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लुधियाना-जालंधर में अवैध खनन के आरोपों पर संयुक्त कमेटी गठित
खनन क्षेत्र की सीमांकन और जांच के आदेश, अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
लुधियाना और जालंधर जिलों में अवैध खनन के आरोपों के बाद खनन और राजस्व विभाग की संयुक्त कमेटी बनाई गई है, जो स्वीकृत क्षेत्र का सीमांकन और जांच करेगी।
लुधियाना और जालंधर जिलों के खनन और राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी शुक्रवार को गठित की गई है, जो स्वीकृत खनन क्षेत्र की सीमांकन (डिमार्केशन) करेगी और अधिकार क्षेत्र की पुष्टि करेगी। यह जानकारी पनग्रेन के चेयरपर्सन तेजपाल सिंह गिल ने दी।
यह निर्णय अतिरिक्त उपायुक्त (ADC), जगराओं की निगरानी में दोनों जिलों के अधिकारियों की बैठक के दौरान लिया गया।
यह बैठक तब बुलाई गई जब तेजपाल सिंह गिल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन के आरोप लगाए थे।
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता द्वारा लिखे गए इस पत्र में लुधियाना और जालंधर के अधिकारियों पर “लापरवाही” के आरोप भी लगाए गए और मामले की “उच्च स्तरीय” जांच की मांग की गई।
अपनी शिकायत में गिल ने बताया कि लुधियाना के गोरसियां खान मोहम्मद गांव के निवासियों ने उन्हें वीडियो के माध्यम से अवैध खनन की जानकारी दी थी।
उन्होंने कहा कि जब वह स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे, तो वहां करीब एक दर्जन ओवरलोडेड वाहन और कई मशीनें खनन कार्य में लगी हुई थीं।
गिल ने बताया कि ओवरलोडेड टिप्परों और ट्रैक्टरों की आवाजाही के कारण गांव की सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है।
उनके अनुसार, इस संबंध में पहले कार्यकारी अभियंता (XEN) और उपमंडल अधिकारी (SDO) को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की “निष्क्रियता” से उनके और खनन माफिया के बीच संभावित “मिलीभगत” का संकेत मिलता है, जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
गिल ने बताया कि उन्होंने लुधियाना के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से भी संपर्क कर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि नदी में करीब एक किलोमीटर लंबा और लगभग 100 फीट ऊंचा अवैध बांध (एम्बैंकमेंट) बनाया गया है, जिससे आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
गांववासियों ने पर्यावरण को हो रहे नुकसान और अपनी कृषि भूमि पर संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है।
गिल ने बताया कि उन्होंने मौके पर ही राज्य के खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल से संपर्क किया, जिन्होंने विस्तृत जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
