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अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और अकाली दल (पुनर सुरजीत) के बीच तालमेल वार्ता खत्म
वैचारिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर असहमति बनी गठबंधन टूटने की वजह
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और अकाली दल (पुनर सुरजीत) के बीच चल रही समन्वय वार्ता समाप्त हो गई है। समन्वय समिति के सदस्यों ने कहा कि मूल वैचारिक मतभेद और ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाने के कारण यह फैसला लिया गया, जो पंथ का नेतृत्व करने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और अकाली दल (पुनर सुरजीत) गुटों के बीच चल रही समन्वय वार्ता समाप्त हो गई है। इसकी घोषणा आज समन्वय समिति के सदस्यों ने की।
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की चार सदस्यीय समन्वय समिति — बाबू सिंह बराड़, परमजीत सिंह जोहल, परगट सिंह रैया और रछपाल सिंह सोसन — ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह निर्णय मूलभूत वैचारिक मतभेदों और उन नेताओं को लगातार आगे बढ़ाए जाने के कारण लिया गया, जिन्होंने उनके अनुसार पंथ का नेतृत्व करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
दोनों अकाली दल गुटों के बीच एकता स्थापित करने के उद्देश्य से 18 अप्रैल को आठ सदस्यीय पंथिक एकता समन्वय समिति का गठन किया गया था।रछपाल सिंह सोसन ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बैठकें और चर्चाएं हुईं, लेकिन कुछ बुनियादी और महत्वपूर्ण वैचारिक मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके कारण गठबंधन की कोशिशें विफल हो गईं।
उन्होंने कहा कि समन्वय समिति के गठन से पहले 2 दिसंबर को अकाल तख्त द्वारा जारी निर्देश के मद्देनजर एक आपसी समझ बनी थी कि जो नेता पंथ का नेतृत्व करने का नैतिक आधार खो चुके हैं, उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं से दूर रखा जाएगा।
सोसन ने आरोप लगाया, “पुनर सुरजीत गुट ने न केवल ऐसे नेताओं को महत्वपूर्ण पद दिए, बल्कि उन्हें नेतृत्व की कमान भी सौंप दी, जो पंथिक एकता की भावना और सिख समुदाय की अपेक्षाओं के खिलाफ था।”


