- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- हिमाचल के एंट्री टोल बैरियर को लेकर फिर भड़का विवाद, संघर्ष समिति ने आंदोलन शुरू करने का किया ऐलान
हिमाचल के एंट्री टोल बैरियर को लेकर फिर भड़का विवाद, संघर्ष समिति ने आंदोलन शुरू करने का किया ऐलान
केंद्र सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप, 96 पन्नों का ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव पारित करने और प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने की मांग उठाई।
हिमाचल प्रदेश में एंट्री टोल बैरियर का विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन दोबारा शुरू करने का आह्वान किया है। समिति के कानूनी सदस्य उत्तांश मोंगा ने 96 पन्नों का ज्ञापन सौंपकर विवादित टोल बैरियर हटाने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश में दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगाए जाने वाले एंट्री टोल बैरियर को लेकर विवाद एक बार फिर गहराने लगा है। पंजाब और हिमाचल के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार पर लगातार शिकायतों और मांगों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन दोबारा शुरू करने की तैयारी की है।
समिति का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए विवादित एंट्री टोल बैरियर के कारण आम यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों, किसानों और धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एंट्री टोल बैरियर के खिलाफ फिर आंदोलन की तैयारी
संघर्ष समिति के कानूनी सदस्य उत्तांश मोंगा ने इस मामले में 96 पन्नों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसमें केंद्र सरकार से विवादित एंट्री टोल बैरियर के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और इन्हें हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित करने के साथ-साथ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने की मांग भी शामिल है।
समिति का आरोप है कि केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें भेजने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 का दिया हवाला
उत्तांश मोंगा ने अपने ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 का उल्लेख किया है।
उनका तर्क है कि इन संवैधानिक प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार राज्य सरकारों को संसदीय कानूनों के पालन के लिए आवश्यक निर्देश दे सकती है। इसके अलावा केंद्र के कार्यकारी अधिकारों और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े मामलों में राज्यों की भूमिका को लेकर भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
मोंगा ने मांग की है कि केंद्र सरकार इन संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार को विवादित टोल बैरियर बंद करने और हटाने के निर्देश दे।
नितिन गडकरी समेत कई केंद्रीय अधिकारियों को भेजे गए 24 पत्र
ज्ञापन में 13 अगस्त से 29 अक्टूबर के बीच केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को भेजे गए 24 पत्रों और शिकायतों का उल्लेख किया गया है।
इनमें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा के अलावा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों तथा प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के अधिकारियों को भेजे गए पत्र शामिल हैं।
उत्तांश मोंगा ने आरोप लगाया कि लगातार अपील और ज्ञापन देने के बावजूद विवादित टोल बैरियर हटाने के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि अब संघर्ष समिति और अन्य जन संगठनों को मिलकर इस मुद्दे पर सामूहिक आंदोलन करना होगा।
पंजाब में भी हिमाचल के वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने की मांग
इस विवाद का असर पंजाब में भी देखने को मिल रहा है। इससे पहले नंगल नगर परिषद और रूपनगर जिला परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पंजाब सरकार से हिमाचल प्रदेश के वाहनों पर पंजाब में भी जवाबी एंट्री टैक्स लगाने की अनुमति मांगी थी।
हालांकि, पंजाब सरकार ने अभी तक इन प्रस्तावों को लागू करने की मंजूरी नहीं दी है।
इस मुद्दे ने दोनों राज्यों के बीच वाहनों की आवाजाही और एंट्री टैक्स को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पंजाब विधानसभा में भी उठा मामला
रूपनगर से आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा ने हाल ही में संपन्न पंजाब विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाया था।
उनके सवाल के जवाब में ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री ने सदन को बताया कि रूपनगर जिला परिषद की ओर से हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने के प्रस्ताव को लागू करने के संबंध में पंजाब के एडवोकेट जनरल कार्यालय से कानूनी सलाह ली जा रही है।
इससे साफ है कि हिमाचल के एंट्री टोल बैरियर का विवाद अब केवल हिमाचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
यात्रियों, किसानों और ट्रांसपोर्टरों को राहत देने की मांग
संघर्ष समिति का कहना है कि विवादित टोल बैरियर हटने से हिमाचल से होकर गुजरने वाले यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों, किसानों और श्रद्धालुओं को राहत मिल सकती है।
समिति अब इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में केंद्र और हिमाचल सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
Key Highlights:
-
हिमाचल प्रदेश में एंट्री टोल बैरियर का विवाद फिर तेज।
-
संघर्ष समिति ने आंदोलन दोबारा शुरू करने का आह्वान किया।
-
कानूनी सदस्य उत्तांश मोंगा ने 96 पन्नों का ज्ञापन सौंपा।
-
केंद्र सरकार को 13 अगस्त से 29 अक्टूबर के बीच 24 पत्र भेजे गए।
-
नितिन गडकरी और केंद्रीय राज्य मंत्रियों को भी शिकायतें भेजी गईं।
-
संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 के तहत केंद्र से हस्तक्षेप की मांग।
-
नंगल नगर परिषद और रूपनगर जिला परिषद ने जवाबी एंट्री टैक्स के प्रस्ताव पारित किए।
-
पंजाब सरकार ने प्रस्तावों पर अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी है।
-
पंजाब विधानसभा में विधायक दिनेश चड्ढा ने मामला उठाया।
FAQ Section
1. हिमाचल प्रदेश में एंट्री टोल बैरियर को लेकर विवाद क्यों है?
विवादित एंट्री टोल बैरियर पर दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों से शुल्क वसूली को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। संघर्ष समिति इन्हें हटाने की मांग कर रही है।
2. संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार को कितने पन्नों का ज्ञापन दिया है?
समिति के कानूनी सदस्य उत्तांश मोंगा ने 96 पन्नों का ज्ञापन सौंपा है।
3. संविधान के किन अनुच्छेदों का हवाला दिया गया है?
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 का हवाला देकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
4. पंजाब में हिमाचल के वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने की मांग किसने की?
नंगल नगर परिषद और रूपनगर जिला परिषद ने इस संबंध में पंजाब सरकार को प्रस्ताव भेजे हैं।
5. पंजाब सरकार ने एंट्री टैक्स पर क्या जानकारी दी?
पंजाब विधानसभा में सरकार ने बताया कि हिमाचल में पंजीकृत वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर एडवोकेट जनरल कार्यालय से कानूनी सलाह ली जा रही है।
Conclusion:
हिमाचल प्रदेश के एंट्री टोल बैरियर को लेकर विवाद अब एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। वहीं, पंजाब में भी हिमाचल के वाहनों पर जवाबी एंट्री टैक्स लगाने के प्रस्तावों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब देखना होगा कि केंद्र और दोनों राज्य सरकारें इस विवाद का समाधान निकालने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

