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लिंग जांच के अवैध नेटवर्क पर सख्ती, हरियाणा ने यूपी सरकार से मांगा प्रशासनिक और पुलिस सहयोग
सीमावर्ती जिलों में छापेमारी के दौरान सहयोग बढ़ाने की अपील, 2024 से 2026 के बीच यूपी में 37 रेड कर चुका है हरियाणा
हरियाणा सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया है कि सीमावर्ती जिलों में अवैध लिंग जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हरियाणा की टीमों को प्रशासनिक और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाए। यह कदम भ्रूण लिंग जांच जैसी गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अवैध लिंग जांच के खिलाफ हरियाणा की सख्त कार्रवाई
हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) सुमिता मिश्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार से सीमावर्ती जिलों में अवैध लिंग जांच गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सहयोग बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण संरक्षण और बेटियों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बेहद आवश्यक है।
इस संबंध में सुमिता मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) अमित कुमार घोष को पत्र लिखा है।
यूपी के जिलाधिकारियों और स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश देने की मांग
अपने पत्र में हरियाणा की ACS-स्वास्थ्य ने अनुरोध किया कि यूपी सरकार सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को आवश्यक निर्देश जारी करे।हरियाणा की प्रमुख मांगें
- छापेमारी के दौरान प्रशासनिक सहयोग
- आवश्यकता पड़ने पर तत्काल पुलिस सहायता
- जिला स्तर पर बेहतर समन्वय
- अवैध लिंग जांच केंद्रों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई
- कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर सहयोग मिलने से कार्रवाई अधिक प्रभावी और सफल हो सकती है।
2024 से 2026 के बीच यूपी में 37 छापेमारी
सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा की PC-PNDT (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) टीमें लगातार अवैध लिंग जांच और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।
कार्रवाई से जुड़े आंकड़े
- अवधि: जनवरी 2024 से मार्च 2026
- उत्तर प्रदेश में की गई छापेमारी: 37
- उद्देश्य: अवैध भ्रूण लिंग जांच गतिविधियों पर रोक
इन अभियानों के तहत डिकॉय ऑपरेशन और विशेष रेड आयोजित की गईं, जिनमें कई संदिग्ध गतिविधियों की जांच की गई।
कन्या भ्रूण संरक्षण के लिए राज्यों के बीच समन्वय जरूरी
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि भ्रूण लिंग जांच जैसी गैरकानूनी गतिविधियां अक्सर राज्य सीमाओं से जुड़े क्षेत्रों में संचालित होती हैं। ऐसे में प्रभावी कार्रवाई के लिए अंतरराज्यीय सहयोग महत्वपूर्ण हो जाता है।
सुमिता मिश्रा ने कहा कि बेटियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।
यूपी प्रशासन के सहयोग की सराहना भी की
अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों के प्रशासन ने पहले भी हरियाणा की टीमों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस सहयोग को और अधिक संस्थागत और व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता है ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
PCPNDT कानून के तहत जारी है अभियान
हरियाणा सरकार लंबे समय से PCPNDT अधिनियम के तहत अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चला रही है।
विशेष टीमें लगातार निगरानी, जांच और छापेमारी के माध्यम से ऐसे नेटवर्क का पता लगाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने में जुटी हैं।
Key Highlights:
- हरियाणा ने यूपी सरकार से प्रशासनिक और पुलिस सहयोग मांगा।
- सीमावर्ती जिलों में अवैध लिंग जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई तेज।
- जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक यूपी में 37 छापेमारी की गई।
- PC-PNDT टीमों द्वारा डिकॉय ऑपरेशन और रेड जारी।
- कन्या भ्रूण संरक्षण के लिए अंतरराज्यीय समन्वय पर जोर।
- जिलाधिकारियों और CMO को निर्देश जारी करने का अनुरोध।
FAQ Section:
Q1. हरियाणा सरकार ने यूपी सरकार से क्या अनुरोध किया है?
A. अवैध लिंग जांच केंद्रों पर छापेमारी के दौरान प्रशासनिक और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
Q2. यह अनुरोध किसने किया है?
A. हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) सुमिता मिश्रा ने।
Q3. हरियाणा की टीमों ने यूपी में कितनी छापेमारी की है?
A. जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच 37 छापेमारी की गई हैं।
Q4. कार्रवाई किस कानून के तहत की जा रही है?
A. PCPNDT (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) अधिनियम के तहत।
Q5. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. अवैध भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना।
Conclusion:
हरियाणा सरकार का यह कदम अवैध लिंग जांच नेटवर्क के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक और पुलिस सहयोग बढ़ने से ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

