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मोबाइल छोड़ें, मिट्टी से जुड़ें: PAU विशेषज्ञों की सलाह, बागवानी और खेतों की सैर से बच्चों का होगा बेहतर विकास
गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का सुनहरा अवसर, स्क्रीन टाइम कम करने और मानसिक-शारीरिक विकास के लिए बागवानी अपनाने की अपील।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विशेषज्ञों ने बढ़ते स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताते हुए अभिभावकों से बच्चों को बागवानी और खेतों की सैर जैसी गतिविधियों से जोड़ने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इससे बच्चों का मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास बेहतर होगा।
बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की सलाह
डिजिटल दौर में बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल फोन, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। इस बदलती जीवनशैली को लेकर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि बागवानी और खेतों की सैर जैसी गतिविधियां बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ स्क्रीन टाइम कम करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी पहले की तरह प्राकृतिक गतिविधियों में कम और डिजिटल दुनिया में अधिक समय बिता रहे हैं।
गर्मी की छुट्टियां हैं प्रकृति से जुड़ने का सबसे अच्छा समय
PAU के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी की छुट्टियां बच्चों को मिट्टी, पौधों और खेती से जोड़ने का सबसे उपयुक्त समय हैं।विशेषज्ञ भल्लन सिंह सेखों ने कहा कि बागवानी और खेतों की सैर बच्चों को प्रकृति के करीब लाने का एक व्यावहारिक और प्रभावी तरीका है। इससे वे प्राकृतिक जीवनशैली को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
बागवानी केवल किचन गार्डन तक सीमित नहीं
KVK की विशेषज्ञ दिव्या जैन ने कहा कि बागवानी का मतलब केवल घर के छोटे किचन गार्डन तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को सजावटी पौधे उगाने, फूलों की खेती, घरेलू नर्सरी तैयार करने, लैंडस्केपिंग और फलदार पेड़ों की देखभाल जैसी गतिविधियों में भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे उनका प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव विकसित होगा।
PAU के किचन गार्डन मॉडल को अपनाने की सलाह
विशेषज्ञों ने घर के आंगन, छत और बालकनी में भी PAU के किचन गार्डन मॉडल को अपनाने की सलाह दी।
उनका कहना है कि किचन गार्डन से परिवार को पूरे वर्ष ताजी और रसायन-मुक्त सब्जियां मिल सकती हैं। वहीं बच्चों के लिए मिट्टी और पौधों के साथ समय बिताना सीखने का एक सकारात्मक अनुभव बन सकता है।
बागवानी से बच्चों में विकसित होते हैं धैर्य और जिम्मेदारी के गुण
विशेषज्ञ गुरमेल सिंह संधू के अनुसार, जब बच्चे एक छोटे बीज को पौधा बनते, उसमें फूल और फल लगते देखते हैं, तो उनमें धैर्य और निरंतर प्रयास का महत्व समझने की क्षमता विकसित होती है।
रोजाना पौधों को पानी देना, खरपतवार हटाना और उनकी देखभाल करना बच्चों में जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करता है।
मिट्टी के संपर्क से बढ़ सकती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं।
बचपन में मिट्टी के संपर्क से शरीर को मौसमी बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है।
किशोरों को खेती और प्रकृति से जोड़ने की नई रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि 13 से 19 वर्ष के किशोरों को मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर करना आसान नहीं है।
ऐसे में उन्हें प्रकृति फोटोग्राफी, फार्म विजिट, कृषि पर्यटन और आधुनिक खेती की तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई और हाइड्रोपोनिक्स (बिना मिट्टी की खेती) के बारे में इंटरनेट के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
उनका कहना है कि बच्चों से मोबाइल छीनने के बजाय तकनीक का सकारात्मक उपयोग सिखाना अधिक प्रभावी तरीका होगा।
Key Highlights:
- PAU विशेषज्ञों ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता जताई।
- बागवानी और खेतों की सैर को बच्चों के विकास के लिए उपयोगी बताया।
- गर्मी की छुट्टियों में प्रकृति से जोड़ने की सलाह।
- किचन गार्डन, नर्सरी और फलदार पौधों की देखभाल पर जोर।
- बागवानी से धैर्य, जिम्मेदारी और अनुशासन विकसित होने का दावा।
- मिट्टी के संपर्क को रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी बताया।
- किशोरों को आधुनिक कृषि तकनीकों और प्रकृति फोटोग्राफी से जोड़ने की सलाह।
FAQ Section:
Q1. PAU विशेषज्ञ बच्चों को बागवानी की सलाह क्यों दे रहे हैं?
बढ़ते स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया की लत को कम करने तथा बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के लिए।
Q2. बागवानी से बच्चों को क्या लाभ मिल सकते हैं?
बच्चों में धैर्य, जिम्मेदारी, अनुशासन और प्रकृति के प्रति जुड़ाव विकसित होता है। साथ ही उनका मानसिक और शारीरिक विकास भी बेहतर होता है।
Q3. क्या केवल किचन गार्डन ही पर्याप्त है?
विशेषज्ञों के अनुसार नहीं। बच्चों को फूलों की खेती, नर्सरी, फलदार पेड़ों की देखभाल और लैंडस्केपिंग जैसी गतिविधियों में भी शामिल करना चाहिए।
Q4. मिट्टी के संपर्क को क्यों फायदेमंद माना गया है?
विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
Q5. किशोरों को मोबाइल से कैसे दूर किया जा सकता है?
प्रकृति फोटोग्राफी, फार्म विजिट, कृषि पर्यटन और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में डिजिटल माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करके।
Conclusion:
डिजिटल युग में बच्चों का प्रकृति से जुड़ाव लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे समय में बागवानी, खेतों की सैर और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियां न केवल उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक हो सकती हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, धैर्यवान और प्रकृति के प्रति संवेदनशील भी बना सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना ही बच्चों के बेहतर भविष्य की कुंजी है।

