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धान रोपाई सीजन ने बढ़ाई मजदूरों की आमद, यूपी-बिहार से पंजाब पहुंचे हजारों प्रवासी श्रमिक
लुधियाना समेत पंजाब के विभिन्न जिलों में धान की रोपाई के लिए बढ़ी श्रमिकों की मांग, बेहतर कमाई की उम्मीद में पहुंचे मजदूर
पंजाब में धान रोपाई सीजन शुरू होते ही उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर लुधियाना और अन्य जिलों में पहुंचने लगे हैं। श्रमिकों का कहना है कि पंजाब में दो महीने का काम उन्हें अपने गृह राज्यों की तुलना में कहीं अधिक आय प्रदान करता है।
धान रोपाई सीजन के साथ पंजाब में बढ़ी प्रवासी मजदूरों की आमद
पंजाब में धान की रोपाई का सीजन रफ्तार पकड़ते ही उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर राज्य में पहुंचने लगे हैं। लुधियाना सहित कई जिलों में खेतों में काम करने के लिए श्रमिकों की मांग बढ़ गई है, जिसके चलते हर साल की तरह इस बार भी हजारों मजदूर पंजाब का रुख कर रहे हैं।
ये श्रमिक अगले दो महीनों तक विभिन्न गांवों में धान रोपाई और सिंचाई जैसे कृषि कार्यों में जुटे रहेंगे।
बेहतर मजदूरी के लिए पंजाब आते हैं श्रमिक
बिहार से आए 52 वर्षीय मजदूर दिनेश राय ने बताया कि वे करीब एक सप्ताह पहले लुधियाना पहुंचे हैं। एक ठेकेदार के कहने पर वे अपने साथ 22 अन्य मजदूरों को भी लेकर आए हैं।दिनेश राय के अनुसार, पंजाब का धान रोपाई सीजन साल के सबसे अधिक कमाई वाले अवसरों में से एक होता है।
उन्होंने कहा, "पंजाब में दो महीने काम करके जितनी आय हो जाती है, उतनी कमाई अपने गांव में करने में काफी अधिक समय लग जाता है।"
गांव-गांव जाकर करते हैं धान रोपाई का काम
प्रवासी श्रमिकों के अनुसार, पंजाब के किसान उन्हें खेतों में काम करने के लिए बुलाते हैं। धान रोपाई का कार्य अलग-अलग जिलों में अलग समय पर होता है, इसलिए मजदूर लगातार एक गांव से दूसरे गांव और एक जिले से दूसरे जिले में जाकर काम करते हैं।
मजदूरों के प्रमुख कार्य
- धान की रोपाई
- खेतों की सिंचाई
- कृषि संबंधी अन्य मौसमी कार्य
- खेतों की देखरेख
इस दौरान श्रमिकों को लगातार रोजगार मिलता रहता है।
प्रति एकड़ 4,500 रुपये तक मिल रही मजदूरी
मजदूरों ने बताया कि धान रोपाई के लिए उन्हें औसतन 4,500 रुपये प्रति एकड़ तक भुगतान किया जाता है।
लुधियाना के निकट ऐताना गांव में कार्यरत मजदूर विशाल यादव ने बताया कि उनकी 22 सदस्यों वाली टीम अगले एक महीने में करीब 150 एकड़ भूमि पर धान की रोपाई करेगी।
उन्होंने कहा कि पूरे सीजन के दौरान अच्छी आय होने की उम्मीद है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी
धान रोपाई के कार्य में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिला श्रमिक भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
पंजाब के कई गांवों में प्रवासी महिलाओं के साथ-साथ स्थानीय पंजाबी महिलाएं भी खेतों में काम करती दिखाई दे रही हैं। इससे कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिल रही है।
किसानों के लिए प्रवासी मजदूर बने सहारा
लुधियाना के जौधां गांव निवासी तरसेम सिंह जौधां का कहना है कि पंजाब में हर वर्ष कृषि सीजन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि कई बड़े किसान स्थायी रूप से भी प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देते हैं और उन्हें गांवों में रहने की सुविधा तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।
जब धान रोपाई जैसे व्यस्त कृषि सीजन आते हैं, तब यही श्रमिक अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी पंजाब बुला लेते हैं, जिससे श्रमिकों की बढ़ती जरूरत पूरी हो जाती है।
पंजाब की कृषि व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं प्रवासी श्रमिक
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की कृषि व्यवस्था में प्रवासी श्रमिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। धान और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के सीजन में श्रमिकों की उपलब्धता खेती के कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद करती है।
इन श्रमिकों की मेहनत से न केवल किसानों को राहत मिलती है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
Key Highlights:
- धान रोपाई सीजन के लिए यूपी और बिहार से पंजाब पहुंचे प्रवासी मजदूर।
- लुधियाना समेत कई जिलों में बढ़ी कृषि श्रमिकों की मांग।
- मजदूरों को औसतन 4,500 रुपये प्रति एकड़ तक मजदूरी मिल रही है।
- 22 मजदूरों की टीम 150 एकड़ भूमि पर धान रोपेगी।
- महिला श्रमिक भी कृषि कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।
- किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए प्रवासी मजदूर अहम सहारा बने हुए हैं।
FAQ Section:
Q1. पंजाब में प्रवासी मजदूर किस काम के लिए पहुंचे हैं?
A. वे मुख्य रूप से धान की रोपाई और कृषि से जुड़े अन्य मौसमी कार्यों के लिए पहुंचे हैं।
Q2. ये मजदूर किन राज्यों से आते हैं?
A. अधिकांश मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार से आते हैं।
Q3. धान रोपाई के लिए कितनी मजदूरी मिलती है?
A. मजदूरों के अनुसार, उन्हें लगभग 4,500 रुपये प्रति एकड़ तक भुगतान किया जाता है।
Q4. क्या महिलाएं भी इस कार्य में शामिल हैं?
A. हां, प्रवासी और स्थानीय दोनों महिला श्रमिक धान रोपाई के कार्य में हिस्सा लेती हैं।
Q5. किसानों को प्रवासी मजदूरों से क्या लाभ होता है?
A. प्रवासी मजदूर कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद करते हैं और श्रमिकों की कमी को दूर करते हैं।
Conclusion:
पंजाब में धान रोपाई सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले प्रवासी मजदूर राज्य की कृषि व्यवस्था की रीढ़ साबित होते हैं। बेहतर मजदूरी और रोजगार के अवसर उन्हें पंजाब की ओर आकर्षित करते हैं, जबकि किसानों को समय पर खेती कार्य पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है। यह मौसमी श्रमिक व्यवस्था पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाती है।

