पंजाब में 5,700 KM लिंक सड़कों को लेकर विवाद तेज, PWD इंजीनियरों ने CM से लगाई गुहार

10 मार्केट कमेटियों को पंजाब मंडी बोर्ड के अधीन करने के फैसले पर उठे सवाल, PWD इंजीनियरों ने सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की जताई आशंका।

On

पंजाब में 5,700 किलोमीटर लिंक सड़कों के प्रबंधन को लेकर PWD और पंजाब मंडी बोर्ड के बीच विवाद गहरा गया है। PWD इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर 10 मार्केट कमेटियों का अधिकार मंडी बोर्ड को सौंपने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

पंजाब में करीब 5,700 किलोमीटर लिंक सड़कों के नियंत्रण को लेकर विवाद तेज हो गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की मांग करते हुए 10 मार्केट कमेटियों का अधिकार पंजाब मंडी बोर्ड को हस्तांतरित करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

इंजीनियरों का कहना है कि इस कदम से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। एसोसिएशन ने दावा किया है कि मंडी बोर्ड द्वारा टेंडर अपेक्षाकृत ऊंची दरों पर दिए जाते हैं, जबकि PWD के पास सड़क निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए पहले से तकनीकी कर्मचारी और जरूरी ढांचा मौजूद है।

किन मार्केट कमेटियों का अधिकार मंडी बोर्ड को सौंपा गया?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार ने निम्नलिखित स्थानों की मार्केट कमेटियों का अधिकार पंजाब मंडी बोर्ड को हस्तांतरित किया है:

  • फगवाड़ा

  • होशियारपुर

  • आनंदपुर साहिब

  • चरनथल

  • सरहिंद

  • अमलोह क्षेत्र के पास अहमदगढ़

  • कलानौर

  • गोनियाना

  • भूच्चो

नोट: खबर में 10 मार्केट कमेटियों का उल्लेख है, लेकिन उपलब्ध सूची में नौ स्थानों के नाम दिए गए हैं।

PWD इंजीनियरों ने फैसले पर क्यों उठाए सवाल?

PWD इंजीनियरों की एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री कार्यालय को दिए प्रतिनिधित्व में कहा कि विभाग के पास सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए पहले से तकनीकी विशेषज्ञ, फील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े स्थापित सिस्टम हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, अधिकारों का हस्तांतरण होने से प्रशासनिक व्यवस्था दोहराई जा सकती है। इससे एक तरफ नए प्रशासनिक ढांचे की जरूरत पड़ सकती है, वहीं दूसरी तरफ PWD को अपने मौजूदा ठेकों और जिम्मेदारियों को भी पूरा करना होगा।

इंजीनियरों ने टेंडर दरों को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि, मंडी बोर्ड और PWD की वास्तविक टेंडर दरों की तुलनात्मक जानकारी उपलब्ध खबर में नहीं दी गई है।

50:50 बंटवारे के नियम पर भी सवाल

एसोसिएशन ने दावा किया कि संबंधित शीर्ष समिति ने लिंक सड़कों के कार्यों को PWD और मंडी बोर्ड के बीच लगभग 50:50 अनुपात में बांटने का निर्णय लिया था।

इंजीनियरों ने सवाल उठाया कि शीर्ष समिति की मंजूरी के बिना इस तरह का हस्तांतरण क्यों किया गया। उनका कहना है कि प्रस्तावित बदलाव से PWD के हिस्से में आने वाले लगभग 5,700 किलोमीटर लिंक रोड का काम प्रभावित हो सकता है।

कर्मचारियों और सरकारी खर्च पर क्या पड़ेगा असर?

