लुधियाना में बिजली कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन, पावरकॉम जमीन बिक्री और बिजली बिल के खिलाफ विरोध

बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास के बाहर धरना, निजीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर उठे सवाल

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पंजाब भर से आए बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनरों ने लुधियाना में पावरकॉम की जमीन बिक्री और बिजली संशोधन बिल 2025 के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। उन्होंने निजीकरण का विरोध करते हुए राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

पंजाब भर से आए बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनरों ने शनिवार को लुधियाना में राज्य के बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास के बाहर एक विशाल धरना प्रदर्शन किया।

यह प्रदर्शन पावर सेक्टर जॉइंट एक्शन कमेटी (PSJAC) के बैनर तले आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पावरकॉम की जमीन और संपत्तियों की बिक्री का विरोध किया, बिजली संशोधन विधेयक 2025 को रद्द करने की मांग उठाई और रोपड़ के थर्मल प्लांट में राज्य क्षेत्र के तहत दो सुपरक्रिटिकल 800 मेगावाट यूनिट स्थापित करने की मांग की।

जॉइंट एक्शन कमेटी के नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार “मॉनेटाइजेशन” के नाम पर विभिन्न शहरों में पावरकॉम की जमीन बेचने की योजना बना रही है। इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पावरकॉम को अगली सुनवाई तक कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया है।

उन्होंने कहा कि पावरकॉम की जमीनें 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत हासिल की गई थीं और इनका उपयोग केवल बिजली क्षेत्र के लिए ही होना चाहिए। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए इन जमीनों का इस्तेमाल नए सब-स्टेशन, आधुनिक कार्यालय, स्टोर और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि लुधियाना में 159 करोड़ रुपये की “जीरो मिशन आउटेज परियोजना” शुरू से ही समस्याओं का सामना कर रही है, क्योंकि सब-स्टेशनों में ब्रेकर लगाने और नए फीडर बिछाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है।

कमेटी के अनुसार, इन जमीनों के कारण ही बैंक और वित्तीय संस्थान पावरकॉम को समय-समय पर ऋण प्रदान करते हैं, जिससे उसकी वित्तीय जरूरतें पूरी होती हैं।

जॉइंट एक्शन कमेटी ने मांग की कि जमीनों की बिक्री तुरंत रोकी जाए और इन्हें रियल एस्टेट एजेंटों को देने के बजाय बिजली ढांचे को मजबूत करने और उसके विस्तार के लिए इस्तेमाल किया जाए।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य संरक्षक ईआर पदमजीत सिंह, इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष ईआर जसवीर सिंह धिमान और जेई काउंसिल के अध्यक्ष ईआर परमजीत सिंह खट्ट्रा ने कहा कि देश की बिजली वितरण कंपनियों ने कर कटौती के बाद लगभग 2700 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है। साथ ही लाइन लॉस भी 2014 के 22.62 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 15.04 प्रतिशत हो गया है।

इसके बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में “जनविरोधी” बिजली संशोधन विधेयक 2025 को जल्दबाजी में लाने पर अड़ी हुई है, ताकि कॉर्पोरेट कंपनियों को बिजली वितरण क्षेत्र में प्रवेश दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल बिजली वितरण क्षेत्र का निजीकरण होगा, बल्कि राज्य सरकारों की भूमिका भी सीमित हो जाएगी। क्रॉस-सब्सिडी खत्म हो जाएगी और राज्य सरकार को गरीबों, निम्न आय वर्ग और किसानों को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी का खर्च अग्रिम रूप से जमा करना पड़ेगा।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निजी कंपनियां बिना किसी निवेश के पावरकॉम के मौजूदा ढांचे का उपयोग करेंगी, जिससे बिजली दरों में भारी वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने पंजाब सरकार से इस विधेयक का कड़ा विरोध करने की मांग की, ताकि गरीब उपभोक्ताओं, किसानों और संघीय ढांचे के अधिकारों की रक्षा की जा सके।Screenshot_2453

Edited By: Karan Singh

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