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बायोमेडिकल कचरे का बड़ा घोटाला: अस्पतालों का खतरनाक वेस्ट अवैध कबाड़ बाजारों में पहुंचा
पंजाब में पीपीसीबी और पुलिस की कार्रवाई में खुलासा, इस्तेमाल की गई सिरिंज और खून से सना मेडिकल कचरा रिसाइक्लिंग के लिए बेचा जा रहा था
पंजाब में बायोमेडिकल कचरे के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। अस्पतालों और ब्लड बैंकों से निकलने वाला खतरनाक मेडिकल वेस्ट नियमों के अनुसार नष्ट करने की बजाय अवैध गोदामों और कबाड़ बाजारों में भेजा जा रहा था। जांच में सामने आया कि इस कचरे से निकला प्लास्टिक सस्ते खिलौने और मेडिकल उपकरण बनाने में इस्तेमाल हो रहा था।
सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामले में यह खुलासा हुआ है कि अनिवार्य रूप से नष्ट किए जाने वाले बायोमेडिकल कचरे को अस्पतालों और ब्लड बैंकों से अवैध कबाड़ गोदामों में रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, इस बायोमेडिकल कचरे से रिसाइकिल किया गया प्लास्टिक मेडिकल उपकरण बनाने वालों और यहां तक कि सस्ते खिलौने बनाने वालों तक पहुंच रहा था।
सूत्रों ने बताया कि इस अवैध कारोबार का खुलासा तब हुआ जब पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने पुलिस के साथ मिलकर शिकायत मिलने पर एक गोदाम में छापा मारा और वहां से बायोमेडिकल कचरा बरामद किया। शुरुआती छापेमारी के बाद देवगढ़ रोड स्थित पास के एक अन्य गोदाम तक भी जांच पहुंची।बरामद किए गए कचरे पर ट्रीटमेंट प्लांट सुविधाओं की सील लगी हुई थी।
एक अधिकारी ने बताया, “प्रारंभिक जांच से एक संगठित नेटवर्क की ओर संकेत मिलता है, जिसमें बायोमेडिकल कचरे को गोदामों तक पहुंचाया जाता था। वहां से बेईमान कबाड़ी इसे बड़े शहरों के बड़े कबाड़ बाजारों में बेच देते थे। मौके पर खून से सने कॉटन पैड, इस्तेमाल की गई सिरिंज और खून के नमूनों की बोतलें पड़ी मिलीं, जिससे आसपास के इलाकों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है।”
वर्तमान में अमृतसर, लुधियाना, मुक्तसर, मोहाली, नकोदर और पठानकोट में छह कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी मौजूद हैं। ये सभी मिलकर प्रतिदिन लगभग 20,000 किलोग्राम बायोमेडिकल कचरे का निपटान करती हैं। बायोमेडिकल कचरे की निगरानी के लिए बारकोड प्रणाली लागू है, जिससे पीपीसीबी को कचरा संग्रहण की जानकारी मिलती है। कचरा ढोने वाले वाहनों की ट्रैकिंग जानकारी भी ऑनलाइन अपलोड की जाती है।
पीपीसीबी के पर्यावरण अभियंता नवतेश सिंगला ने बताया कि जब्त किए गए बायोमेडिकल कचरे पर मोहाली की एक अधिकृत वेस्ट कलेक्शन सुविधा के बारकोड लगे हुए थे, जिससे संकेत मिलता है कि कचरे को वैध निपटान प्रक्रिया से मोड़ दिया गया था।
उन्होंने कहा, “पूरा गोदाम बायोमेडिकल कचरे से भरे बैगों से भरा हुआ था। हमारी टीम के पहुंचने पर वहां मौजूद दो मजदूर मौके से फरार हो गए। हालांकि हमने कचरा और कुछ अन्य सामान जब्त कर लिया है, जो दोषियों और अवैध गोदाम के मालिकों तक पहुंचने में पुलिस की मदद करेगा।”
उन्होंने बताया कि मोहाली की एक कंपनी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिसे पहले भी बायोमेडिकल कचरे के गलत प्रबंधन के मामले में पकड़ा जा चुका है।
एक सूत्र ने बताया, “अब गोदाम को सील कर दिया गया है और कचरे को लुधियाना स्थित स्क्रैप मैनेजमेंट सुविधा में भेज दिया गया है।”
यह खुलासा कि बायोमेडिकल कचरा सस्ते खिलौने बनाने वालों और मेडिकल उपकरणों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण उद्योग तक पहुंच रहा था, पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।