एसोसिएशन के मुताबिक, सड़कों के हस्तांतरण से PWD के काम का दायरा कम हो सकता है, जिससे कुछ डिवीजनों और वहां तैनात कर्मचारियों का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा।

इससे संबंधित कर्मचारियों का अनुमानित विवरण:

  • लगभग 5 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर

  • 12 सब-डिविजनल इंजीनियर

  • 43 जूनियर इंजीनियर

  • करीब 100 क्लेरिकल कर्मचारी

  • अन्य सहायक कर्मचारी

एसोसिएशन ने इन पदों से जुड़े वार्षिक वेतन खर्च का अनुमान लगभग ₹14.40 करोड़ बताया है।

सरकारी खजाने पर बढ़ सकता है बोझ

PWD इंजीनियरों का तर्क है कि जब विभाग के पास पहले से कर्मचारी, तकनीकी संसाधन और सड़क रखरखाव की व्यवस्था मौजूद है, तो जिम्मेदारियों को दूसरे विभाग में स्थानांतरित करने से अतिरिक्त खर्च और प्रशासनिक दोहराव की आशंका पैदा हो सकती है।

हालांकि, सरकार का अंतिम पक्ष, हस्तांतरण के पीछे विस्तृत कारण और इससे होने वाली वास्तविक बचत या अतिरिक्त खर्च का आधिकारिक आकलन उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

Key Highlights

  • पंजाब में 5,700 किलोमीटर लिंक सड़कों के नियंत्रण को लेकर विवाद।

  • PWD इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की मांग की।

  • 10 मार्केट कमेटियों को मंडी बोर्ड के अधीन करने पर सवाल।

  • टेंडर दरों और अतिरिक्त प्रशासनिक खर्च को लेकर चिंता।

  • संबंधित कर्मचारियों के वार्षिक वेतन खर्च का अनुमान ₹14.40 करोड़।

  • PWD इंजीनियरों ने शीर्ष समिति के 50:50 बंटवारे के फैसले का हवाला दिया।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. पंजाब में लिंक सड़कों को लेकर विवाद क्यों है?

PWD इंजीनियरों को आशंका है कि लिंक सड़कों का अधिकार मंडी बोर्ड को देने से खर्च बढ़ सकता है और रखरखाव की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

2. कितनी सड़कों का हस्तांतरण प्रस्तावित है?

खबर के अनुसार, करीब 5,700 किलोमीटर लिंक सड़कों के प्रबंधन को लेकर विवाद है।

3. PWD इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की है?

उन्होंने हस्तांतरण के फैसले में हस्तक्षेप करने और इसके वित्तीय तथा प्रशासनिक प्रभावों की समीक्षा करने की मांग की है।

4. इस फैसले से कितना वेतन खर्च जुड़ा है?

एसोसिएशन के अनुमान के अनुसार, संबंधित पदों का वार्षिक वेतन खर्च लगभग ₹14.40 करोड़ है।

5. क्या सरकार ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा है?

उपलब्ध जानकारी में सरकार का विस्तृत आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है।

निष्कर्ष

पंजाब में लिंक सड़कों के प्रबंधन को लेकर PWD इंजीनियरों और मंडी बोर्ड के बीच विवाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। इंजीनियरों ने वित्तीय खर्च, प्रशासनिक दोहराव और कर्मचारियों के उपयोग से जुड़े सवाल उठाए हैं। अब इस मामले में सरकार का रुख और हस्तांतरण के फैसले की समीक्षा अहम होगी।

Screenshot_679
Edited By: Atul Sharma

खबरें और भी हैं

पंजाब: ‘मेरा घर, मेरा मान’ योजना के तहत 91 परिवारों को मिले मालिकाना हक के कार्ड

Advertisement

नवीनतम

पंजाब: ‘मेरा घर, मेरा मान’ योजना के तहत 91 परिवारों को मिले मालिकाना हक के कार्ड पंजाब: ‘मेरा घर, मेरा मान’ योजना के तहत 91 परिवारों को मिले मालिकाना हक के कार्ड
पंजाब सरकार की ‘मेरा घर, मेरा मान’ योजना के तहत कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने अमृतसर के मेहणियां ब्राह्मणा...
झोटा हत्याकांड पर BJP का प्रदर्शन, CM भगवंत मान का पुतला फूंका; CBI जांच की मांग
पंजाब में नशे के हॉटस्पॉट पर प्रशासन सख्त, 16 अक्टूबर को CM भगवंत मान करेंगे अभियान की समीक्षा
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के विरोध में GNDU में छात्रों का प्रदर्शन, 15 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी बंद
पंजाब में ज्वेलर पर हथियारबंद बदमाशों का हमला, ₹7 लाख तक की नकदी और सोना लूटकर फरार
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software