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मालवा नहर परियोजना पर जनसुनवाई में किसानों की बंटी राय, किसी ने किया समर्थन तो किसी ने जताई पानी की गुणवत्ता पर चिंता
मुक्तसर में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जनसुनवाई के दौरान किसानों ने रखे अलग-अलग पक्ष, पर्यावरण और सिंचाई दोनों मुद्दे रहे केंद्र में।
मुक्तसर में प्रस्तावित मालवा नहर परियोजना को लेकर आयोजित दूसरी जनसुनवाई में किसानों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ किसानों ने सिंचाई के लिए नहर को जरूरी बताया, जबकि अन्य ने प्रदूषित पानी और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई।
मालवा नहर परियोजना पर दूसरी जनसुनवाई में किसानों ने रखी अपनी बात
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) द्वारा सोमवार को मुक्तसर स्थित कैनाल कॉलोनी में प्रस्तावित मालवा नहर परियोजना को लेकर दूसरी जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई के दौरान किसानों और ग्रामीणों ने खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान परियोजना को लेकर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले।
यह जनसुनवाई परियोजना के पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) की प्रक्रिया का हिस्सा थी, जिसमें संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां दर्ज की गईं।
कुछ किसानों ने प्रदूषित पानी की आशंका जताते हुए किया विरोध
जनसुनवाई में एक वर्ग के किसानों ने परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि प्रस्तावित नहर के माध्यम से उनके खेतों तक प्रदूषित पानी पहुंच सकता है।विरोध करने वाले किसानों के प्रतिनिधियों ने कई गांवों की ओर से पारित प्रस्ताव भी अधिकारियों को सौंपे। इन प्रस्तावों में पानी की गुणवत्ता और पर्यावरणीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की गईं।
किसानों ने मांग की कि सरकार पहले यह स्पष्ट करे कि नहर में छोड़ा जाने वाला पानी कृषि के लिए सुरक्षित होगा या नहीं।
दूसरे पक्ष ने कहा- सिंचाई के लिए नहर की सख्त जरूरत
वहीं, दूसरे समूह के किसानों ने मालवा नहर परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि क्षेत्र लंबे समय से सिंचाई के पानी की कमी से जूझ रहा है।
समर्थन करने वाले किसानों का कहना था कि नहर बनने से उन किसानों को राहत मिलेगी, जिन्हें पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
किसान बेअंत सिंह थांडेवाला ने कहा कि उनके खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोग परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो वे भी इसके समर्थन में अलग समूह बनाएंगे। उनके अनुसार किसानों को पानी की आवश्यकता है।
विरोध करने वाले किसानों ने उठाए पानी की गुणवत्ता पर सवाल
किसान नेता निर्मल सिंह जस्सेआना ने अधिकारियों से पूछा कि नहर में छोड़े जाने वाले पानी की गुणवत्ता क्या होगी और क्या इससे किसानों की फसलों पर कोई असर पड़ेगा।
उन्होंने दावा किया कि जनसुनवाई में मौजूद अधिकांश किसानों ने परियोजना का विरोध किया और केवल कुछ किसानों ने इसका समर्थन किया।
PPCB ने दर्ज किए सुझाव और आपत्तियां
जनसुनवाई के दौरान पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसानों और ग्रामीणों द्वारा रखे गए सभी सुझावों एवं आपत्तियों को दर्ज किया।
अधिकारियों के अनुसार इन सभी बिंदुओं पर परियोजना के पर्यावरणीय मूल्यांकन के दौरान विचार किया जाएगा।
Key Highlights:
- मुक्तसर में मालवा नहर परियोजना पर दूसरी जनसुनवाई आयोजित।
- किसानों के बीच परियोजना को लेकर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले।
- विरोध करने वालों ने प्रदूषित पानी और पर्यावरणीय प्रभावों पर चिंता जताई।
- समर्थक किसानों ने सिंचाई के लिए नहर को जरूरी बताया।
- कई गांवों के प्रस्ताव PPCB अधिकारियों को सौंपे गए।
- दर्ज सुझावों और आपत्तियों को पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
FAQ Section:
Q1. मालवा नहर परियोजना पर जनसुनवाई कहां हुई?
मुक्तसर स्थित कैनाल कॉलोनी में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दूसरी जनसुनवाई आयोजित की गई।
Q2. किसानों ने परियोजना का विरोध क्यों किया?
कुछ किसानों ने आशंका जताई कि नहर के माध्यम से प्रदूषित पानी खेतों तक पहुंच सकता है, जिससे फसलों और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
Q3. परियोजना का समर्थन करने वाले किसानों का क्या कहना है?
समर्थक किसानों का कहना है कि क्षेत्र में सिंचाई के पानी की भारी कमी है और नहर बनने से उन्हें राहत मिलेगी।
Q4. जनसुनवाई का उद्देश्य क्या था?
यह जनसुनवाई मालवा नहर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया के तहत सुझाव और आपत्तियां दर्ज करने के लिए आयोजित की गई थी।
Q5. आगे क्या होगा?
PPCB और जिला प्रशासन द्वारा दर्ज सभी सुझावों और आपत्तियों पर परियोजना के पर्यावरणीय मूल्यांकन के दौरान विचार किया जाएगा।
Conclusion:
मालवा नहर परियोजना को लेकर किसानों के बीच अलग-अलग राय सामने आई है। जहां एक ओर सिंचाई के संकट से जूझ रहे किसान इसे राहत का माध्यम मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई किसान पानी की गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। अब परियोजना से जुड़े अंतिम निर्णय से पहले अधिकारियों द्वारा जनसुनवाई में मिले सुझावों और आपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

