दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू पहुंचे अमृतसर, युवाओं को दिया आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी अपनाने का संदेश

एक दिवसीय दौरे के दौरान गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह में टेका माथा, तरनतारन के पैतृक स्कूल में विद्यार्थियों से की मुलाकात और स्वदेशी दीपावली मेले में स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने पर दिया जोर।

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दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार को अमृतसर का एक दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने धार्मिक स्थल पर माथा टेका, अपने दादा द्वारा स्थापित स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद किया और स्वदेशी दीपावली मेले में युवाओं को आत्मनिर्भर भारत, उद्यमिता और भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का मंगलवार को अमृतसर दौरा धार्मिक आस्था, पारिवारिक विरासत और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के संदेश के नाम रहा। अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

संधू ने अपने दौरे की शुरुआत गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीदां, तहला साहिब में माथा टेककर की। इसके बाद उन्होंने तरनतारन जिले के सरहाली कलां स्थित अपने दादा द्वारा स्थापित स्कूल का दौरा किया। दिन के अंतिम कार्यक्रम में उन्होंने अमृतसर के स्वदेशी दीपावली मेले में हिस्सा लेकर स्थानीय कारोबार, स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का महत्व समझाया।

गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीदां में टेका माथा

तरनजीत सिंह संधू ने अपने दौरे की शुरुआत गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीदां, तहला साहिब में नतमस्तक होकर की।

इस अवसर पर उन्होंने बाबा दीप सिंह जी के साहस, समर्पण और महान बलिदान को याद किया। उन्होंने अमृतसर, पंजाब, दिल्ली और पूरे देश की शांति, समृद्धि तथा तरक्की के लिए अरदास की।

इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात भी की और उनके साथ बातचीत की।

दादा द्वारा स्थापित स्कूल पहुंचे तरनजीत सिंह संधू

इस दौरे का एक खास पहलू उनका सरहाली कलां स्थित गुरु गोबिंद सिंह खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल पहुंचना रहा। यह स्कूल उनके दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने वर्ष 1917 में स्थापित किया था।

स्कूल पहुंचकर उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ बातचीत की। संधू ने कहा कि विद्यार्थियों का उत्साह, अनुशासन और आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्हें गर्व और उम्मीद महसूस हुई।

उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़े रहने, शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने और देश के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

नए जिम्नेजियम का किया उद्घाटन

तरनजीत सिंह संधू ने स्कूल में नवनिर्मित जिम्नेजियम का उद्घाटन भी किया।

इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों को फिटनेस और खेलों को अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक मजबूती, मानसिक दृढ़ता और पढ़ाई में उत्कृष्टता एक-दूसरे के पूरक हैं।

उनके अनुसार, स्वस्थ, मजबूत और अनुशासित युवा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्वदेशी दीपावली मेले में दिया आत्मनिर्भर भारत का संदेश

अमृतसर के रणजीत एवेन्यू स्थित दशहरा ग्राउंड में स्वदेशी मंच की ओर से आयोजित स्वदेशी दीपावली मेले में भी दिल्ली के उपराज्यपाल ने हिस्सा लिया।

यहां उन्होंने स्वदेशी कारोबार, उद्यमिता और भारत की आर्थिक क्षमता को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

संधू ने कहा कि आज स्वदेशी का मतलब केवल भारतीय उत्पाद खरीदना नहीं है, बल्कि भारत में ही नए उत्पाद तैयार करना, नवाचार करना और विनिर्माण को बढ़ावा देना भी है।

उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME), स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों की देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा रोजगार पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका है।

वैश्विक बाजार में भारत की पहचान मजबूत करने पर जोर

तरनजीत सिंह संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी घरेलू क्षमताओं और उत्पादन व्यवस्था को इतना मजबूत बनाना होगा कि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।

उन्होंने युवाओं से पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय कौशल को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की अपील की। उनके अनुसार, भारत के युवाओं में देश की आर्थिक तस्वीर बदलने की पूरी क्षमता है।

युवाओं को विरासत और आधुनिक तकनीक से जुड़ने का संदेश

अपने पूरे दौरे के दौरान संधू ने युवाओं को तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए—अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें, शिक्षा और फिटनेस को प्राथमिकता दें तथा उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दें।

उनका कहना था कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब युवा अपनी पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक और नए अवसरों को अपनाएं।


Key Highlights:

  • दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार को अमृतसर का दौरा किया।

  • गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीदां, तहला साहिब में माथा टेका।

  • अमृतसर, पंजाब, दिल्ली और देश की खुशहाली के लिए अरदास की।

  • तरनतारन के सरहाली कलां स्थित अपने दादा द्वारा स्थापित स्कूल पहुंचे।

  • सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने वर्ष 1917 में स्कूल की स्थापना की थी।

  • स्कूल के नए जिम्नेजियम का उद्घाटन किया।

  • विद्यार्थियों को खेल, फिटनेस और शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।

  • रणजीत एवेन्यू के दशहरा ग्राउंड में स्वदेशी दीपावली मेले में हिस्सा लिया।

  • MSME, स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों को बढ़ावा देने की अपील की।

  • आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।


FAQ Section

1. तरनजीत सिंह संधू अमृतसर क्यों पहुंचे थे?

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू एक दिवसीय दौरे पर अमृतसर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने धार्मिक स्थल, स्कूल और स्वदेशी दीपावली मेले में हिस्सा लिया।

2. उन्होंने किस गुरुद्वारे में माथा टेका?

उन्होंने गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीदां, तहला साहिब में माथा टेककर अरदास की।

3. सरहाली कलां स्थित स्कूल का तरनजीत सिंह संधू से क्या संबंध है?

गुरु गोबिंद सिंह खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना उनके दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने वर्ष 1917 में की थी।

4. स्कूल में उन्होंने क्या कार्यक्रम किया?

उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से मुलाकात की तथा स्कूल के नए जिम्नेजियम का उद्घाटन किया।

5. स्वदेशी दीपावली मेले में उन्होंने क्या संदेश दिया?

उन्होंने भारत में उत्पादन, नवाचार, स्थानीय कारोबार, MSME और कारीगरों को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

6. तरनजीत सिंह संधू के अनुसार आत्मनिर्भर भारत का क्या अर्थ है?

उनके अनुसार आत्मनिर्भर भारत का मतलब केवल भारतीय उत्पाद खरीदना नहीं, बल्कि देश में उत्पादन, तकनीक और नवाचार की क्षमताओं को मजबूत करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना है।


Conclusion:

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का अमृतसर दौरा धार्मिक आस्था, पारिवारिक विरासत और आर्थिक विकास के संदेश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने जहां अपने दादा द्वारा स्थापित स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा, खेल और अनुशासन के लिए प्रेरित किया, वहीं स्वदेशी दीपावली मेले में स्थानीय कारोबार और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उनका संदेश स्पष्ट रहा कि युवाओं की भागीदारी, आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति का मेल ही विकसित भारत की नींव मजबूत कर सकता है।


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Edited By: Atul Sharma

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