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विदेश में नौकरी का सपना बना डरावना सच: दुबई और मस्कट में फंसी जालंधर की युवती भारत लौटी, मानव तस्करी का किया सनसनीखेज खुलासा
40 हजार रुपये वेतन का झांसा देकर अरब देश भेजी गई युवती ने बताई प्रताड़ना की आपबीती, कई देशों की लड़कियों के शोषण का भी किया खुलासा।
विदेश में अच्छी नौकरी का सपना दिखाकर दुबई और बाद में मस्कट भेजी गई जालंधर की एक युवती को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। पीड़िता ने मानव तस्करी, शारीरिक प्रताड़ना और जबरन घरेलू काम कराने जैसी गंभीर बातों का खुलासा किया है।
झूठे नौकरी के वादे के जाल में फंसी जालंधर की युवती, दर्दनाक अनुभव सुनकर परिवार भी दहल गया
विदेश में बेहतर रोजगार और अच्छी कमाई का सपना दिखाकर महिलाओं को अरब देशों में भेजने वाले मानव तस्करी नेटवर्क की एक और भयावह कहानी सामने आई है। जालंधर की एक युवती को नौकरी का लालच देकर पहले दुबई और बाद में मस्कट भेज दिया गया, जहां उसे कठिन परिस्थितियों में रहने और जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया।
कई दिनों की कोशिशों के बाद युवती को सुरक्षित भारत वापस लाया गया। उसके परिवार ने बेटी की सकुशल वापसी पर राहत जताई और मदद करने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया।
40 हजार रुपये मासिक वेतन का दिया गया था लालच
पीड़िता के अनुसार, उसके गांव की एक युवती ने उसे विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया था। 14 फरवरी को वह बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर दुबई रवाना हुई।उसे हर महीने 40 हजार रुपये वेतन मिलने का वादा किया गया था, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद एजेंटों ने उसे लगभग एक महीने तक वहीं रखा और फिर मस्कट भेज दिया।
मस्कट में सुबह से देर रात तक कराया गया घरेलू काम
युवती ने बताया कि मस्कट पहुंचने के बाद उसे घरेलू काम में लगा दिया गया। उसे सुबह पांच बजे से पहले उठना पड़ता था और देर रात तक लगातार काम कराया जाता था।
आराम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता था और न ही सोने का कोई निश्चित समय तय था। काम का दबाव इतना अधिक था कि उसे शारीरिक और मानसिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
भारत लौटने की बात करने पर की जाती थी मारपीट
पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब भी उसने भारत वापस लौटने की इच्छा जताई, उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
उसे अपने परिवार से बात करने के लिए भी केवल 20 मिनट का सीमित समय दिया जाता था।
कई देशों की लड़कियां भी थीं बंदी जैसी स्थिति में
युवती ने बताया कि जिस स्थान पर उसे रखा गया था, वहां नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और भारत की कई अन्य लड़कियां भी रह रही थीं।
उसके अनुसार, इन महिलाओं की स्थिति बेहद खराब थी और उन्हें एक नियोक्ता से दूसरे नियोक्ता को 1,200 से 1,350 ओमानी रियाल तक की राशि में बेचा जाता था।
कई लड़कियां अपने परिवार और बच्चों को याद कर रोती रहती थीं और उनकी सबसे बड़ी इच्छा किसी तरह अपने देश लौटने की थी।
परिवार ने मांगी मदद, प्रयासों से सुरक्षित हुई वापसी
पीड़िता के परिवार ने बताया कि उन्होंने 4 जून को मदद के लिए राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया। इसके बाद विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के सहयोग से युवती को सुरक्षित भारत वापस लाया गया।
वह 14 जून को अपने घर लौट आई।
विदेश जाने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की अपील
मामले के सामने आने के बाद लोगों से अपील की गई है कि विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले एजेंट, कंपनी और रोजगार से जुड़ी सभी जानकारियों की अच्छी तरह जांच करें।
बिना सत्यापन के किसी भी एजेंट या नौकरी के प्रस्ताव पर भरोसा करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
Key Highlights:
- नौकरी का झांसा देकर जालंधर की युवती को दुबई और मस्कट भेजा गया।
- 40 हजार रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था।
- मस्कट में जबरन घरेलू काम और प्रताड़ना का आरोप।
- भारत लौटने की मांग पर शारीरिक दुर्व्यवहार किए जाने का दावा।
- नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और भारत की कई लड़कियां भी कठिन परिस्थितियों में मिलीं।
- परिवार की पहल और सरकारी प्रयासों से युवती सुरक्षित भारत लौटी।
- लोगों से विदेश जाने से पहले एजेंट और कंपनी की जांच करने की अपील।
FAQ Section:
Q1. युवती को किस बहाने विदेश भेजा गया था?
उसे अच्छी नौकरी और 40 हजार रुपये मासिक वेतन का वादा कर दुबई भेजा गया था।
Q2. बाद में युवती को कहां ले जाया गया?
दुबई में कुछ समय रखने के बाद उसे मस्कट भेज दिया गया, जहां उससे घरेलू काम कराया गया।
Q3. पीड़िता ने किन समस्याओं का सामना करने का दावा किया?
उसने जबरन काम, शारीरिक प्रताड़ना, आराम की कमी और परिवार से सीमित संपर्क जैसी परेशानियों का सामना करने की बात कही।
Q4. युवती की भारत वापसी कैसे हुई?
परिवार द्वारा मदद मांगने के बाद संबंधित अधिकारियों के प्रयासों से युवती सुरक्षित भारत लौट सकी।
Q5. इस मामले से क्या सीख मिलती है?
विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले एजेंट, कंपनी और रोजगार संबंधी सभी दस्तावेजों एवं दावों की पूरी तरह जांच-पड़ताल करना आवश्यक है।
Conclusion:
यह मामला विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली कथित मानव तस्करी और शोषण के गंभीर खतरे को उजागर करता है। ऐसे मामलों से बचने के लिए लोगों को केवल अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही विदेश जाने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए और किसी भी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी सत्यता की जांच करनी चाहिए।

