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होशियारपुर में 6.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, ‘नानक बगीची’ के तहत विकसित होंगे 60 मियावाकी वन
वन विभाग ने हरियाली बढ़ाने के लिए शुरू किया विशेष अभियान, मात्र 2 रुपये में मिलेंगे पौधे
होशियारपुर वन मंडल ने इस वर्ष 6.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिले में ‘नानक बगीची’ योजना के तहत 60 मियावाकी वन विकसित किए जाएंगे, जबकि एक स्मृति वन (मेमोरियल फॉरेस्ट) बनाने की भी तैयारी चल रही है।
होशियारपुर में हरियाली बढ़ाने के लिए बड़ा अभियान
पंजाब के होशियारपुर जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग ने व्यापक पौधारोपण अभियान शुरू किया है। इस वर्ष विभाग ने जिले में 6.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है।
वन महोत्सव कार्यक्रम के दौरान होशियारपुर के मंडल वन अधिकारी (DFO) धर्मवीर ढेरू ने इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी और लोगों से मानसून के मौसम का अधिकतम लाभ उठाकर पौधारोपण करने की अपील की।
‘नानक बगीची’ योजना के तहत विकसित होंगे 60 मियावाकी वन
वन विभाग जिले में ‘नानक बगीची’ नाम से 60 मियावाकी वन विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा एक स्मृति वन (Memorial Forest) स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है।क्या है मियावाकी वन तकनीक?
मियावाकी तकनीक एक जापानी पद्धति है, जिसके तहत छोटे क्षेत्र में घने और तेजी से विकसित होने वाले जंगल तैयार किए जाते हैं।
इस तकनीक के लाभ:
- कम जगह में अधिक पेड़
- तेजी से विकसित होने वाले वन
- जैव विविधता को बढ़ावा
- वायु गुणवत्ता में सुधार
- पर्यावरण संरक्षण को मजबूती
30 लाख पौधे तैयार, संस्थाओं और लोगों को मिलेंगे पौधे
DFO धर्मवीर ढेरू ने बताया कि वन विभाग की नर्सरियों में लगभग 30 लाख पौधे तैयार किए गए हैं।
इन पौधों को निम्न वर्गों को उपलब्ध कराया जाएगा:
- सामाजिक संस्थाएं
- शैक्षणिक संस्थान
- पर्यावरण संरक्षण समूह
- स्वयंसेवी संगठन
- प्रकृति प्रेमी और आम नागरिक
इच्छुक व्यक्ति और संगठन वन विभाग के कार्यालयों से संपर्क कर पौधे प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा सरकारी वेबसाइट के माध्यम से भी पौधों की मांग दर्ज कराई जा सकती है।
मात्र 2 रुपये में मिलेगा पौधा
अधिक से अधिक लोगों को पौधारोपण अभियान से जोड़ने के लिए सरकार ने पौधों की कीमत में भी कमी की है।
नई कीमत
- प्रति पौधा केवल 2 रुपये
वन विभाग का मानना है कि कम कीमत होने से अधिक लोग पौधे खरीदेंगे और हरियाली बढ़ाने के अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल भी जरूरी
DFO धर्मवीर ढेरू ने कहा कि पौधारोपण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने लोगों से पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की ताकि लगाए गए पौधे बड़े होकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।
पौधों की देखभाल के लिए सुझाव
- नियमित सिंचाई करें
- पशुओं से सुरक्षा सुनिश्चित करें
- समय-समय पर खाद डालें
- पौधों के आसपास सफाई रखें
- शुरुआती वर्षों में विशेष निगरानी करें
पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी पर जोर
वन विभाग का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण आवश्यक है।
मानसून का मौसम पौधारोपण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है और इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आम लोगों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है।
Key Highlights:
- होशियारपुर में 6.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य।
- ‘नानक बगीची’ के तहत 60 मियावाकी वन विकसित होंगे।
- जिले में एक स्मृति वन बनाने की भी योजना।
- वन विभाग ने 30 लाख पौधे तैयार किए।
- पौधे मात्र 2 रुपये प्रति पौधा की दर से उपलब्ध होंगे।
- सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों को पौधारोपण अभियान से जोड़ा जाएगा।
- मानसून के दौरान अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील।
FAQ Section:
Q1. होशियारपुर में इस वर्ष कितने पौधे लगाने का लक्ष्य है?
A. वन विभाग ने 6.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
Q2. ‘नानक बगीची’ योजना के तहत क्या किया जाएगा?
A. जिले में 60 मियावाकी वन विकसित किए जाएंगे।
Q3. वन विभाग ने कितने पौधे तैयार किए हैं?
A. विभाग की नर्सरियों में लगभग 30 लाख पौधे तैयार किए गए हैं।
Q4. एक पौधे की कीमत कितनी रखी गई है?
A. सरकार ने पौधे की कीमत घटाकर मात्र 2 रुपये कर दी है।
Q5. पौधे कहां से प्राप्त किए जा सकते हैं?
A. वन विभाग के कार्यालयों और सरकारी वेबसाइट के माध्यम से पौधों की मांग की जा सकती है।
Conclusion:
होशियारपुर वन विभाग का 6.5 लाख पौधारोपण अभियान और ‘नानक बगीची’ के तहत 60 मियावाकी वन विकसित करने की योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कम कीमत पर पौधों की उपलब्धता और जनभागीदारी पर जोर इस अभियान को और प्रभावी बना सकता है। यदि पौधारोपण के साथ उनकी उचित देखभाल भी की जाए, तो यह पहल जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।

