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Punjab Mid-Day Meal Workers: ₹3,000 मानदेय में कैसे चले घर? 45 हजार रसोइयों-हेल्परों ने ₹25,000 वेतन की मांग उठाई
लुधियाना के सरकारी स्कूल में CJP टीम के दौरे के बाद फिर चर्चा में आया Mid-Day Meal Workers का वेतन और कामकाजी परिस्थितियों का मुद्दा
पंजाब के सरकारी स्कूलों में करीब 45,000 मिड-डे मील कुक और हेल्पर मौजूदा ₹3,000 मासिक मानदेय में काम कर रहे हैं। यूनियन ने नियमित वेतन व्यवस्था के तहत ₹25,000 मासिक भुगतान समेत कई मांगें उठाई हैं।
₹3,000 मासिक मानदेय को लेकर फिर उठी आवाज
पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करने और परोसने वाले कर्मचारियों की वेतन संबंधी मांग एक बार फिर चर्चा में है। लुधियाना के एक सरकारी स्कूल में Cockroach Janta Party (CJP) की टीम के दौरे के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
CJP नेता Saurav Das द्वारा साझा किए गए वीडियो में मिड-डे मील कर्मियों को मिलने वाले ₹3,000 के मासिक मानदेय को अपर्याप्त बताया गया। राज्य के स्कूलों में करीब 45,000 कुक और हेल्पर मिड-डे मील योजना से जुड़े हुए हैं।
₹25,000 मासिक वेतन की मांग
Punjab Mid-Day Meal Workers Union लंबे समय से कर्मचारियों को नियमित वेतन व्यवस्था के तहत लाने की मांग कर रहा है। यूनियन के अनुसार, मौजूदा ₹3,000 मानदेय की जगह कर्मचारियों को ₹25,000 प्रति माह दिया जाना चाहिए।यूनियन ने इसके अलावा कर्मचारियों के लिए अन्य सुविधाओं की भी मांग की है:
- साल में दो यूनिफॉर्म
- ₹5 लाख का मुफ्त बीमा कवर
- अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए अलग पारिश्रमिक
- नियमित वेतन व्यवस्था में शामिल करने की मांग
- काम के अनुरूप बेहतर आर्थिक सुरक्षा
“₹3,000 में घर चलाना मुश्किल”
लुधियाना के Udoke गांव स्थित सरकारी स्कूल में मिड-डे मील कुक के तौर पर काम करने वाली Ranjit Kaur ने कम मानदेय को लेकर अपनी परेशानी जाहिर की।
उनके अनुसार, कर्मचारियों को पूरे स्कूल समय के दौरान मौजूद रहना पड़ता है। खाना तैयार करने, बच्चों को भोजन परोसने, साफ-सफाई बनाए रखने और भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देने जैसी जिम्मेदारियां भी उनके काम का हिस्सा हैं।
Ranjit Kaur का कहना है कि इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद मिलने वाला ₹3,000 का मानदेय घरेलू खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
सरकार के सामने मांगें रखने के बावजूद राहत का इंतजार
यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों को राज्य सरकार और कैबिनेट मंत्रियों के सामने भी रखा है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
Punjab Mid-Day Meal Union की अध्यक्ष Mamta Sharma समेत यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा पंजाब सरकार के नेताओं ने विधानसभा चुनाव से पहले मिड-डे मील कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया था। यूनियन का दावा है कि सरकार के करीब साढ़े चार साल पूरे होने के बावजूद भुगतान में अपेक्षित संशोधन नहीं किया गया।
इन दावों पर सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में कोई नया आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
“विरोध करें तो राजनीतिक मोहरा कहा जाता है”
Kot Khalsa स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल की कर्मचारी Sunita Rani ने कहा कि मिड-डे मील कर्मी स्कूल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उसे परोसने का काम करती हैं, लेकिन उनके अनुसार उन्हें बुनियादी सुविधाओं और उचित भुगतान से वंचित रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विरोध करते हैं तो उन्हें “राजनीतिक मोहरा” कहा जाता है। उनका सवाल है कि अगर वे अपनी आवाज नहीं उठाएंगे तो उनकी समस्याएं कौन सुनेगा?
Key Highlights:
- पंजाब में करीब 45,000 मिड-डे मील कुक और हेल्पर कार्यरत बताए गए हैं।
- मौजूदा मासिक मानदेय ₹3,000 होने का मुद्दा उठाया गया।
- यूनियन ₹25,000 मासिक वेतन की मांग कर रही है।
- साल में दो यूनिफॉर्म और ₹5 लाख मुफ्त बीमा की मांग भी शामिल है।
- अतिरिक्त काम के लिए अलग पारिश्रमिक देने की मांग की गई है।
- कर्मचारियों का कहना है कि कम मानदेय के कारण घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
- यूनियन ने सरकार पर चुनावी वादे के बावजूद मानदेय में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं करने का आरोप लगाया है।
FAQ Section:
Q1. पंजाब में मिड-डे मील कर्मचारियों को कितना मानदेय मिलने की बात कही गई है?
A. रिपोर्ट के अनुसार, मिड-डे मील कुक और हेल्परों को ₹3,000 मासिक मानदेय मिलने की बात कही गई है।
Q2. मिड-डे मील वर्कर्स कितने वेतन की मांग कर रहे हैं?
A. Punjab Mid-Day Meal Workers Union ने ₹25,000 मासिक वेतन की मांग की है।
Q3. मिड-डे मील यूनियन की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?
A. यूनियन ने दो वार्षिक यूनिफॉर्म, ₹5 लाख का मुफ्त बीमा और अतिरिक्त काम के लिए अतिरिक्त पारिश्रमिक की मांग की है।
Q4. पंजाब में कितने मिड-डे मील कुक और हेल्पर काम करते हैं?
A. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 45,000 कुक और हेल्पर मिड-डे मील कार्यक्रम से जुड़े हैं।
Q5. कर्मचारी मानदेय बढ़ाने की मांग क्यों कर रहे हैं?
A. कर्मचारियों का कहना है कि भोजन तैयार करने, परोसने, साफ-सफाई और अन्य जिम्मेदारियों के मुकाबले ₹3,000 का मासिक मानदेय घरेलू खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है।
Conclusion:
पंजाब के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था को सुचारू रखने में कुक और हेल्पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनका कम मानदेय और लंबे समय से लंबित मांगों का मुद्दा लगातार सामने आता रहा है। अब ₹25,000 मासिक वेतन, बीमा, यूनिफॉर्म और अतिरिक्त काम के भुगतान जैसी मांगों पर कर्मचारियों को सरकार से ठोस निर्णय का इंतजार है।
