान में अधिकतम नमी सीमा 17 प्रतिशत है।
3. किसानों ने क्या मांग की है?
किसानों ने एक समान जांच व्यवस्था, मशीनों की सटीकता सुनिश्चित करने और नमी जांच के लिए पंजाब मंडी बोर्ड को अधिकार देने की मांग की है।
4. क्या किसानों ने नमी की सीमा बढ़ाने की मांग की है?
हां। किसान नेता तेजवंत सिंह बेनीपाल ने इसे 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की है।
5. क्या ₹250 प्रति क्विंटल की कटौती आधिकारिक रूप से प्रमाणित है?
उपलब्ध खबर में यह किसानों का आरोप है। इसकी व्यापकता और आधिकारिक पुष्टि के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है।
निष्कर्ष
पंजाब की मंडियों में धान की नमी जांच को लेकर उठे सवालों ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता की जरूरत को सामने रखा है। किसानों की मांग है कि जांच के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं, मशीनों की सटीकता सुनिश्चित हो और विवाद होने पर दोबारा जांच की सुविधा मिले। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं।


