ईडी कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल, AAP बनाम बीजेपी मुकाबला तेज

पूर्व उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी और सीबीआई छापों ने पंजाब में केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर बहस बढ़ाई

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आम आदमी पार्टी के पूर्व उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी द्वारा गिरफ्तारी और पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पर सीबीआई छापे के बाद पंजाब की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। बीजेपी के पंजाब में विस्तार की कोशिशों और AAP की “पंजाब बनाम दिल्ली” रणनीति के बीच राजनीतिक मुकाबला तेज होता दिख रहा है।

9 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आम आदमी पार्टी के पूर्व उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी और पिछले सप्ताह पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी ने पंजाब के राजनीतिक वर्ग को केंद्रीय एजेंसियों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की भूमिका पर नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

संजीव अरोड़ा को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। अब जांच का दायरा उनके कारोबारी सहयोगियों हेमंत सूद और चंदर शेखर तक बढ़ा दिया गया है। चूंकि मंत्री से जुड़ी एक कंपनी को बैंक गारंटी वापस लेने में कथित तौर पर फायदा पहुंचाया गया था, इसलिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के दो वरिष्ठ अधिकारियों को भी ईडी ने तलब किया है।

हैम्पटन स्काई रियल्टी नामक कंपनी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी निर्यात घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है। पंजाब के राजनीतिक हलकों में इसे एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में जीत के बाद बीजेपी ने खुले तौर पर संकेत दिए हैं कि वह अब पंजाब में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगाएगी — एक ऐसा राज्य जहां पार्टी कभी अपने दम पर सत्ता में नहीं आई।

बीजेपी को अब पंजाब में अवसर दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे को निशाना बनाएगी, जिसने पिछली विधानसभा चुनावों में AAP को भारी जीत दिलाई थी। इसी वजह से मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में AAP के वरिष्ठ नेता की गिरफ्तारी पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

राज्य में नशे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा “जिहादी ड्रग” कहे जाने वाले 227 किलोग्राम कैप्टागॉन की बरामदगी, जो सीरिया-खाड़ी तस्करी मार्ग के जरिए लाई जा रही थी, को भी बीजेपी के उस संदेश का हिस्सा माना जा रहा है कि वह पंजाब की समस्याओं को लेकर गंभीर है।

पश्चिम बंगाल से आने वाला राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी की जीत के बाद केंद्र सरकार द्वारा नई राज्य सरकार को वित्तीय राहत और नकदी प्रवाह में सुधार का आश्वासन दिया गया। भारी कर्ज और खराब जीडीपी-टू-डेब्ट अनुपात से जूझ रहे पंजाब के लिए भी भविष्य में ऐसे वादे किए जा सकते हैं।

AAP के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। माना जा रहा है कि पार्टी ने दिल्ली में अपनी हार से सबक लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईडी और सीबीआई की कार्रवाइयों को “पंजाब बनाम दिल्ली” की बड़ी लड़ाई का हिस्सा बताया है।

इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमले तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने विदेश यात्राओं से लेकर आम लोगों को सादगी अपनाने की सलाह जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं।

माना जा रहा है कि “पंजाब बनाम दिल्ली” का मुद्दा आगामी चुनावों में AAP की रणनीति का मुख्य आधार बनेगा। पार्टी पंजाब की उस पारंपरिक भावना को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जिसमें लोग संघर्ष किए बिना हार नहीं मानते। साथ ही महिलाओं को हर महीने भत्ता देने जैसी कल्याणकारी योजनाओं के जरिए समर्थन मजबूत करने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।

पार्टी के भीतर भी तेजी से पुनर्गठन किया जा रहा है। दलबदल की अफवाहों के बीच पार्टी अध्यक्ष अमन अरोड़ा को उद्योग विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि वित्त मंत्री हरपाल चीमा को अधिक प्रमुखता से पेश किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां की भूमिका को भी संगठनात्मक रूप से मजबूत किए जाने की चर्चा है।

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Edited By: Karan Singh

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