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अमृतसर GMC ने रचा मेडिकल इतिहास, 2 किलो के नवजात की फेफड़े की जटिल सर्जरी सफल
दुर्लभ जन्मजात बीमारियों से पीड़ित नवजात का सफल ऑपरेशन, डॉक्टरों की टीम ने बचाई मासूम की जान
अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) ने एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हासिल करते हुए दुर्लभ जन्मजात विकारों से पीड़ित 2 किलो वजन के नवजात की जटिल फेफड़े की सर्जरी सफलतापूर्वक की। ऑपरेशन के बाद बच्चा स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है।
GMC अमृतसर की बड़ी उपलब्धि, नवजात की जटिल सर्जरी सफल
अमृतसर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। यहां डॉक्टरों की टीम ने कई दुर्लभ जन्मजात बीमारियों से पीड़ित एक नवजात शिशु की जटिल फेफड़े की सर्जरी सफलतापूर्वक कर उसकी जान बचाई।
सिर्फ 2 किलोग्राम वजन वाले इस नवजात की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया।
गर्भावस्था के दौरान ही सामने आई थी गंभीर बीमारी
डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान नियमित अल्ट्रासाउंड जांच में बच्चे में Congenital Pulmonary Airway Malformation (CPAM) नामक दुर्लभ फेफड़े की बीमारी का पता चला था।यह एक जन्मजात विकार है, जिसमें फेफड़ों का विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता और सांस लेने में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
नवजात को थीं तीन दुर्लभ चिकित्सीय समस्याएं
इस मामले को और अधिक जटिल बनाने वाली बात यह थी कि बच्चे को केवल CPAM ही नहीं, बल्कि दो अन्य दुर्लभ जन्मजात स्थितियां भी थीं।
बच्चे में पाई गईं ये दुर्लभ बीमारियां
1. Congenital Pulmonary Airway Malformation (CPAM)
फेफड़ों से जुड़ी दुर्लभ जन्मजात विकृति।
2. Dextrocardia
इस स्थिति में हृदय सामान्य स्थान की बजाय छाती के दाहिने हिस्से में होता है।
3. Situs Inversus Totalis
इसमें शरीर के आंतरिक अंग सामान्य स्थिति के उलट यानी मिरर इमेज व्यवस्था में मौजूद होते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, इन तीनों स्थितियों का एक साथ पाया जाना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
नवजात के फेफड़े का हिस्सा हटाकर की गई सर्जरी
बच्चे की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने प्रमुख थोरैसिक (छाती) सर्जरी करने का निर्णय लिया।
सर्जरी के दौरान नवजात के दाहिने फेफड़े के मध्य भाग (मिडिल लोब) को सफलतापूर्वक हटाया गया। यह ऑपरेशन बेहद जटिल था क्योंकि बच्चे का वजन केवल 2 किलो था और उसके शरीर की आंतरिक संरचना सामान्य से अलग थी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को बाल शल्य चिकित्सा विभाग की प्रमुख और सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरिष्टा के. राणा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
ऑपरेशन में शामिल प्रमुख डॉक्टर
- डॉ. सुरिष्टा के. राणा (हेड, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग)
- डॉ. अक्ष रारा (जूनियर रेजिडेंट)
- डॉ. वीना चतरथ (हेड, एनेस्थीसिया विभाग)
- एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक्स और ऑपरेशन थिएटर की विशेषज्ञ टीम
डॉक्टरों ने समन्वित प्रयासों के जरिए ऑपरेशन को सफल बनाया।
10 दिन इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर पहुंचा बच्चा
सर्जरी के बाद नवजात को अस्पताल में विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया। लगभग 10 दिनों तक इलाज और देखभाल के बाद बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, डिस्चार्ज होने के बाद भी बच्चा पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर है तथा पिछले तीन दिनों से घर पर सामान्य स्थिति में है।
समय पर जांच और निदान बना सफलता की कुंजी
डॉक्टरों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान बीमारी का समय रहते पता चलना इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण कारण रहा।
समय पर जांच के फायदे
- बीमारी की शुरुआती पहचान
- जन्म के बाद उपचार की पूर्व तैयारी
- सर्जरी की सटीक योजना
- जटिलताओं को कम करने में मदद
विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने की सलाह भी दी।
Key Highlights:
- GMC अमृतसर में नवजात की जटिल फेफड़े की सर्जरी सफल।
- बच्चे को CPAM, Dextrocardia और Situs Inversus Totalis जैसी दुर्लभ बीमारियां थीं।
- 2 किलो वजन वाले नवजात का सफल ऑपरेशन किया गया।
- दाहिने फेफड़े का मिडिल लोब हटाया गया।
- 10 दिन उपचार के बाद बच्चा स्वस्थ होकर घर पहुंचा।
- डॉक्टरों ने समय पर जांच और निदान को सफलता का प्रमुख कारण बताया।
FAQ Section:
Q1. बच्चे को कौन सी बीमारी थी?
A. बच्चे को Congenital Pulmonary Airway Malformation (CPAM) नामक दुर्लभ फेफड़े की बीमारी थी।
Q2. Dextrocardia क्या है?
A. यह एक जन्मजात स्थिति है जिसमें हृदय छाती के दाहिने हिस्से में स्थित होता है।
Q3. Situs Inversus Totalis क्या होता है?
A. इसमें शरीर के आंतरिक अंग सामान्य स्थिति के विपरीत मिरर इमेज व्यवस्था में होते हैं।
Q4. सर्जरी कहां की गई?
A. यह सर्जरी अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में की गई।
Q5. सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति कैसी है?
A. बच्चा स्वस्थ है और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर सामान्य स्थिति में है।
Conclusion:
GMC अमृतसर की यह सफलता आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कुशलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। कई दुर्लभ जन्मजात विकारों से जूझ रहे 2 किलो वजन के नवजात की सफल सर्जरी न केवल एक चिकित्सा उपलब्धि है, बल्कि यह समय पर निदान और समन्वित उपचार की महत्ता को भी दर्शाती है। यह उपलब्धि भविष्य में ऐसे जटिल मामलों के उपचार के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकती है।


